ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर वैश्विक आर्थिक विकास की नई कहानी लिख सकता है भारत: इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स
नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और ब्रिक्स बिजनेस फोरम के दौरान शुक्रवार को उद्योग जगत के नेताओं और वैश्विक विशेषज्ञों ने भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, नवाचार क्षमता और वैश्विक सहयोग में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत की मजबूत विकास दर, उद्यमिता संस्कृति, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश केंद्रित नीतियां ब्रिक्स देशों के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं।
फिक्की (एफआईसीसीआई) की महानिदेशक ज्योति विज ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि ब्रिक्स अब 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों का एक बड़ा और प्रभावशाली समूह बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह समूह वैश्विक उत्पादन, व्यापार, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखलाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने आगे कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग से रोजगार सृजन, नवाचार और नए कारोबारी अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स बिजनेस फोरम में नेताओं की चर्चाओं से यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि सभी देश साझा विकास और सामूहिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
द कॉर्पोरेट प्रोफाइल्स इंडिया के संस्थापक और अध्यक्ष नीरज भटनागर ने आईएएनएस से कहा कि भारत की ताकत केवल 7.8 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर नहीं है, बल्कि देश के लोगों की उद्यमशीलता है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय अपने दम पर आगे बढ़ने और कारोबार खड़ा करने की सोच रखते हैं।
उन्होंने कहा, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भारत के पास ऐसी क्षमता है, जो ब्रिक्स देशों और दुनिया के अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।
वहीं, यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की प्रबंध निदेशक उपासना अरोरा ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत गति से आगे बढ़ रही है और इसका श्रेय सरकार की प्रभावी नीतियों को जाता है। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और वैश्विक आर्थिक साझेदारियां भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेंगी।
उपासना अरोरा ने आगे कहा कि ब्रिक्स मंच पर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की मौजूदगी भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत उन ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है, जिसकी लंबे समय से कल्पना की जा रही थी, और देश वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इस बीच, जेके पेपर लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक तथा इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयर हर्षपति सिंघानिया ने आईएएनएस से कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ने की संभावना है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे डि-डॉलराइजेशन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत पहले ही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और रूस जैसे देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। उन्होंने बताया कि डॉलर वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका बनाए रखेगा, लेकिन द्विपक्षीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ सकता है।
वहीं, आईएएनएस से बात करते हुए बरिस्ता कॉफी के सीईओ रजत अग्रवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य कारोबारी समुदाय को विकास प्रक्रिया में अधिक सक्रिय रूप से शामिल करना है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने, रोजगार सृजन बढ़ाने और विभिन्न देशों के बीच कारोबारी संबंधों को मजबूत करने में सरकार की पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
रजत अग्रवाल ने आगे कहा कि पिछले पांच से छह वर्षों में भारत ने एक मजबूत और एकीकृत डिजिटल भुगतान प्रणाली विकसित की है। आज देश के अंतिम छोर तक डिजिटल भुगतान का व्यापक प्रसार हो चुका है। उन्होंने बताया कि यदि यूपीआई और भारतीय डिजिटल पेमेंट मॉडल को वैश्विक स्तर पर विस्तारित किया जाता है, तो यह भारत की वित्तीय कूटनीति और आर्थिक प्रभाव को और मजबूत करेगा।
