भारत में आकर ब्रिक्स के मंच से गरजे पुतिन, बोले- वर्चस्व वापस पाने की नाकाम कोशिश कर रहे पुराने नेता, जानिए उनके निशाने पर कौन
Putin BRICS Speech: नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों और पारंपरिक आर्थिक महाशक्तियों पर करारा हमला बोला है। पुतिन ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस समय गहरे और बुनियादी बदलाव हो रहे हैं।
BRICS समिट पर दो गुट में बंटी कांग्रेस, चिदंबरम ने उठाया सवाल तो थरूर ने बताया मोदी सरकार की उपलब्धि
नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS समिट से पहले कांग्रेस में मतभेद सामने आए हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने BRICS जैसे बहुपक्षीय संगठनों की सदस्यता से भारत को मिलने वाले ठोस फायदे पर सवाल उठाया है. वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत में BRICS सम्मेलन की मेजबानी को देश की कूटनीतिक ताकत और वैश्विक प्रभाव का संकेत बताया है. दोनों नेताओं की अलग-अलग राय के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है.
चिदंबरम ने पूछा- BRICS से भारत को क्या फायदा?
पी. चिदंबरम ने बुधवार को सवाल उठाया कि भारत BRICS के साथ-साथ G20, QUAD और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे कई महत्वपूर्ण बहुपक्षीय संगठनों का सदस्य है. ऐसे में यह विचार करने की जरूरत है कि इन संगठनों से भारत को वास्तव में कितना ठोस लाभ मिला है.
उन्होंने BRICS सम्मेलनों का भी जिक्र किया. भारत में इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में BRICS से जुड़े सम्मेलन हो चुके हैं. चिदंबरम का सवाल इसी संदर्भ में था कि इतने वर्षों में इन मंचों की सदस्यता से भारत को हासिल हुए व्यावहारिक और ठोस लाभ का आकलन किया जाना चाहिए.
थरूर ने बताया BRICS का महत्व
दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने BRICS को ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया. शनिवार को उन्होंने कहा कि भारत में इस तरह के बड़े सम्मेलन का आयोजन देश की कूटनीतिक क्षमता को दर्शाता है.
थरूर के मुताबिक, 11 सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं का भारत आना और उन्हें एक मंच पर साथ लाना अपने आप में भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है. उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ में 100 से अधिक देश हैं, लेकिन BRICS में शामिल 11 प्रमुख देश दुनिया की बड़ी आबादी और करीब 41 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसलिए BRICS को नजरअंदाज करना संभव नहीं है.
12-13 सितंबर को दिल्ली में BRICS समिट
18वां BRICS समिट 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा. सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत 11 सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही गई है. समिट में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, टेक्नोलॉजी और ऊर्जा सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है. भारत की अध्यक्षता में होने वाला यह सम्मेलन देश के लिए अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखने का अवसर भी होगा.
BRICS के सामने कई चुनौतियां भी
हालांकि, थरूर ने BRICS की चुनौतियों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि सभी सदस्य देशों के विदेश नीति संबंधी हित और प्राथमिकताएं एक जैसी नहीं हैं. इसलिए बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एकमत बनाना आसान नहीं है. उन्होंने ईरान-इजराइल और रूस-यूक्रेन जैसे मुद्दों का उदाहरण दिया. मई में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में इन विषयों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद सामने आए थे और साझा बयान जारी नहीं हो सका था. ऐसी स्थिति में भारत ने BRICS अध्यक्ष के तौर पर अपनी ओर से चेयर डिक्लेरेशन जारी किया था. थरूर के अनुसार, अगर आगामी सम्मेलन में भी बड़े वैश्विक मुद्दों पर सहमति नहीं बनती है तो BRICS की एकजुटता को लेकर सवाल उठ सकते हैं. यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक चुनौती होगी.
BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना
चिदंबरम और थरूर के बयानों के बीच BJP ने कांग्रेस पर राजनीतिक हमला बोला है. BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने थरूर के बयान को चिदंबरम की टिप्पणी के विपरीत बताया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि थरूर द्वारा BRICS समिट को भारत के लिए बड़ी प्रतिष्ठा बताना कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राय को दिखाता है. इस तरह BRICS समिट शुरू होने से पहले ही कांग्रेस नेताओं के बयानों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है. एक तरफ भारत के लिए BRICS की उपयोगिता और ठोस लाभ पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इसे भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका और वैश्विक मंच पर प्रभाव दिखाने वाला महत्वपूर्ण अवसर बताया जा रहा है.
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