बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) टीम में शामिल किए जाने से भारत में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। केकेआर ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 2026 सीज़न के लिए बांग्लादेशी तेज गेंदबाज को टीम में शामिल किया है, जिसका भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और कई धार्मिक समूहों ने कड़ा विरोध जताया है। भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई दरार और पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की खबरों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच यह विवाद सामने आया है। हालांकि केकेआर ने इस बात पर जोर दिया है कि यह फैसला पूरी तरह से क्रिकेट योग्यता के आधार पर लिया गया था। लेकिन विवाद लगातार बढ़ता गया।
रहमान का आईपीएल करियर
दिसंबर में हुए आईपीएल नीलामी में केकेआर द्वारा मुस्तफिजुर को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदे जाने के बाद यह मामला और बढ़ गया। रहमान 2016 से अब तक आठ आईपीएल संस्करणों में खेल चुके हैं, उन्होंने केवल 2019 और 2020 के सीजन में हिस्सा नहीं लिया। इससे पहले वे सनराइजर्स हैदराबाद, मुंबई इंडियंस, दिल्ली कैपिटल्स, चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के लिए खेल चुके हैं। आगामी सीजन तीन बार की आईपीएल चैंपियन केकेआर के साथ उनका पहला सीजन होने वाला था।
भारत-बांग्लदेश रिश्ता
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में खटास आ गई। शेख हसीना पिछले साल अगस्त में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच भारत भाग गई थीं। बाद में एक न्यायाधिकरण ने उन्हें उनकी अनुपस्थिति में मृत्युदंड सुनाया। उन पर आंदोलन के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई में कथित भूमिका का आरोप था, जिसमें कई छात्र मारे गए थे। हाल के महीनों में, ढाका ने विभिन्न मुद्दों पर भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को कई बार तलब किया है, जबकि भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त को तलब किया है। भारत के प्रति व्यापक रूप से मित्र मानी जाने वाली अवामी लीग सरकार से मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने से बांग्लादेश की राजनयिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। पाकिस्तान के साथ संबंध मजबूत करने के ढाका के प्रयासों ने क्षेत्रीय समीकरण को और भी जटिल बना दिया है।
लगातार हो रहा विरोध
कई धार्मिक संगठनों ने रहमान को आईपीएल में शामिल करने को लेकर सवाल खड़े किए और कहा कि आईपीएल को क्षेत्रीय परिस्थितियों से अलग नहीं किया जा सकता। आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर ने गुरुवार को बांग्लादेशी क्रिकेटर को टीम में शामिल किए जाने की निंदा की। भाजपा नेता संगीत सोम ने भी इसी तरह की टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के कारण मुस्तफिजुर रहमान को टीम में शामिल करना अस्वीकार्य है। उन्होंने शाहरुख खान पर राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध कार्य करने का भी आरोप लगाया। आध्यात्मिक गुरु रामभद्राचार्य ने भी शाहरुख खान की आलोचना करते हुए उनके सार्वजनिक रुख पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि यह राष्ट्रीय हितों के विपरीत है।
अखिल भारतीय इमाम संगठन के मुख्य इमाम उमर अहमद इल्यासी ने कहा है कि बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के मालिक शाहरुख खान को देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्या शाहरुख खान को बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों की कोई जानकारी नहीं है?... यह खेदजनक है कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों की जानकारी होने के बावजूद केकेआर ने आईपीएल नीलामी में एक बांग्लादेशी खिलाड़ी को चुना। शाहरुख खान को देश से माफी मांगनी चाहिए... उन्हें बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों की निंदा करते हुए एक बयान भी जारी करना चाहिए।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (एआईएए) के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने शाहरुख खान का समर्थन किया। रशीदी ने कहा कि बीसीसीआई को बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) टीम से बाहर करने का निर्देश नीलामी से पहले ही दे देना चाहिए था। शाहरुख खान की कोई गलती नहीं है, क्योंकि उन्होंने बीसीसीआई के नियमों और विनियमों के तहत ही खिलाड़ी को खरीदा है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों का बोझ क्रिकेट पर नहीं डाला जाना चाहिए। केकेआर द्वारा बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान के चयन पर हो रही आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने पत्रकारों से कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों का बोझ क्रिकेट पर नहीं डाला जाना चाहिए। हमें कुछ क्षेत्रों को दूसरों से अलग रखने की कोशिश करनी चाहिए। हम बांग्लादेश