इसके अलावा, फ्रांस की भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्था बीआरजीएम में अंतरराष्ट्रीय भू-क्षेत्रों के निदेशक ओलिवियर फ्रेजो ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए भारत के नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन की सराहना की और कहा कि ऊर्जा परिवर्तन और औद्योगिक विकास के लिए क्रिटिकल मिनरल्स का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि रेयर अर्थ एलिमेंट्स, टंगस्टन और कॉपर जैसे खनिज आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। विशेष रूप से कॉपर नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा संक्रमण की प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
फ्रेजो ने आगे कहा कि भारत और फ्रांस के बीच तकनीक, संसाधन, भूवैज्ञानिक डेटा और खनिज प्रसंस्करण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि बीआरजीएम और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के बीच अन्वेषण, डेटा साइंस और खनिज प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी चल रही है।
ओलिवियर फ्रेजो ने आईएएनएस से कहा कि भारत का विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ाना एक दूरदर्शी रणनीति है, क्योंकि इससे किसी एक देश पर निर्भरता कम होगी और खनिज आपूर्ति शृंखला अधिक सुरक्षित बनेगी। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोप दोनों लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं हैं और दीर्घकालिक एवं विश्वसनीय विकास की दिशा में काम कर रहे हैं।
उन्होंने आगे यह भी कहा कि केवल रीसाइक्लिंग से भविष्य की मांग पूरी नहीं हो सकेगी, क्योंकि क्रिटिकल मिनरल्स की मांग लगातार बढ़ने वाली है। इसलिए नए स्रोतों की खोज और टिकाऊ उत्पादन व्यवस्था विकसित करना आवश्यक होगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
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Explainer: फिल्मों में कैमरा सामने होकर भी क्यों नहीं आता नजर, मिरर शॉट में छिपी होती हैं ये खास ट्रिक
Filmy Mirror Shot Tricks: आपने गौर किया होगा कि कई बार फिल्म देखते समय एक सीन ऐसा आता है जिसमें एक्टर मिरर के सामने खड़ा होता है. वह अपने बाल ठीक कर रहा होता है, चेहरा देख रहा होता है, मेकअप कर रहा होता है या फिर आईने में खुद को देखकर इमोशनल दिखाई देता है. कैमरा भी ऐसा लगता है जैसे बिल्कुल सामने मौजूद है, लेकिन हैरानी की बात यह लगती है कि आईने में कैमरा या कैमरामैन कहीं नजर नहीं आता. आखिर ऐसे कैसे किया जाता है. क्योंकि रियल में मिरर के सामने रखी हर चीज नजर आती है. लेकिन फिल्मों में कैमरा क्यों नहीं दिखाई देता है.
दरअल, यहां फिल्ममेकर्स किसी एक ट्रिक पर डिपेंड नहीं रहते. सीन की जरूरत, कैमरे की मूवमेंट, सेट की बनावट और अपने बजट के हिसाब से अलग-अलग तरीके की ट्रिक अपनाते हैं. कई बार कैमरा सिर्फ एंगल बदलने से ही गायब हो जाता है, कई बार पूरा सेट दो हिस्सों में बनाया जाता है और एक्टर के डुप्लीकेट को सामने खड़ा कर दिया जाता है. आज के दौर में जरूरत पड़ने पर वीएफएक्स की मदद भी ली जाती है. यही वजह है कि जो सीन दर्शक को बिल्कुल नॉर्मल आईने वाला शॉट लगता है, उसके पीछे काफी सोच और तैयारी होती है.
सबसे आसान तरीका क्या होता है?
मिरर शॉट का सबसे बेसिक तरीका उतना सीक्रेट नहीं है जितना स्क्रीन पर दिखाई देता है. कैमरे को आईने के बिल्कुल सामने रखने के हल्का सा साइड में रखा जाता है. फिर कैमरे का एंगल इस तरह सेट किया जाता है कि वह एक्टर और उसका रिफ्लेक्शन तो रिकॉर्ड कर ले, लेकिन कैमरा खुद मिरर में नहीं नजर आता है. कई बार लेंस की लंबी फोकल लेंथ और फ्रेमिंग से भी इस सेटअप को तैयार किया जाता है.
यही वजह है कि फिल्मों में एक्टर आईने के बिल्कुल सामने दिखाई देता है लेकिन कैमरा असल में उसके ठीक पीछे नहीं होता. वह थोड़ा लेफ्ट या राइट, कभी-कभी काफी दूरी पर भी हो सकता है. कैमरा इतनी सूझबूझ से रखा जाता है कि दर्शक को फ्रेम देखकर ऐसा महसूस हो कि वह एक्टर के ठीक सामने मौजूद है.इसमें एक और दिलचस्प बात यह भी है. कई बार एक्टर असल में अपने रिफ्लेक्शन की तरफ नहीं बल्कि कैमरे की तरफ देख रहा होता है. फ्रेमिंग ऐसी रखी जाती है कि दर्शक को लगता है कि वह आईने में खुद को देख रहा है.
आईना थोड़ा टेढ़ा हो तो पूरा गेम बदल जाता है?
