SUV Comparison: हुंडई क्रेटा या मारुति विक्टोरिस? जानें कीमत, फीचर्स और माइलेज में कौन बेस्ट?
SUV Comparison: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में मिड-साइज एसयूवी सेगमेंट काफी लोकप्रिय है। इस सेगमेंट में हुंडई क्रेटा लंबे समय से मजबूत पकड़ बनाए हुए है, जबकि मारुति सुजुकी विक्टोरिस की एंट्री के बाद मुकाबला और कड़ा हो गया है। दोनों एसयूवी में डिजाइन, फीचर्स, इंजन, माइलेज और कीमत के मामले में कई अंतर हैं। ऐसे में नई एसयूवी खरीदने से पहले दोनों की तुलना करना जरूरी है।
डिजाइन और लुक
हुंडई क्रेटा को बोल्ड और आधुनिक डिजाइन दिया गया है। इसमें बड़ी फ्रंट ग्रिल के साथ कनेक्टेड एलईडी डीआरएल और कनेक्टेड एलईडी टेल-लाइट्स दी गई हैं, जो इसे प्रीमियम लुक देती हैं।
वहीं, मारुति सुजुकी विक्टोरिस का डिजाइन ज्यादा मस्कुलर और स्पोर्टी नजर आता है। इसमें कंपनी की सिग्नेचर ग्रिल, शार्प एलईडी हेडलैंप और आक्रामक बॉडी क्लैडिंग दी गई है।
इंटीरियर और फीचर्स
हुंडई क्रेटा के केबिन में प्रीमियम फील देखने को मिलती है। इसमें 10.25-इंच का डुअल-स्क्रीन सेटअप, वेंटिलेटेड सीट्स, पैनोरमिक सनरूफ और बोस प्रीमियम साउंड सिस्टम जैसे फीचर्स मिलते हैं।
दूसरी ओर, मारुति सुजुकी विक्टोरिस में बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, सनरूफ, हेड-अप डिस्प्ले, 360-डिग्री कैमरा और वायरलेस चार्जिंग जैसे आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं।
इंजन और माइलेज
हुंडई क्रेटा में 1.5-लीटर पेट्रोल, 1.5-लीटर टर्बो-पेट्रोल और 1.5-लीटर डीजल इंजन के विकल्प मिलते हैं। इसके साथ मैनुअल, आईवीटी, डीसीटी और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के विकल्प उपलब्ध हैं।
वहीं, मारुति सुजुकी विक्टोरिस में 1.5-लीटर माइल्ड-हाइब्रिड पेट्रोल और 1.5-लीटर स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड इंजन दिए गए हैं। इसमें मैनुअल, 6-स्पीड ऑटोमैटिक और ई-सीवीटी ट्रांसमिशन का विकल्प मिलता है।
माइलेज की बात करें तो हुंडई क्रेटा 17.4 से 21.8 किलोमीटर प्रति लीटर तक का एआरएआई माइलेज देती है। वहीं, मारुति सुजुकी विक्टोरिस का हाइब्रिड वेरिएंट 28.65 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज देने में सक्षम है।
सुरक्षा और कीमत
सुरक्षा के मामले में दोनों एसयूवी में 6 एयरबैग, एबीएस, ईबीडी, ईएससी, ऑल-डिस्क ब्रेक और लेवल-2 एडीएएस जैसे फीचर्स दिए गए हैं।
कीमत की बात करें तो मारुति सुजुकी विक्टोरिस की शुरुआती कीमत 10.50 लाख रुपये है, जबकि हुंडई क्रेटा की शुरुआती कीमत 10.91 लाख रुपये है। विक्टोरिस की कीमत करीब 19.99 लाख रुपये तक और क्रेटा की कीमत 20.11 लाख रुपये तक जाती है।
अगर आपकी प्राथमिकता ज्यादा इंजन विकल्प और डीजल पावरट्रेन है तो हुंडई क्रेटा बेहतर विकल्प हो सकती है। वहीं, बेहतर माइलेज और हाइब्रिड तकनीक के लिए मारुति सुजुकी विक्टोरिस पर विचार किया जा सकता है।
(मंजू कुमारी)
Insurance Hike: थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होगा महंगा? साल के अंत तक बदल सकती हैं प्रीमियम दरें
Insurance Hike: ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच वाहन मालिकों के खर्च में एक और बढ़ोतरी हो सकती है। मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के प्रीमियम की दरों में बदलाव की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचने की बात सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, नई दरों को इस साल के अंत तक अधिसूचित किया जा सकता है। इससे पहले मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की दरों में साल 2022 में बदलाव किया गया था। बीमा कंपनियां लंबे समय से आईआरडीएआई के सामने प्रीमियम बढ़ाने की मांग रख रही हैं। कंपनियों का कहना है कि मौजूदा दरों पर बढ़ते क्लेम और अन्य खर्चों को संभालना लगातार मुश्किल हो रहा है।
