रत्न पहनने के बाद कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? जान लें किन कामों की है मनाही
ज्योतिष में रत्नों को ग्रहों से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि सही रत्न व्यक्ति की कुंडली में कमजोर माने जाने वाले ग्रह के प्रभाव को मजबूत करने में मदद कर सकता है। यही वजह है कि लोग पुखराज, नीलम, माणिक, मोती और दूसरे रत्न धारण करते हैं।
BRICS Summit 2026: 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता'; विकास केंद्रित एजेंडे से वैश्विक मंच को दिशा देने की तैयारी
राजधानी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत पूरी तरह तैयार है। मिस्र, ईरान और यूएई जैसे नए सदस्यों के जुड़ने से ब्रिक्स की ताकत और दायरा काफी बढ़ चुका है।
हालांकि, बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच पश्चिमी देश इस संगठन को एक नए शीत युद्ध के अखाड़े और अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देने वाले गुट के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में बहुध्रुवीय दुनिया का संतुलन बनाए रखना भारत के लिए मुख्य परीक्षा होगी।
'पश्चिम-विरोधी' छवि को तोड़ने का कूटनीतिक प्रयास
रूस और चीन लगातार ब्रिक्स को अमेरिकी डॉलर और पश्चिमी वित्तीय व्यवस्था के विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश में रहते हैं। ईरान की मौजूदगी से भी पश्चिमी थिंक-टैंक इसे विरोधी धड़े की नजर से देख रहे हैं। लेकिन भारत, जिसके अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ बेहद मजबूत रणनीतिक व आर्थिक रिश्ते हैं, ब्रिक्स को किसी भी ब्लॉक के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देना चाहता। भारत की कोशिश है कि यह समूह किसी टकराव का जरिया बनने के बजाय अंतरराष्ट्रीय सहयोग का जरिया बने।
सकारात्मक और विकास-केंद्रित एजेंडे पर भारत का ध्यान
इस बार ब्रिक्स सम्मेलन की आधिकारिक थीम "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) रखी गई है। भारत इस सम्मेलन में भू-राजनीतिक विवादों को दरकिनार कर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, हरित ऊर्जा संक्रमण, आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश करेगा।
ग्लोबल साउथ का सेतु बनेगा भारत
भारत खुद को केवल पश्चिम या पूर्व के किसी एक पाले में सीमित रखने के बजाय 'ग्लोबल साउथ मतलब विकासशील और उभरते देशों की एक जिम्मेदार और निष्पक्ष आवाज के रूप में पेश कर रहा है। भारत की रणनीति यह सुनिश्चित करना है कि चीन अपनी आर्थिक ताकत या कर्ज नीति के जरिए ब्रिक्स पर एकतरफा दबदबा न बना सके। भारत इस महामंच के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि विकासशील देशों की तरक्की बिना किसी टकराव के समावेशी नीतियों से संभव है।
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