बता दें कि आईने की पोजिशन मिरर शॉट में बहुत बड़ा रोल निभाती है. अगर आईना बिल्कुल सीधा कैमरे के सामने है और कैमरा भी उसी लाइन में रखा गया है, तो कैमरे की रिफ्लेक्शन दिखाई दे सकती है. वहीं, अगर आईने को थोड़ा एंगल देकर कैमरे की पोजिशन बदल दी जाए तो रिफ्लेक्शन बदल सकती है. सिनेमैटोग्राफर इसी ट्रिक का यूज करते हैं. कैमरा ऐसी जगह रखा जाता है जहां से एक्टर का रिफ्लेक्शन दिखाई दे, लेकिन कैमरे की रिफ्लेक्शन का ना दिखाई पड़े. दर्शक को आईना सीधा दिखाई देता है, जबकि असल सेटअप में उसके एंगल और कैमरे की पोजिशन के बीच काफी सोच-समझकर दूरी बनाई गई होती है. इसी वजह से कुछ फिल्मों में आईने का एंगल थोड़ा अजीब दिखाई देता है, लेकिन कहानी देखते समय ऑडियंस उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देता. कैमरे का काम ही यही है कि तकनीकी चीजें छिपी रहें और स्क्रीन पर सब कुछ नेचुरल लगे.
कई बार आईना भी नहीं होता
यह मिरर शॉट की सबसे दिलचस्प ट्रिक्स में से एक है. पर्दे पर फिल्म को देख रही ऑडियंस को लगता है कि एक्टर आईने में खुद को देख रहा है, लेकिन असल में वहां आईना होती ही नहीं है. कैमरे और एक्टर के बीच खाली जगह होती है और दूसरी तरफ दूसरा कलाकार या डुप्लीकेट खड़ा होता है.
इस टेक्नॉलॉजी का यूज खासतौर पर तब किया जा सकता है जब डायरेक्टर को कैमरे को ऐसी जगह से गुजारना हो जहां असली आईना कैमरा दिखाई देगा. सेट को दो हिस्सों में तैयार किया जाता है और दोनों हिस्सों को बिल्कुल मैच कराया जाता है. जिसके बाद कैमरा एक हिस्से को शूट करता है और फिर एडिटिंग के जरिए कैमरा को आईने के पार दिखाया जाता है. कुछ फिल्मों में इस तरह के शॉट के लिए एक्टर के डुप्लीकेट का यूज किया जाता है.
वन-वे मिरर भी आता है काम
इनता ही नहीं कुछ खास शॉट्स में वन-वे मिरर या टू-वे मिरर जैसी टेक्नॉलॉजी का भी यूज किया जाता है. इसका बेसिक आइडिया यह होता है कि हर तरफ आईने की तरह दिखाई दे और दूसरी तरफ से कैमरे को शूट करने की जगह मिल जाए. इसका यूज यह है कि कैमरा ऐसी जगह छिप सकता है जहां ऑडियंस उसे देख ही नहीं सकता. ब्लैक स्वान जैसे कुछ फेमस मिरर शॉट्स में वन-वे मिरर जैसी टेक्नॉलॉजी के यूज की चर्चा हुई है. यानी यहां सिर्फ आईना लगाकर कैमरा छिपाना काफी नहीं होता. लाइट कहां से आ रही है, एक्टर किस डायरेक्शन में देख रहा है और बैकग्राउंड कितना चमकीला है, इन सभी चीजों को कंट्रोल करना पड़ता है.
वीएफएक्स का भी किया जाता है यूज
आज के दौर में सबसे बढ़िया ऑप्शन वीएफएक्स है. अगर किसी शॉट में कैमरा आईने में दिखाई दे रहा है और उसे सेट पर गायब करना पॉसिबल नहीं होता है तो फिल्ममेकर्स कैमरे को वीएफएक्स को हटा देते हैं. इसके लिए पहले पूरा सीन शूट किया जाता है. फिर जरूरत के हिसाब से बैकग्राउंड या खाली फ्रेम भी रिकॉर्ड किया जा सकता है. पोस्ट-प्रोडक्शन में वीएफएक्स आर्टिस्ट रिफ्लेक्शन वाले हिस्से को ध्यान से देखकर कैमरा और जरूरत पड़ने पर कैमरा ऑपरेटर को डिजिटल तरीके से हटा देते हैं.
हालांकि, स्थिर शॉट में यह काम थोड़ा आसान हो सकता है, लेकिन कैमरा घूम रहा हो, एक्टर उसके सामने से गुजर रहा हो या आईने में लगातार बदलता रिफ्लेक्शन दिखाई दे रहा हो तो काम काफी कठिन हो जाता है. ऐसे शॉट में फ्रेम-दर-फ्रेम काम और ट्रैकिंग की जरूरत पड़ सकती है. आपको बता दें कि फिल्ममेकिंग में मूवी से आईने के सामने से कैमरे को छिपाने के लिए कई और भी ट्रिक का यूज किया जाता है.
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