जरूरत की खबर- तुलसी पत्ती के फायदे:शुगर-बीपी कम करे, हार्ट को रखे हेल्दी, डॉक्टर से जानें इससे जुड़े मिथ और फैक्ट, ये लोग न खाएं
घर में किसी को सर्दी-जुकाम या खांसी हो जाए तो दादी-नानी अक्सर ‘तुलसी का काढ़ा’ पीने की सलाह देती हैं। चरक संहिता जैसे आयुर्वेदिक ग्रंथों में तुलसी को 'जड़ी-बूटियों की रानी' कहा गया है। हिंदू परंपरा में इसे पवित्र पौधा माना जाता है। साथ ही लंबे समय से औषधीय उपयोग के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है। ‘जर्नल ऑफ आयुर्वेद एंड इंटीग्रेटिव मेडिसिन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, तुलसी में एंटीऑक्सिडेंट, एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। ये गुण शरीर को कई बीमारियों से बचाते हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम तुलसी के फायदों पर विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइटटुडे’ सवाल- तुलसी की पत्तियों में ऐसे कौन-से पोषक और बायोएक्टिव तत्व होते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- तुलसी के बायोएक्टिव कंपाउंड की लिस्ट और उनके प्रभाव ग्राफिक में देखिए- सवाल- तुलसी की पत्ती खाने से शरीर को क्या हेल्थ बेनिफिट होता है? जवाब- तुलसी के पत्तों में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट गुण और बायोएक्टिव कंपाउंड्स शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं। सभी संभावित फायदे ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या तुलसी स्ट्रेस और एंग्जाइटी को कम करने में मदद करती है? जवाब- हां, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन डॉ. अनु अग्रवाल के मुताबिक, तुलसी में एडेप्टोजेनिक गुण होता है। यानी यह शरीर को तनाव से निपटने में मदद करती है। हालांकि इसे एंग्जाइटी या किसी मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम का इलाज नहीं मानना चाहिए। सवाल- क्या तुलसी के पत्ते नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद करते हैं? जवाब- हां, साल 2017 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, तुलसी के अर्क से नींद की क्वालिटी बेहतर होती है। सवाल- क्या तुलसी ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकती है? जवाब- हां, इसमें मौजूद यूजेनॉल, पॉलीफेनॉल और फ्लेवोनॉयड्स जैसे कंपाउंड्स ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करते हैं। हालांकि यह डायबिटीज की दवाओं का विकल्प नहीं है। सवाल- क्या तुलसी पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद है? जवाब- हां, इसमें मौजूद बायोएक्टिव कंपाउंड्स डाइजेस्टिव सिस्टम को सपोर्ट करते हैं। ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, पेट की अंदरूनी परत (गैस्ट्रिक म्यूकोसा) को नुकसान से बचाने में मदद करती है। यही कारण है कि आयुर्वेद में लंबे समय से तुलसी का इस्तेमाल अपच, गैस, पेट फूलना और पेट की अन्य हल्की समस्याओं में किया जाता रहा है। सवाल- क्या तुलसी हार्ट हेल्थ और कोलेस्ट्रॉल के लिए फायदेमंद हो सकती है? जवाब- शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस और सूजन बढ़ने पर ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचता है। इससे आर्टरीज (धमनियों) में फैट जमा होने लगता है। तुलसी में मौजूद यूजेनॉल और अन्य बायोएक्टिव