सुप्रीम कोर्ट ने NRI को यौन-उत्पीड़न मामले में राहत दी:कहा-मां की असहमति पर शादी न होना बेईमानी नहीं; शादी के झूठे वादे का आरोप लगा था
सुप्रीम कोर्ट ने जाम्बिया में रह रहे NRI व्यक्ति को यौन संबंध के मामले में राहत दी है। कोर्ट ने उसके खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी। महिला ने आरोप लगाया कि व्यक्ति ने दिसंबर 2024 तक उससे शादी करने का वादा किया था। लेकिन जनवरी 2025 में उसने कहा कि उसकी मां इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं है। इसके बाद उसने शादी से इनकार कर दिया। उसके दावा किया कि पहली मुलाकात के बाद वे दो दिन होटल में रहे थे। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 7 सितंबर के आदेश जारी कर कहा कि शिकायत में सहमति से बने संबंध का संकेत मिलता है। इसमें यह नहीं बताया गया कि व्यक्ति ने धोखे से महिला को यौन संबंध के लिए तैयार किया। शादी का झूठा वादा करने पर 10 साल की सजा यह मामला गुजरात के वडोदरा का है। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 लगाई गई थी। इस धारा में धोखे या शादी का झूठा वादा करके बनाए गए यौन संबंध पर 10 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। शिकायत के अनुसार, महिला नवंबर 2022 में फेसबुक के जरिए व्यक्ति से जुड़ी थी। दोनों पहली बार फरवरी 2024 में वडोदरा में मिले। महिला का आरोप था कि व्यक्ति उसे एक होटल में ले गया। दोनों वहां दो दिन रहे। महिला के अनुसार, व्यक्ति ने उससे शादी करने की बात कही और दोनों के बीच यौन संबंध बने। गुजरात हाईकोर्ट का फैसला गुजरात हाईकोर्ट ने मई में मामले में दखल देने और व्यक्ति के खिलाफ FIR रद्द करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि शादी के उस वादे में अंतर करना होगा, जो अच्छे इरादे से किया गया लेकिन बाद में पूरा नहीं हो सका। दूसरे मामले में वादा शुरू से ही शादी करने के इरादे के बिना किया जाता है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि व्यक्ति की मां के शादी का विरोध करने वाली वजह को ‘सच्चा और उचित कारण’ नहीं माना जा सकता। व्यक्ति का पक्ष व्यक्ति ने इस आरोप से इनकार किया कि रिश्ता झूठे वादे पर आधारित था। उसके वकील ने गुजरात हाईकोर्ट में कहा था कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे। वकील ने व्यक्ति की महिला की मां और मातृ पक्ष की मौसी से हुई बातचीत का भी हवाला दिया। हाईकोर्ट में दी गई दलीलों के अनुसार, व्यक्ति ने महिला की मां को 40 हजार रुपए भेजे थे। उसने मुंबई से करीब 32 हजार रुपए के मोबाइल फोन और कपड़े भी भेजे थे। ----------------------------
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह से गुहार लगाई:अब तक 3 धमकी भरे लेटर मिल चुके, इनमें नाम, पता, गाड़ी नंबर तक का जिक्र
ऑल पीएम पैकेज एम्प्लॉइज फोरम, कश्मीर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से घाटी में कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिल रही धमकी के मामले में मदद की गुहार लगाई है। फोरम ने कहा कि पिछले 16 वर्षों के दौरान कश्मीर लौटकर अपनी जिंदगी फिर से बसाने वाले कर्मचारी हाल में धमकी भरे पत्रों और डराने-धमकाने की घटनाओं में बढ़ोतरी के बाद अपनी सुरक्षा को लेकर अधिक चिंतित हैं। फोरम के अनुसार, वर्ष 2021 के बाद हुई लक्षित हत्याओं ने लोगों में डर की भावना पैदा कर दी है और 1990 के दशक की यादें फिर से ताजा हो गई हैं। इससे संभावित नए विस्थापन की आशंका भी बढ़ गई है। फोरम ने दैनिक भास्कर से हुई बातचीत में कहा- ऊपरी तौर पर स्थिति सामान्य दिखाई दे सकती है, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव बना हुआ है। कर्मचारी संगठन ने कहा कि दी गई धमकियों में बस्तियों का भी जिक्र किया गया है। इससे परिवारों में चिंता पैदा हो गई है। फोरम ने केंद्र सरकार से धमकियों की गहन जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, खुफिया तंत्र को मजबूत करने और एहतियाती सुरक्षा उपाय बढ़ाने के साथ-साथ पीएम पैकेज कर्मचारियों के आवास और बस्तियों की व्यापक सुरक्षा समीक्षा की मांग की है। ULC ने कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाने का दावा किया है ‘जहां भी रहो या जाओगे, तुम्हारी हर हरकत पर नजर रखी जा रही है। सरकार के लिए काम करके मोहरा मत बनो।’ कश्मीरी पंडितों को ये धमकी लगातार तीसरी बार मिली है। 