उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे भारी बारिश और बाढ़ से खराब हुई सड़कों की तुरंत मरम्मत कराएं ताकि उन पर गाड़ियां चल सकें, और जहां जरूरी हो, वहां मॉनसून के मौसम के बाद सड़कों की पक्की मरम्मत की जाए। 11 सितंबर को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने लगातार हो रही बारिश का ज़िक्र किया और सड़कों की हालत पर लगातार नज़र रखने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने हाल ही में खराब हुई सड़कों का सर्वे करने का आदेश दिया ताकि उन हिस्सों की पहचान की जा सके जहां तुरंत मरम्मत की ज़रूरत है।
आने वाले त्योहारों के मौसम में बड़ी संख्या में यात्रियों के आने की उम्मीद है, इसलिए मुख्यमंत्री योगी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मुख्य रास्तों पर कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दिवाली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे त्योहारों से पहले मुख्य रास्तों की मरम्मत और नवीनीकरण के काम को प्राथमिकता दें। मुख्यमंत्री ने साफ़ किया कि गड्ढा-मुक्त सड़क अभियान सिर्फ़ अस्थायी मरम्मत (पैचवर्क) तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। बुरी तरह क्षतिग्रस्त सड़कों को तुरंत चलने लायक बनाया जाना चाहिए और बारिश के बाद उनका स्थायी नवीनीकरण किया जाना चाहिए।
अधिकारियों ने बताया कि सड़कों को नुकसान न केवल ज़्यादा बारिश के कारण हुआ है, बल्कि एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे जैसी निर्माण परियोजनाओं से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही के कारण भी हुआ है। क्षतिग्रस्त हिस्सों की पहचान करने के लिए अलग-अलग विभागों में सर्वे चल रहे हैं और गड्ढों की मरम्मत के लिए लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने राज्य भर में प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत के लिए 681 महत्वपूर्ण रास्तों की पहचान की है। इसमें उन सड़कों पर खास ध्यान दिया गया है जिन पर त्योहारों के दौरान ज़्यादा ट्रैफ़िक होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री योगी ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की कार्य योजनाओं के साथ-साथ मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, आवास और शहरी नियोजन, और बुनियादी ढांचा और औद्योगिक विकास विभागों के प्रस्तावों की भी समीक्षा की। लोक निर्माण विभाग 'गड्ढा-मुक्त अभियान' के तहत नौ विभागों के अंतर्गत लगभग 436,000 किलोमीटर सड़कों का प्रबंधन करता है। वर्तमान लक्ष्य लगभग 50,000 किलोमीटर सड़कों को गड्ढा-मुक्त बनाना है, जिसमें से लगभग 5,751 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। लक्ष्यों में 30,000 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण और 5,000 किलोमीटर सड़कों की विशेष मरम्मत शामिल है; अब तक की प्रगति में 14,000 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण और 700 किलोमीटर सड़कों की विशेष मरम्मत का काम पूरा हो चुका है।
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(एम जुल्करनैन)
लाहौर, 11 सितंबर उत्तराखंड स्थित श्री हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा के लिए वीजा हासिल करने वाले 90 से अधिक पाकिस्तानी सिखों को शुक्रवार को आव्रजन अधिकारियों ने उड़ान में सवार होने से रोक दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि महिलाओं और बच्चों समेत 92 पाकिस्तानी सिख एक उड़ान में सवार होने के लिए फैसलाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे थे।
यह हवाई अड्डा लाहौर से करीब 150 किलोमीटर दूर है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने सिख श्रद्धालुओं को खाड़ी देश होकर भारत जाने वाली उड़ान में सवार होने से रोक दिया, क्योंकि उनके पास वापसी का टिकट और संघीय सरकार से जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘आव्रजन अधिकारियों ने सिख श्रद्धालुओं से संघीय सरकार से जारी एनओसी और वापसी का टिकट पेश करने को कहा।
इसके बाद ही उन्हें अपने गंतव्य के लिए आगे जाने की अनुमति दी जाएगी।’’
फिलहाल पाकिस्तान और भारत के बीच हवाई, रेल या सड़क मार्ग से कोई सीधा संपर्क नहीं है। संघीय सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि संबंधित सिखों ने अपने स्तर पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के माध्यम से भारतीय वीजा की व्यवस्था की थी। अधिकारी ने कहा कि उन्हें यात्रा के लिए पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के साथ समन्वय करना चाहिए था और भारत में प्रवेश के लिए वाघा सीमा का रास्ता अपनाना चाहिए था।
अधिकारी ने कहा कि संभावना है कि श्रद्धालुओं को वाघा सीमा के रास्ते तीर्थयात्रा के लिए जाने की अनुमति दी जा सकती है। व्यापक रूप से ऑनलाइन साझा किए जा रहे एक वीडियो में फैसलाबाद हवाई अड्डे पर एक पाकिस्तानी सिख को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें भारत जाने से रोक दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम पिछले चार घंटे से फैसलाबाद हवाई अड्डे पर परेशान बैठे हैं...किसी को इस मामले का संज्ञान लेकर तीर्थयात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचने में मदद करनी चाहिए।’’ अन्य सिख परिवारों को भी हवाई अड्डे परिसर में इंतजार करते हुए देखा गया।
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