कंपाउंड्स इसे कम करने में मदद करते हैं। साथ ही तुलसी कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करती है, जो हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करते हैं। हालांकि यह हार्ट डिजीज की दवा का विकल्प नहीं है। सवाल- क्या इन्हें सीधे चबाना बेहतर है या चाय/काढ़े के रूप में लेना? जवाब- यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप तुलसी का सेवन किस उद्देश्य से कर रहे हैं। तुलसी की ताजी पत्तियां चबाने पर इसके कुछ वाष्पशील (वॉलेटाइल) बायोएक्टिव कंपाउंड्स सीधे मिलते हैं। वहीं चाय या काढ़े में लेने पर पानी में घुलने वाले कई अन्य लाभकारी तत्व शरीर तक पहुंचते हैं। सवाल- क्या तुलसी के पत्ते हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित हैं? किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए? जवाब- आमतौर पर सीमित मात्रा में तुलसी हर किसी के लिए सुरक्षित है। लेकिन कुछ लोगों को डेली तुलसी खाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या ज्यादा तुलसी खाने से कोई साइड इफेक्ट हो सकता है? जवाब- हां, जरूरत से ज्यादा तुलसी खाने से मतली, दस्त या पेट से जुड़ी अन्य परेशानी हो सकती है। इसलिए सीमित मात्रा में ही इसे खाना चाहिए। सवाल- तुलसी से जुड़े मिथ और फैक्ट्स क्या हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- मिथ-1: तुलसी के पत्ते खाने से कोई बीमारी नहीं होती। सच्चाई- सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन किसी बीमारी से बचाव की गारंटी नहीं। मिथ-2: रोज खाली पेट तुलसी खाने से इम्यूनिटी मजबूत होती है। सच्चाई- इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करती है, लेकिन ‘इम्यूनिटी बूस्टर’ मानना सही नहीं। मिथ-3: तुलसी डायबिटीज को ठीक कर सकती है। सच्चाई- ब्लड शुगर कम करने में मददगार, लेकिन दवा का विकल्प नहीं। मिथ-4: तुलसी खाने से तनाव और अनिद्रा पूरी तरह खत्म हो जाती है। सच्चाई- थोड़ा सुधार संभव, लेकिन इसका इलाज नहीं। मिथ-5: तुलसी कैंसर से बचाती है। सच्चाई- वैज्ञानिक सबूत नहीं है। तुलसी से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब सवाल- क्या सुबह खाली पेट तुलसी के पत्ते खाना जरूरी है या इसे दिन में किसी भी समय लिया जा सकता है? जवाब- इसे दिन में किसी भी समय खाया जा सकता है। सवाल- एक दिन में कितने तुलसी के पत्ते खाना उचित है? जवाब- डॉक्टर अनु अग्रवाल के मुताबिक, डेली 3-5 ताजी तुलसी की पत्तियां खाना सुरक्षित है। सवाल- क्या तुलसी के पत्ते रोज खाने से सर्दी-जुकाम से बचाव होता है? जवाब- तुलसी इम्यूनिटी को सपोर्ट कर सकती है। लेकिन रोज पत्ते खाने से सर्दी-जुकाम से बचाव होता है, इसका पुख्ता प्रमाण नहीं है। सवाल- क्या तुलसी के पत्ते सांस से जुड़ी तकलीफों में फायदेमंद हैं? जवाब- तुलसी के कुछ कंपाउंड में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए गए हैं। लेकिन अस्थमा या सांस की बीमारी के इलाज के लिए इसे दवा का विकल्प नहीं मानना चाहिए। सवाल- क्या तुलसी मुंह की बदबू और ओरल हेल्थ के लिए फायदेमंद है? जवाब- तुलसी में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जो ओरल हेल्थ के लिए मददगार हो सकते हैं। लेकिन यह ब्रशिंग और डेंटल केयर का विकल्प नहीं है। सवाल- क्या तुलसी को अदरक, शहद या नींबू के साथ लेना ज्यादा फायदेमंद