करीब 24.77 करोड़ वाहन मालिकों पर पड़ सकता है असर
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस में बदलाव का असर देश में बड़ी संख्या में वाहन मालिकों पर पड़ सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 24.77 करोड़ वाहन इसके दायरे में आ सकते हैं। ऐसे में अगर नई दरों में बढ़ोतरी की जाती है तो इसका प्रभाव बड़े स्तर पर दिखाई दे सकता है।
हालांकि, दरें तय करते समय यह कोशिश की जाएगी कि बीमा कंपनियों के बढ़ते खर्च और क्लेम के दबाव को ध्यान में रखा जाए, लेकिन वाहन मालिकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी बहुत ज्यादा न बढ़े।
बीमा कंपनियां क्यों चाहती हैं प्रीमियम में बढ़ोतरी?
बीमा कंपनियों के मुताबिक मोटर इंश्योरेंस कारोबार में क्लेम का खर्च लगातार बढ़ रहा है। सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मुआवजे, कानूनी लागत और दावों की औसत राशि में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों का खर्च पहले की तुलना में काफी ज्यादा हो गया है।
इसी वजह से कंपनियों को मौजूदा प्रीमियम दरों पर अंडरराइटिंग लॉस का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में कंपनियां प्रीमियम की समीक्षा कर दरों में संशोधन की मांग कर रही हैं।
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस का प्रीमियम क्यों बढ़ सकता है?
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस में वाहन मालिक की गलती से किसी तीसरे व्यक्ति को होने वाली चोट, नुकसान या अन्य कानूनी देनदारी को कवर किया जाता है। सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में मुआवजे और कानूनी खर्च में बढ़ोतरी का सीधा असर बीमा कंपनियों की लागत पर पड़ता है।
इसी बढ़ते खर्च को देखते हुए कंपनियां प्रीमियम दरों में बदलाव चाहती हैं। हालांकि, नई दरें तय करते समय बीमा कंपनियों की वित्तीय स्थिति और वाहन मालिकों की वहन क्षमता, दोनों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
2022 में हुआ था पिछला बदलाव
मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की दरों में इससे पहले 2022 में बदलाव किया गया था। अब नई समीक्षा के बाद अगर प्रीमियम बढ़ाया जाता है तो कार, दोपहिया और अन्य श्रेणियों के वाहन मालिकों को पहले की तुलना में ज्यादा बीमा प्रीमियम देना पड़ सकता है।
हालांकि, अलग-अलग वाहन श्रेणियों के लिए प्रीमियम में कितना बदलाव होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसका अंतिम फैसला नई दरें अधिसूचित होने के बाद ही सामने आएगा।
वाहन मालिकों पर क्या पड़ेगा असर?
अगर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की दरें बढ़ती हैं तो वाहन मालिकों की सालाना बीमा लागत बढ़ जाएगी। इसका असर कारों के साथ-साथ दोपहिया वाहनों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल प्रीमियम दरों की समीक्षा अंतिम चरण में होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में वाहन मालिकों की नजर अब साल के अंत तक आने वाली नई दरों पर रहेगी। नई दरें लागू होने के बाद ही यह साफ होगा कि किस वाहन श्रेणी के लिए प्रीमियम में कितनी बढ़ोतरी की गई है।
(मंजू कुमारी)
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