हैदराबाद में सेना के चोरी हुए हथियार जब्त:कैंटोनमेंट का एक कर्मचारी अरेस्ट, 2 रूम के ताले तोड़ चुराए थे हाईटेक वेपंस
तेलंगाना पुलिस ने सिकंदराबाद कैंटोनमेंट से चोरी हुए सेना के सभी हथियार जब्त कर लिए हैं। पुलिस के मुताबिक, कैंटोनमेंट में काम करने वाले एक शख्स की मदद से की यह चोरी की गई थी। आरोपी को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, जांच में सामने आई अन्य जानकारियां अभी शेयर नहीं की गई हैं। चोरी का मामला 31 अगस्त को तब सामने आया था, जब मद्रास रेजिमेंट के एक लेफ्टिनेंट कर्नल ने हैदराबाद के मलकाजगिरि पुलिस जोन के बोलाराम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, लगभग 40 मीटर की दूरी पर स्थित दो शस्त्रागार रूम के ताले तोड़कर बड़ी संख्या में हाईटेक वेपंस चोरी कर लिए गए थे। कई महीनों से मेंटेन नहीं किए जा रहे थे रजिस्टर जांच के दौरान 20 मद्रास रेजिमेंट की एक यूनिट के सीनियर ऑफिसर से भी पूछताछ की गई थी। इसकी एक वजह यह थी कि आर्मरी के रजिस्टर कई महीनों से मेंटेन नहीं किए जा रहे थे। वहीं, सिक्युरिटी गार्ड ने किसी तरह की जबरन घुसपैठ से इनकार किया था। इसीलिए जांच टीम को शुरुआत से ही शक था कि यह मामला ‘इनसाइड जॉब’ है। यानी कि वारदात में कैंटोनमेंट के अंदर का कोई कर्मचारी शामिल था। जांच में स्थानीय पुलिस, सैन्य खुफिया और केंद्रीय एजेंसियों को शामिल किया गया। शुरू में 10 कर्मियों से पूछताछ की गई, जिसके बाद मुख्य संदिग्धों पर ध्यान केंद्रित किया गया।एक कर्मचारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और इस तरह चोरी का खुलासा हो गया। आरोपी की शिनाख्त पर हैदराबाद की एक जगह से ये सभी हथियार जब्त कर लिए गए। जांच टीम अब हथियारों को ले जाने, उन्हें छिपाने, हथियारों के खरीददार समेत इस पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों की तलाश में जुटी है। सेना के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस मामले में जल्द ही अधिकारी मीडिया को विस्तृत रिपोर्ट देंगे। ------------------ ये खबर भी पढ़ें… चार अवैध हथियार और 26 कारतूस बरामद, आरोपी गिरफ्तार:चोरी के मोबाइल की खरीद-फरोख्त पर पुलिस की कार्रवाई राजस्थान के डीग जिले में अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाई करते हुए एक युवक से चार अवैध हथियार और 26 जिंदा कारतूस बरामद किए। पूरी खबर पढ़ें…
कनाडा में बिना स्टडी वीजा के पढ़ सकेंगे पंजाबी:नौकरी छोड़ने की जरूरत नहीं, पढ़ाई-कमाई के साथ PR में भी मिलेगा फायदा