है? जवाब- इनके साथ लेने से स्वाद और कुछ पोषक तत्व बढ़ सकते हैं। सवाल- क्या तुलसी के पत्तों को उबालने से उनके पोषक तत्व कम हो जाते हैं? जवाब- हां, उबालने से कुछ पोषक तत्व और बायोएक्टिव कंपाउंड कम हो सकते हैं। हालांकि इसका असर उबालने के तरीके और समय पर निर्भर करता है। धीमी आंच में थोड़ी देर पकाना बेहतर है। सवाल- क्या तुलसी के पत्तों को फ्रिज में रखना सही है? जवाब- हां, तुलसी की ताजी पत्तियों को फ्रिज में रखा जा सकता है। इन्हें सूखने से बचाने के लिए एयरटाइट या पेपर टॉवल में लपेटकर रखना बेहतर है। ************** ग्राफिक्स- अंकुर बंसल …………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- मसल्स बनाने के लिए स्टेरॉयड्स न लें: ब्रेस्ट टिश्यू बढ़ने का खतरा, 14 अन्य हेल्थ रिस्क, डॉक्टर से पूछे बिना न लें इन दिनों मस्कुलर बॉडी बनाने का शॉर्टकट युवाओं की सेहत पर भारी पड़ रहा है। कई युवा तेजी से मसल्स बढ़ाने के लिए स्टेरॉयड इंजेक्शन ले रहे हैं। इससे शरीर की बनावट तो बदल जाती है, लेकिन हार्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है। पूरी खबर पढ़िए…
आपका पैसा- रोज ₹100 इन्वेस्ट कर बनें लखपति:फाइनेंशियल एक्सपर्ट से जानें कहां लगाएं पैसा, कैसे छोटी रकम से बनेगा बड़ा फंड
हम अक्सर सोचते हैं कि करोड़पति बनने के लिए बड़ी सैलरी या मोटा निवेश जरूरी है। लेकिन निवेश की दुनिया में कई बार छोटी रकम और लंबा समय बड़ा कमाल कर देते हैं। रोजाना सिर्फ ₹100 का निवेश करके बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी है नियमित निवेश की आदत और धैर्य। कई लोग निवेश इसलिए शुरू नहीं कर पाते, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं। जबकि फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेश की शुरुआत रकम से नहीं, बल्कि अनुशासन से होती है। इसलिए आज ‘आपका पैसा’ में जानेंगे कि सिर्फ 100 रुपए निवेश करके बड़ा फंड कैसे बनाएं। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- कुशाग्र मोहन, फाइनेंशियल एक्सपर्ट, को-फाउंडर, निक्सेपा कैपिटल, लखनऊ सवाल- क्या रोज ₹100 की बचत से निवेश शुरू करना सही रणनीति है? जवाब- हां, खासकर उन लोगों के लिए, जो कम रकम की वजह से निवेश शुरू नहीं कर पाते हैं। रोज ₹100 यानी महीने के करीब ₹3,000 होते हैं। इस रकम को नियमित रूप से निवेश करने पर समय के साथ अच्छा फंड तैयार किया जा सकता है। सवाल- किन लोगों को रोज ₹100 से निवेश की शुरुआत करनी चाहिए? जवाब- यह उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है, जो एक साथ बड़ी रकम नहीं लगा सकते। खासकर स्टूडेंट्स और गृहिणियां छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं। यह किन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है, ग्राफिक में देखिए- सवाल- रोज ₹100 कहां निवेश करें, किस विकल्प में बेहतर रिटर्न मिल सकता है? जवाब- सही विकल्प आपके लक्ष्य, निवेश की अवधि और रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर करता है। इसे पॉइंटर्स से समझिए- SIP (इक्विटी म्यूचुअल फंड) PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) RD (रेकरिंग डिपॉजिट) FD (फिक्स डिपॉजिट) क्या बेहतर? सवाल- अगर रोज ₹100 निवेश करें तो 10, 20 और 30 साल में कितना फंड बन सकता है? जवाब- रोज ₹100 यानी महीने के करीब ₹3,000 नियमित निवेश करने पर