7 अगस्त से लेकर 1 सितंबर तक उन्हें 3 धमकी भरे लेटर मिले हैं। इनमें सिर्फ कश्मीरी पंडितों के नाम ही नहीं, घर का पता, गाड़ी का नंबर और रंग तक सब लिखा है। निजी जानकारी लीक होने के बाद कश्मीरी पंडित और डर गए हैं। वे जांच और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। टेलीग्राम चैनल के जरिए ये लेटर यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) ने भेजा था, जिसे खुफिया एजेंसियां आतंकी संगठन लश्कर का मुखौटा संगठन मानती हैं। वे आतंकियों की प्रॉपर्टी जब्त किए जाने से नाराज हैं। ULC ने सरकारी विभागों और कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाने का दावा किया है। इसके बाद सरकार ने कश्मीरी पंडितों को वर्क फ्रॉम होम करने के निर्देश दिए हैं। कश्मीरी पंडित बोले…'घर में छिपकर बैठे रहने से क्या होगा' साहिल आगे कहते हैं, 'प्रशासन घर से काम करने को कह रहा है, लेकिन इससे क्या बदलेगा। बच्चों को स्कूल भेजना होता है, बाजार के कई काम होते हैं और घर के बीमार या बुजुर्ग लोगों के लिए दवाइयां लानी होती है। ऐसे में घर बैठकर काम कैसे चलेगा।' साहिल नागरिक समाज और NGOs से भी धमकियों की निंदा करने की अपील करते हैं। वे कहते हैं, 'सरकार अगर सुरक्षा नहीं दे सकती, तो कर्मचारियों को सेल्फ डिफेंस के लिए लाइसेंसी हथियार और ट्रेनिंग ही दे दे।' ‘37 साल पहले छूटा घर, आज भी लौटने का इंतजार‘ जम्मू में रह रहे विस्थापित कश्मीरी पंडित राकेश कौल कहते हैं कि धमकी भरे लेटर 37 साल पुराने डर को ताजा कर रहे हैं, जिसने कश्मीरी पंडितों को घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था। वे कहते हैं, 'पहले अखबारों में कश्मीर छोड़ने और हमें गद्दार बताने वाले संदेश छपते थे, आज भी वही भाषा इस्तेमाल हो रही है।' एजेंसियों को इन धमकियों की जड़ तक पहुंचना चाहिए। खासकर तब, जब लेटर में लोगों के नाम-पते तक लिखे हैं। कश्मीरी पंडितों के परिवार भले डरे हुए है, लेकिन धमकियों से उनका मनोबल नहीं टूटेगा। हमने 400 साल से ज्यादा का इतिहास देखा है। कश्मीरी पंडित न कभी झुका है, न झुकेगा। कौल दावा करते हैं कि आज भी कश्मीर में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो कश्मीरी पंडितों के वापसी का अधिकार समझते हैं। हालांकि कुछ लोग हमारी वापसी नहीं चाहते। इनमें धमकाने वाले लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने विस्थापितों की जमीन और प्रॉपर्टी पर पर कब्जा कर रखा है। वे कश्मीरी पंडितों के पिछले 37 सालों के विस्थापन को सरकारों के साथ-साथ समाज की भी नाकामी मानते हैं। कौल बार-बार दी जा रही धमकियों की जांच की मांग करते हैं। वे कहते हैं कि पता लगाया जाए कि इनके पीछे कौन है और उसका मकसद क्या है। सब सामान्य तो 37 साल बाद भी कश्मीरी पंडित घाटी से बाहर क्यों? संगठन पनुन कश्मीर के संस्थापक-संयोजक डॉ. अग्निशेखर विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए अलग जमीन की मांग करते हैं। उनका कहना है कि सरकारें लाखों टूरिस्ट्स आने और हालात सामान्य होने का दावा करती हैं। अगर सब कुछ बदल गया है, तो कश्मीरी पंडित अब भी यहां से बाहर क्यों हैं? आर्टिकल-370 हटने के बाद भी उनकी वापसी और पुनर्वास क्यों नहीं हो सका।' अग्निशेखर दावा करते हुए कहते हैं, 'आतंकवाद का नेटवर्क और इकोसिस्टम अब भी मौजूद है। आतंकवाद का स्वरूप बदला है और हाइब्रिड आतंकवाद जैसे नए खतरे सामने हैं। हाल में मिली धमकियां PM पैकेज के तहत कश्मीर लौटे कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं। अगर ये कर्मचारी और उनके परिवार सुरक्षित नहीं, तो हम किसकी वापसी की बात कर रहे हैं।' 'कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए जरूरी नीति बनाई जानी चाहिए। घर से काम करना स्थायी समाधान नहीं है। सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को सामान्य जिंदगी के लिए तो घर से बाहर निकलना ही पड़ेगा।' अग्निशेखर आशंका जताते हुए कहते हैं, ‘हालिया धमकियां किसी बड़ी घटना की तैयारी का संकेत हो सकती हैं। अधिकारियों को इन्हें गंभीरता से लेना चाहिए। पुलिस-प्रशासन ने मामले पर साधी चुप्पी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां धमकी भरे इन लेटर्स की प्रमाणिकता और इसके सोर्स की जांच कर रही है। हमने इस मामले में पुलिस और प्रशासन का पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन वो चुप्पी साधे हुए है। धमकी भरे लेटर और निजी जानकारी सार्वजनिक करने को लेकर टेक्नोक्रेट और सोशल एक्टिविस्ट संजय सप्रू ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को ओपन लेटर लिखा है और मामले में दखल देने की मांग की है। संजय ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से मामले की निश्चित समय-सीमा में जांच कर दोषियों और इसके पीछे के नेटवर्क को बेनकाब करने की मांग की है। ………………… ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में दाऊद के बाद भारत का नया दुश्मन शहजाद 16 मार्च 2025 की बात है, सुबह के 4 बज रहे थे। पंजाब के जालंधर में रहने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर नवदीप सिंह संधू के घर पर हमला हुआ। बालकनी में ग्रेनेड फेंका गया। पंजाब पुलिस और NIA ने इस मामले में हार्दिक कंबोज नाम के एक लोकल युवक को पकड़ा। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी ने ले ली और मामला हाई प्रोफाइल हो गया। पढ़िए पूरी खबर…
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