Anxiety and Overthinking: छोटी-छोटी बातों पर एंजाइटी होने लगती है? इन आसान तरीकों से पाएं इस पर काबू
Anxiety and Overthinking: कभी किसी छोटी-सी बात को लेकर बार-बार सोचना, किसी अनहोनी की आशंका से परेशान होना या बिना किसी बड़ी वजह के बेचैनी महसूस करना एंजाइटी का संकेत हो सकता है। कई बार आने वाले समय की चिंता इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति का ध्यान काम पर लगना मुश्किल हो जाता है। दिल की धड़कन तेज होना, बेचैनी, चिड़चिड़ापन और नींद में परेशानी भी इसके साथ महसूस हो सकती है।
हर बार चिंता होना किसी बीमारी का संकेत नहीं होता। रोजमर्रा की जिंदगी में तनाव और परेशानियां होना सामान्य है, लेकिन जब छोटी-छोटी बातें लगातार दिमाग पर हावी रहने लगें और रोज के काम प्रभावित होने लगें, तब इस पर ध्यान देना जरूरी है। कुछ आसान आदतें मन को शांत करने और चिंता को संभालने में मदद कर सकती हैं।
एंजाइटी को काबू करने के जरूरी टिप्स
सबसे पहले समझें कि चिंता किस वजह से हो रही है
एंजाइटी को कम करने की शुरुआत उसके कारण को समझने से करें। जब भी बहुत ज्यादा चिंता महसूस हो, कुछ देर रुककर खुद से पूछें कि आखिर किस बात की चिंता हो रही है। समस्या को पहचानने से दिमाग में चल रहे विचारों को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
गहरी सांस लेने की आदत डालें
चिंता के समय कुछ मिनट धीमी और गहरी सांस लेना उपयोगी हो सकता है। आराम से बैठें और धीरे-धीरे सांस अंदर लें। कुछ सेकंड रुककर सांस को बाहर छोड़ें। इस प्रक्रिया को कई बार दोहराएं। इससे शरीर को रिलैक्स करने में मदद मिल सकती है और बेचैनी कुछ कम महसूस हो सकती है।
हर बात को बार-बार सोचने से बचें
किसी घटना के बारे में लगातार सोचते रहना चिंता को और बढ़ा सकता है। अगर किसी समस्या का समाधान अभी संभव नहीं है तो बार-बार उसी के बारे में सोचने के बजाय अपना ध्यान किसी दूसरे काम में लगाएं। किताब पढ़ना, संगीत सुनना, टहलना या घर का कोई आसान काम करना ध्यान को दूसरी तरफ ले जा सकता है।
रोज थोड़ा समय एक्सरसाइज के लिए निकालें
शारीरिक गतिविधि केवल शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हो सकती है। रोज 20 से 30 मिनट पैदल चलना, हल्की एक्सरसाइज या योग जैसी गतिविधियां तनाव कम करने में मदद कर सकती हैं। शुरुआत अपनी क्षमता के अनुसार करें।
नींद और कैफीन पर भी दें ध्यान
कम नींद से चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ सकता है। इसलिए रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें। अगर चाय या कॉफी ज्यादा लेने से बेचैनी बढ़ती महसूस हो तो इसकी मात्रा कम करना बेहतर हो सकता है।
अपनी परेशानी किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करें
चिंता को अकेले मन में दबाकर रखने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना राहत दे सकता है। अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने से कई बार समस्या को नए नजरिए से देखने में मदद मिलती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर चिंता लंबे समय तक बनी रहती है, बार-बार होती है या काम, पढ़ाई, रिश्तों और नींद पर असर डाल रही है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। अचानक बहुत ज्यादा घबराहट, सांस लेने में गंभीर परेशानी या खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार जैसी स्थिति में तुरंत पेशेवर मदद लें।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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Overthinking: दिमाग में बार-बार घूमती हैं बातें? ओवरथिंकिंग रोकने के ये 8 आसान तरीके अपनाएं
How to Stop Overthinking: हर किसी के मन में कभी न कभी ऐसी बातें चलती रहती हैं, जिन्हें चाहकर भी रोक पाना आसान नहीं होता। एक ही बात को बार-बार सोचने की आदत धीरे-धीरे दिमाग को थका सकती है और मन का सुकून भी छीन सकती है। कई बार छोटी-सी चिंता भी इतनी बड़ी लगने लगती है कि उसका असर पूरे दिन के मूड पर पड़ता है।
अगर आपका दिमाग भी हर वक्त किसी न किसी सोच में उलझा रहता है, तो कुछ आसान आदतें इसमें राहत दिलाने में मदद कर सकती हैं। जानें रोजमर्रा की ऐसी ही 8 आसान आदतें, जो ओवरथिंकिंग को कम करने में मदद कर सकती हैं।
1. जो आपके हाथ में है, उस पर ध्यान दें
हर स्थिति को बदलना हमारे हाथ में नहीं होता। इसलिए उन चीजों पर ध्यान दें जिनके लिए आप अभी कुछ कर सकते हैं और बाकी बातों को लेकर खुद को परेशान करने से बचें।
2. अपने विचार लिखें
दिमाग में लगातार चल रहे विचारों को कागज पर लिखना उन्हें व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है। इससे यह समझना आसान हो सकता है कि असली परेशानी क्या है।
3. खुद को किसी काम में व्यस्त रखें
खाली समय में कई बार एक ही बात बार-बार दिमाग में घूमती रहती है। ऐसे में टहलना, किताब पढ़ना, घर का काम या कोई पसंदीदा एक्टिविटी करना ध्यान को दूसरी तरफ ले जा सकता है।
4. हर बात का तुरंत जवाब न खोजें
हर सवाल का जवाब उसी समय मिलना जरूरी नहीं है। कुछ चीजों को समय देने से स्थिति ज्यादा साफ हो सकती है और बेवजह सोचते रहने की आदत कम हो सकती है।
5. सोशल मीडिया से थोड़ा ब्रेक लें
लगातार सोशल मीडिया देखना भी दिमाग को व्यस्त रख सकता है। दिन में कुछ समय फोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर खुद को आराम देने की कोशिश करें।
6. सांसों पर ध्यान दें
जब विचार बहुत ज्यादा बढ़ जाएं, तो कुछ देर शांत बैठकर धीरे-धीरे सांस लेने पर ध्यान दें। कुछ मिनट का यह ब्रेक आपको वर्तमान पल पर ध्यान लगाने में मदद कर सकता है।
7. नींद को नजरअंदाज न करें
कम या खराब नींद से थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। इसलिए सोने का समय तय रखें और रात में स्क्रीन टाइम कम करने की कोशिश करें।
8. खुद से बात करने का तरीका बदलें
हर गलती के लिए खुद को दोष देने के बजाय खुद से उसी तरह बात करें जैसे आप किसी करीबी दोस्त से करते। खुद के प्रति थोड़ा नरम रवैया अनावश्यक चिंता को संभालने में मदद कर सकता है।
कब लेनी चाहिए मदद?
कभी-कभी ज्यादा सोचना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर चिंता या लगातार विचार आपकी नींद, काम, पढ़ाई या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगें, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना बेहतर है।
(Disclaimer): यह खबर सामान्य जानकारी के लिए है और किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या का इलाज नहीं है। अगर लगातार चिंता, बेचैनी या ओवरथिंकिंग आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है, तो योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
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