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EZ vs SZ: दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन ने कसा शिकंजा, बल्लेबाजी के बाद गेंदबाजों का जलवा; साउथ जोन की आधी टीम पवेलियन लौटी 

EZ vs SZ: दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन ने साउथ जोन के खिलाफ पकड़ बना ली है। मैच के तीसरे दिन ईस्ट जोन की पहली पारी के स्कोर 708 के जवाब में साउथ जोन की पारी लड़खड़ा गई। साउथ जोन की आधी टीम 200 के अंदर पवेलियन लौट गई है। देवदत्त पड्डिकल ने अर्धशतक लगाया। उन्होंने 62 रन की पारी खेली।

पड्डिकल के अलावा नारायन जगदीशन 32, शेख रसीद 27 रन बनाकर चलते बने। श्रेयस गोपाल 26 रन बनाकर आउट हो गए।कप्तान तिलक वर्मा 56 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं। साउथ जोन ने तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक 6 विकेट के नुकसान पर 242 रन बना लिए हैं। अब टीम की पूरी जिम्मेदारी कप्तान तिलक वर्मा पर है। उनकी कोशिश होगी कि चौथे दिन लंबी पारी खेलकर टीम को फॉलोऑन से बचाया जाए। हालाकि अब साउथ जोन के पास ज्यादा बल्लेबाजी मौजूद नहीं है। साउथ जोन को फॉलोऑन से बचने के लिए 350 रन अधिक का स्कोर बनाना होगा।

चेपॉक के मैदान में ईस्ट जोन ने पहले बल्लेबाजी में शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद गेंदबाजी में भी जबरदस्त परफॉर्म किया। ईस्ट जोन की तेज गेंदबाजी में मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार की जोड़ी ने साउथ जोन की शुरुआती झटके दिए। इससे टीम ऊबर नहीं पाई और 174 के स्कोर पर आधी टीम पवेलियन लौट गई। शमी और मुकेश कुमार दोनों ने 2-2 विकेट चटकाए। शिखर मोहन और मोहम्मद कुरैशी को एक-एक विकेट मिला। 

इससे पहले ईस्ट जोन की तरफ 708 रनों का विशाल स्कोर बनाया था। जिसमें कप्तान ईशान किशन ने 270 रनों की बेहतरीन पारी खेली। उनके अलावा कुमार कुशाग्र ने भी शतक लगाया। शिखर मोहन ने 85 रन बनाए। सलामी बल्लबाजों में वैभव सूर्यवंशी ने 44 और अभिमन्यु ईश्वरन ने 72 रन बनाए थे। जबकि लोअर ऑर्डर में अंकुल रॉय ने 45 और मोहम्मद कुरैशी ने 40 रन की पारी खेली। वहीं, साउथ जोन की तरफ से त्रिपुर्णा विजय ने 4 विकेट लिए जबकि चामा मिलिंद और श्रेयस गोपाल ने 2-2 विकेट चटकाए।

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Janmashtami Vrat Rules: जानिए रात 12 बजे के बाद श्रीकृष्ण पूजा के बाद Vrat Parana की सही विधि

आज यानी देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। इस दिन भक्तजन श्रद्धा भाव से श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। पूरे दिन व्रत रखने के बाद रात के समय भगवान कृष्ण के जन्म के समय पूजा-अर्चना की जाती है और इन्हें भोग लगाया जाता है। 
श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव के बाद व्रत का पारण भी किया जात है। जन्माष्टमी के व्रत का पारण बेहद खास होता है। वैसे यह अन्य व्रतों के पारण से काफी अलग होता है। इसमें व्रत वाले दिन ही उपवास खोला जाता है। इसके साथ ही व्रत के पारण में अन्न खाना भी अनिवार्य है। आइए आपको बताते हैं कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी के पारण की विधि और व्रत खोलते वक्‍त क्‍या खाना चाहिए। 

रात 12 बजे के बाद किया जाता है पारण
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी की रात करीब 12 बजे भगवान के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान लड्डू गोपाल का अभिषेक, पूजन, आरती और भोग लगाया जाता है।
ऐसे में कई लोग भगवान के जन्म और पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करके उसी समय व्रत खोलें। इसका मतलब है कि रात 12 बजे के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं। कुछ लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद ही व्रत का पारण करते हैं। 

सबसे पहले लें भगवान का प्रसाद 
जब आप व्रत खोलें तो सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया गया प्रसाद ग्रहण जरुर करें। पारण की शुरुआत चरणामृत, माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी या ताजे फल से होनी चाहिए। पहले चरणामृत ग्रहण करें, फिर थोड़ा प्रासद लेकर अपना व्रत खोलें।

जन्माष्टमी पर रात में ही क्यों खोला जाता है व्रत?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि का विशेष महत्व होता है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इसी समय के दौरान हुआ था। इसलिए रात 12 बजे भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है। 

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