लंबे समय में कंपाउंडिंग से बड़ी रकम तैयार हो सकती है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर ₹100 की जगह ₹150 या ₹200 रोज बचाएं, तो कितना बड़ा फर्क पड़ेगा? जवाब- रोज की निवेश राशि में सिर्फ ₹50 या ₹100 की बढ़ोतरी छोटी लग सकती है, लेकिन लंबे समय में इसका असर काफी बड़ा होता है। इसकी वजह यह है कि आप हर महीने ज्यादा पैसा निवेश करते हैं और उस अतिरिक्त रकम पर भी समय के साथ रिटर्न मिलता रहता है। उदाहरण के लिए- अगर लंबे समय तक निवेश जारी रहे और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिले, तो यही बढ़ी हुई रकम 20-30 साल में फंड में लाखों रुपए का अंतर पैदा कर सकती है। ग्राफिक में देखिए- डेली ₹200 निवेश का अनुमानित आंकड़ा नीचे ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या हर वित्तीय लक्ष्य के लिए ₹100 रोज की बचत काफी है? जवाब- नहीं, ₹100 रोज से निवेश की शुरुआत की जा सकती है, लेकिन यह हर लक्ष्य के लिए पर्याप्त नहीं है। इसे ऐसे समझिए- छोटे लक्ष्य: ट्रैवल, गैजेट या बाइक के डाउन पेमेंट जैसे लक्ष्यों के लिए ₹100 रोज से निवेश की शुरुआत की जा सकती है। बच्चों की पढ़ाई: पढ़ाई का खर्च समय के साथ बढ़ता है। इसलिए ₹100 से शुरुआत कर सकते हैं, लेकिन आगे निवेश की रकम बढ़ानी होगी। घर खरीदना: घर के डाउन पेमेंट जैसे बड़े लक्ष्य के लिए सिर्फ ₹100 रोज पर्याप्त नहीं होगा। कमाई बढ़ने के साथ निवेश भी बढ़ाना जरूरी होगा। रिटायरमेंट: यह लंबी अवधि और बड़ी रकम वाला लक्ष्य है। ₹100 रोज शुरुआती निवेश हो सकता है। लेकिन रिटायरमेंट के लिए समय के साथ निवेश बढ़ाना जरूरी है। सवाल- अगर आय बढ़े, तो ₹100 की बचत कब और कितनी बढ़ानी चाहिए? जवाब- आमतौर पर हर साल निवेश की रकम 10% तक बढ़ाने से शुरुआत की जा सकती है। इसे स्टेप-अप SIP कहते हैं। इसमें निवेश की रकम हर साल एक तय प्रतिशत या रकम से बढ़ाई जाती है। जैसे- सवाल- क्या ₹100 रोज की बचत को बीच में रोकने से नुकसान हो सकता है? जवाब- हां, इससे लंबे समय में बनने वाला फंड कम हो सकता है। इसकी मुख्य वजह कंपाउंडिंग का फायदा कम होना है। कंपाउंडिंग का मतलब है कि आपके लगाए पैसे पर रिटर्न मिलता है और फिर उस बढ़ी हुई रकम पर भी आगे रिटर्न मिलता रहता है। मान लीजिए, सवाल- ₹100 रोज निवेश करने वालों की सबसे बड़ी गलतियां क्या हैं? जवाब- छोटी रकम से निवेश शुरू करना अच्छी बात है, लेकिन कुछ गलतियां लंबे समय में बनने वाले फंड पर असर डाल सकती हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या छोटी रकम से निवेश शुरू करने पर भी समय-समय पर पोर्टफोलियो रिव्यू करना जरूरी है? जवाब- हां, निवेश की रकम छोटी हो या बड़ी, समय-समय पर उसका रिव्यू करना जरूरी है। इससे पता चलता है कि- ************ ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ………………………… ये खबर भी पढ़ें… आपका पैसा- टाइम पर EMI नहीं चुकाया तो क्या होगा: RBI ने रिकवरी रूल्स में किया बदलाव, जानिए अब बैंक आपके साथ क्या नहीं कर सकता आजकल कोई भी लोन लेना पहले के मुकाबले आसान हो गया है। लेकिन किसी वजह से EMI मिस हो जाए या लोन डिफॉल्ट हो जाए, तो बैंक ग्राहक के खिलाफ क्या कार्रवाई कर सकता है। इसे लेकर लोगों के मन में अक्सर कई सवाल रहते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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