मोबाइल की छोटी सी स्क्रीन से सीरीज में काम करने तक, भवुन बाम ने सुनाया अपने स्ट्रगल का किस्सा
Bhuvan Bam Journey Youtuber to Actor: भुवन बाम (Bhuvan Bam) यूट्यूब की दुनिया में बड़ा नाम हैं, उन्होंने यूट्यूब के लिए कंटेंट बनाना उस समय शुरू किया था, जब लोगों को इस बारे में ज्यादा जानकारी भी नहीं थी. अब वह यूट्यूब की दुनिया से अलग हटकर एक एक्टर के तौर पर पहचान बना रहे हैं. उन्होंने साल 20216-17 में TVF's Bachelors नाम की सीरीज से एक्टिंग करियर की शुरुआत की. उसके बाद वह कई सीरज में नजर आए. आज उनकी एक सीरीज रिलीज हुई है, जिसका नाम 'द रिवोल्यूशनरीज'हैं. इसी मौके पर उन्होंने मीडिया को इंटरव्यू दिया और अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि कैसे मोबाइल की छोटी सी स्क्रीन से लेकर एक्टर बनने का सपना देखा. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
बिना सपोर्ट के तय की जर्नी
भुवन बाम ने कहा कि दिल्ली में अपने यूट्यूब के लिए वीडियो बनाने से लेकर प्राइम वीडियो के पीरियड ड्रामा 'द रेवोल्यूशनरीज' में काम करने तक का उनका सफर 'बगावत भरा' रहा है. ANI संग एक इंटरव्यू में भुवन ने दिल्ली में वाइन्स वीडियो बनाने से लेकर फिल्ममेकर निखिल आडवाणी के साथ काम करने के लंबे सफ़र को याद किया. उन्होंने इस बात पर जवाब दिया कि जो लोग सोचते हैं कि वह 'रातों-रात स्टार' बन गए है. भुवन का कहना है कि कामयाबी मिलने से पहले सालों की मेहनत और लोगों के सपोर्ट के बिना उन्होंने यह सफर तय किया है. भुवन ने कहा, 'यह एक बगावत भरा सफ़र रहा है... यह एक लंबा सफ़र रहा है. और इस सफ़र में बहुत से लोग मिलते हैं. और बहुत से लोग कहते हैं, 'ऐसा मत करो. यह तुम्हारे लिए नहीं है. तुम खो जाओगे. तुम भीड़ में खो जाओगे. वहां कोई तुम्हारी इज़्ज़त नहीं करेगा.'
शक के बावजूद आगे बढ़ना जारी रखा
इसके साथ ही उन्होंने याद किया कि कैसे उन्होंने अपने लोगों के शक के बावजूद आगे बढ़ना जारी रखा, भवुन का कहना है कि वह सिर्फ एक साल पहले ही मुंबई आए थे, उससे पहले अपना करियर दिल्ली में बनाया. उन्होंने कहा, 'जगह मायने नहीं रखती. आप कहां से कर रहे हैं, यह ज़रूरी नहीं है. आप क्या कर रहे हैं, यह ज़रूरी है.' उन्होंने अपने सफर को याद करते हुए, वह अपने यंगर सेल्फ़ को गलतियों से डरने के बजाय उन्हें अपनाने के लिए इंस्पायर करेंगे. उन्होंने कहा, 'अगर मुझे अपने यंगर सेल्फ़ से कुछ कहना हो, तो मैं यही कहूंगा कि गलतियां करते रहो. तुम गलतियां इसलिए करते हो क्योंकि तुम उनसे सीखते हो.' उन्होंने कहा कि नाकामयाबी भी ज़मीन से जुड़े रहने का एक अहम हिस्सा है नाकाम होना बहुत ज़रूरी है. नाकाम होने की वजह से ही आपके पैर हमेशा ज़मीन पर टिके रहते हैं. इसलिए, मुझे लगता है कि ये हमेशा होने चाहिए.
'हर दिन कुछ नया करने की कोशिस करता हूं'
उन्होंने अपने डर को लेकर कहा, 'मुझे सबसे ज़्यादा डर इस बात का है कि एक दिन मैं सुबह उठूं और मेरा काम करने का मन न करे. यही मेरा सबसे बड़ा डर है. इसलिए, मैं हर सुबह कुछ नया करने और अपनी कला को नए नज़रिए से देखने के लिए उठता हूं.' इसके साथ ही उन्होंने यह बात भी स्वीकार की कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कोई भी जगह पक्की नहीं होती. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हर किसी की जगह कोई और ले सकता है. आज कोई चीज़ है, तो कल नहीं होगी. मैं यह भी जानता हूँ कि अच्छा और बुरा समय हमेशा नहीं रहता.
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भारत की डिजिटल पेमेंट सिस्टम दुनिया की सबसे उन्नत प्रणालियों में से एक, ब्रिक्स में हमारी बड़ी भूमिका: पेटीएम सीईओ
नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। पेटीएम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विजय शेखर शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि भारत का डिजिटल भुगतान तंत्र आज दुनिया के सबसे उन्नत भुगतान प्रणालियों में से एक बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल भुगतान, वित्तीय सेवाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे ब्रिक्स देशों के लिए भी एक महत्वपूर्ण योगदान हैं।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के इतर न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए पीटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा ने कहा कि यह सम्मेलन ऐसे समय भारत में हो रहा है जब पूरी दुनिया देश को एक सक्षम, आत्मनिर्भर और मजबूत राष्ट्र के रूप में देख रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर दिखाई दे रहा है।
शर्मा ने कहा, चाहे हमारा भुगतान तंत्र हो, वित्तीय सेवाएं हों, एआई क्षमता हो या तकनीकी नवाचार, भारत ने जो बनाया है वह ब्रिक्स के लिए हमारी ओर से एक महत्वपूर्ण योगदान है।
उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का जो मिशन शुरू किया, उसमें देश के उद्यमियों और उद्योग जगत ने सक्रिय भागीदारी निभाई है।
उन्होंने कहा कि अनेक उद्यमियों ने इस पहल को अवसर के रूप में स्वीकार किया और नवाचार के माध्यम से भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दिया। इसी प्रयास का परिणाम है कि आज भारत का डिजिटल भुगतान ढांचा दुनिया के सबसे विकसित और व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले भुगतान तंत्रों में शामिल है।
इसी कार्यक्रम में एकीकृत वाणिज्य मंच हेसा के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वंसी उदयगिरि ने आईएएनएस से कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में एक नए वैश्विक नेतृत्व का उदय हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत, चीन और रूस जैसे बड़े देशों का एक साथ आना वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है और इससे सीमा-पार आर्थिक सहयोग के नए अवसर पैदा होंगे।
उदयगिरि ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया और डिजिटल परिवर्तन पर दिया जा रहा जोर भारत को वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) से आगे बढ़ाकर पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण विकास मॉडल के रूप में स्थापित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल परिवर्तन और आर्थिक विकास के क्षेत्र में भारत ने जिस प्रकार नेतृत्व दिखाया है, वह अन्य देशों के लिए भी प्रेरणादायक है। विशेष रूप से स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं।
उदयगिरि ने यह भी कहा कि ब्रिक्स देशों के लिए प्रस्तावित एमएसएमई सहयोग पोर्टल और इनवॉइस डिस्काउंटिंग तंत्र जैसी पहलें छोटे और मध्यम उद्यमों को नई गति दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलों के माध्यम से भारत ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार, निवेश और डिजिटल सहयोग को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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