से संपर्क कर रहे हैं और उनसे अपने अल्पसंख्यकों की रक्षा और देखभाल के लिए सही कदम उठाने का आग्रह कर रहे हैं, और यह संदेश जारी रहना चाहिए। भाजपा नेता संगीत सिंह सोम ने कहा कि बांग्लादेश में जिस तरह हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है, महिलाओं और लड़कियों के साथ बलात्कार हो रहा है, उनके घर जलाए जा रहे हैं और भारत विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं। इन सबके बावजूद शाहरुख खान जैसे गद्दार, मैं उन्हें गद्दार कह रहा हूं क्योंकि उनके पास जो कुछ भी है, वह भारत ने दिया है, भारत की जनता ने दिया है, लेकिन वे इस पैसे का निवेश कहां करते हैं? वे इसे एक ऐसे देश के खिलाड़ियों पर खर्च करते हैं जो भारत के खिलाफ काम कर रहा है।
BCCI का एक्शन
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने कोलकाता नाइट राइडर्स को आईपीएल 2026 सीज़न के लिए बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को टीम से बाहर करने का निर्देश दिया है। बीसीसीआई का कहना है कि वह फ्रेंचाइजी को खिलाड़ी बदलने की अनुमति देगा। बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया ने एएनआई को बताया, “हाल ही में चल रहे घटनाक्रमों को देखते हुए, बीसीसीआई ने केकेआर फ्रेंचाइजी को बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को टीम से बाहर करने का निर्देश दिया है और बीसीसीआई ने यह भी कहा है कि अगर वे किसी खिलाड़ी को बदलने का अनुरोध करते हैं, तो बीसीसीआई इसकी अनुमति देगा।”
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उत्तराखंड सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू के एक शर्मनाक बयान ने पूरे बिहार में राजनीतिक भूचाल ला दिया है। एक सार्वजनिक मंच से दिये गये उनके बयान में बिहार की लड़कियों को पैसों में खरीदने जैसी घृणित और अपमानजनक बात कही गयी। बयान का आशय यह था कि बिहार की लड़कियां 20 से 25 हजार रुपये में मिल जाती हैं।
यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। देखते ही देखते यह केवल एक व्यक्ति का बयान न रहकर बिहार की महिलाओं और समाज के सम्मान का सवाल बन गया। राजनीतिक दलों से लेकर सामाजिक संगठनों तक ने इस बयान को महिलाओं की गरिमा पर सीधा हमला करार दिया। राष्ट्रीय जनता दल ने इस बयान को बिहार की बेटियों का खुलेआम अपमान बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। पार्टी नेताओं ने कहा कि यह केवल एक असभ्य टिप्पणी नहीं बल्कि स्त्रियों को बाजारू वस्तु समझने वाली मानसिकता का प्रदर्शन है। कांग्रेस ने भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बिहार की महिलाएं बिकाऊ नहीं हैं और इस तरह की सोच रखने वालों को सार्वजनिक जीवन में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गिरधारी लाल साहू को नोटिस जारी किया और जवाब तलब किया। आयोग ने बयान को न केवल अपमानजनक बल्कि सामाजिक सौहार्द को तोड़ने वाला बताया। इस बीच भाजपा खुद को बचाने की कोशिश में दिखी। पार्टी नेताओं ने बयान से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह पार्टी की संस्कृति नहीं है और महिलाओं के सम्मान से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। विवाद बढ़ता देख गिरधारी लाल साहू ने सफाई दी और कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने माफी भी मांगी लेकिन तब तक मामला हाथ से निकल चुका था।
देखा जाये तो यह घटना केवल एक असंयमित बयान का मामला नहीं है, बल्कि यह उस सड़ी हुई सोच का प्रदर्शन है जो आज भी भारतीय राजनीति और समाज के भीतर जिंदा है। महिलाओं को कीमत में तौलने वाली मानसिकता किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। देखा जाये तो बिहार की महिलाओं को सस्ती और उपलब्ध बताने वाला बयान सीधे तौर पर पूरे समाज को नीचा दिखाने की कोशिश है। यह सिर्फ बिहार की बेटियों का नहीं, बल्कि पूरे देश की महिलाओं का अपमान है। जिस समाज में महिलाओं को देवी कहा जाता है, उसी समाज में उन्हें बाजार की वस्तु की तरह पेश करना सबसे बड़ी विडंबना है।
आश्चर्य की बात यह भी है कि यह बयान किसी आम व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक मंत्री के पति का है। यह तथ्य इस मामले को और भी गंभीर बना देता है। जब सत्ता से जुड़े लोग इस तरह की भाषा और सोच का प्रदर्शन करते हैं, तो यह सवाल उठता है कि सत्ता की नीतियों और इरादों में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की कितनी सच्ची प्रतिबद्धता है। राजनीतिक रूप से यह विवाद भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। बिहार जैसे राज्य में जहां सामाजिक सम्मान और क्षेत्रीय अस्मिता के मुद्दे बेहद संवेदनशील हैं, वहां इस तरह का बयान पार्टी की छवि को गहरी चोट पहुंचा सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को पूरी ताकत से भुनाने में जुट गया है और महिला सम्मान को केंद्र में रखकर भाजपा को घेर रहा है। आने वाले समय में इसके राजनीतिक प्रभाव साफ दिखेंगे।
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