Pakistan के Faisalabad Airport पर 92 सिख तीर्थयात्रियों को भारत जाने वाली फ्लाइट से रोका
(एम जुल्करनैन) लाहौर, 11 सितंबर उत्तराखंड स्थित श्री हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा के लिए वीजा हासिल करने वाले 90 से अधिक पाकिस्तानी सिखों को शुक्रवार को आव्रजन अधिकारियों ने उड़ान में सवार होने से रोक दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि महिलाओं और बच्चों समेत 92 पाकिस्तानी सिख एक उड़ान में सवार होने के लिए फैसलाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे थे।
यह हवाई अड्डा लाहौर से करीब 150 किलोमीटर दूर है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने सिख श्रद्धालुओं को खाड़ी देश होकर भारत जाने वाली उड़ान में सवार होने से रोक दिया, क्योंकि उनके पास वापसी का टिकट और संघीय सरकार से जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘आव्रजन अधिकारियों ने सिख श्रद्धालुओं से संघीय सरकार से जारी एनओसी और वापसी का टिकट पेश करने को कहा।
इसके बाद ही उन्हें अपने गंतव्य के लिए आगे जाने की अनुमति दी जाएगी।’’ फिलहाल पाकिस्तान और भारत के बीच हवाई, रेल या सड़क मार्ग से कोई सीधा संपर्क नहीं है। संघीय सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि संबंधित सिखों ने अपने स्तर पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के माध्यम से भारतीय वीजा की व्यवस्था की थी। अधिकारी ने कहा कि उन्हें यात्रा के लिए पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के साथ समन्वय करना चाहिए था और भारत में प्रवेश के लिए वाघा सीमा का रास्ता अपनाना चाहिए था।
अधिकारी ने कहा कि संभावना है कि श्रद्धालुओं को वाघा सीमा के रास्ते तीर्थयात्रा के लिए जाने की अनुमति दी जा सकती है। व्यापक रूप से ऑनलाइन साझा किए जा रहे एक वीडियो में फैसलाबाद हवाई अड्डे पर एक पाकिस्तानी सिख को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें भारत जाने से रोक दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम पिछले चार घंटे से फैसलाबाद हवाई अड्डे पर परेशान बैठे हैं...किसी को इस मामले का संज्ञान लेकर तीर्थयात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचने में मदद करनी चाहिए।’’ अन्य सिख परिवारों को भी हवाई अड्डे परिसर में इंतजार करते हुए देखा गया।
दिल्ली- 26 साल के युवक के पेट में मिला गर्भाशय:डॉक्टर के पास बांझपन के इलाज के लिए पहुंचा था; दुनिया में ऐसे 300 मामले
दिल्ली के 26 साल के युवक की बांझपन की जांच में पेट के अंदर गर्भाशय (यूटेरस) और फैलोपियन ट्यूब जैसी संरचनाएं मिलीं। दोनों अंडकोष भी पेट के अंदर थे। युवक राजौरी गार्डन स्थित आरजी हॉस्पिटल्स में प्राथमिक बांझपन का इलाज कराने पहुंचा था। जांच में उसके वीर्य में शुक्राणु नहीं मिले, जिसे एजूस्पर्मिया कहते हैं। एमआरआई में पेल्विस के अंदर गर्भाशय जैसी संरचना दिखी। यह मामला न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के बाद सामने आया। डॉक्टरों के मुताबिक, यह पर्सिस्टेंट म्यूलरियन डक्ट सिंड्रोम (PMDS) जैसी दुर्लभ जन्मजात स्थिति हो सकती है। युवक की दोनों टेस्टिस यानी अंडकोष नीचे नहीं उतरे थे। वे लंबे समय से पेट के अंदर थे और गंभीर रूप से सिकुड़ चुके थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरी दुनिया में इसके सिर्फ 300 मामले हैं। इस मामले में इन्फर्टिलिटी की वजह इस युवक के टेस्टिस पेट के अंदर रह गए थे और गंभीर रूप से सिकुड़ चुके थे। पेट के अंदर रहने पर शरीर का ज्यादा तापमान समय के साथ स्पर्म बनने की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है। इस मरीज के टेस्टिस पहले ही गंभीर रूप से खराब हो चुके थे। इससे एजूस्पर्मिया की स्थिति बनी। कुछ लोगों में बचे हुए टेस्टिस के काम के आधार पर असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीकों से विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, फर्टिलिटी के नतीजे हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। यह टेस्टिस की जगह और उनकी कार्यक्षमता पर निर्भर करता है। दूसरी प्रजनन संबंधी असामान्यताएं भी असर डाल सकती हैं। खबर अपडेट हो रही है…
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