कनाडा में वर्क परमिट पर काम कर रहे विदेशी युवक-युवतियां अब 6 महीने तक बिना स्टडी परमिट के पढ़ाई कर सकेंगे। इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) ने 9 सितंबर 2026 को इस नई अस्थायी पॉलिसी की घोषणा की है। इसका मकसद कनाडा में पहले से मौजूद टेंपरेरी वर्कर्स को जरूरी स्किल, लाइसेंसिंग और ट्रेनिंग हासिल करने का मौका देना है, ताकि वे लेबर की जरूरत वाले क्षेत्रों में ज्यादा योगदान दे सकें। इस फैसले से कनाडा में वर्क परमिट पर काम कर रहे करीब 3 लाख भारतीयों को फायदा हो सकता है। इनमें करीब डेढ़ लाख पंजाबी हैं। वहीं इसके जरिए कनाडा में परमानेंट सिटीजनशिप यानी PR में भी मदद मिलेगी। कनाडा की नई पॉलिसी क्या है? जवाब: नई पॉलिसी के तहत पात्र वर्क परमिट होल्डर्स 6 महीने तक या उनके वर्क परमिट की वैधता खत्म होने तक जो भी पहले हो, वह बिना स्टडी परमिट पढ़ाई कर सकेंगे। इसका फायदा 6 महीने या उससे कम अवधि वाले शॉर्ट-टर्म लाइसेंसिंग, एजुकेशन और ट्रेनिंग प्रोग्राम में लिया जा सकेगा। IRCC के मुताबिक, इससे ऐसी पढ़ाई के लिए अलग स्टडी परमिट लेने की अतिरिक्त प्रक्रिया से राहत मिलेगी। युवा नौकरी के साथ पढ़ाई कर सकेंगे, जिससे आय जारी रहेगी और परिवार पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ेगा। क्या इसमें हर तरह की पढ़ाई के लिए छूट है? जवाब: नहीं, यह सुविधा फुल-टाइम स्टडी के लिए नहीं है। उसके लिए स्टडी परमिट की जरूरत बनी रहेगी। यानी नई पॉलिसी का फायदा मुख्य रूप से छोटी अवधि के उन कोर्स, ट्रेनिंग और लाइसेंसिंग प्रोग्राम में मिलेगा जो 6 महीने या उससे कम अवधि के हैं। इस पॉलिसी से किन नौकरी वालों को ज्यादा फायदा होगा? जवाब: IRCC ने नई पॉलिसी में खास तौर पर ट्रेड्सपर्सन, नर्स और लैबोरेटरी टेक्नीशियन का उल्लेख किया है। इन क्षेत्रों में काम करने वाले योग्य वर्क परमिट होल्डर्स नौकरी जारी रखते हुए अपनी स्किल अपग्रेड कर सकेंगे। इससे हेल्थकेयर, होम बिल्डिंग और दूसरे जरूरी क्षेत्रों में कुशल वर्कफोर्स तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। पहले ऐसे स्टडी परमिट के लिए अलग आवेदन, बैंक स्टेटमेंट, ऑफर लेटर और मेडिकल रिपोर्ट जमा करने पड़ते थे। प्रोसेसिंग में हफ्तों से महीनों का इंतजार लगता था। बीच में नौकरी प्रभावित होने का डर रहता था। अब ये सारी औपचारिकताएं खत्म हो गई हैं। क्या इसके लिए नौकरी छोड़नी पड़ेगी? जवाब: नहीं, इस नई व्यवस्था का बड़ा फायदा यह है कि कामगारों को छोटी अवधि की ट्रेनिंग या लाइसेंसिंग के लिए अपनी मौजूदा नौकरी छोड़ने की जरूरत नहीं होगी। IRCC का कहना है कि यह सुविधा टेंपरेरी वर्कर्स को काम करते हुए इन-डिमांड स्किल हासिल करने में मदद करेगी। इससे वे सार्वजनिक सेवाओं, घरों के निर्माण और दूसरे जरूरी प्रोजेक्ट्स में ज्यादा प्रभावी ढंग से योगदान दे सकेंगे। पहले के मुकाबले ये कितना आसान है? जवाब: पहले छोटी अवधि की पढ़ाई के लिए पात्रता के हिसाब से स्टडी परमिट की जरूरत पड़ सकती थी। नई पॉलिसी का उद्देश्य इस अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रिया को हटाना है। अब योग्य वर्क परमिट होल्डर्स को 6 महीने या उससे कम अवधि की पात्र पढ़ाई के लिए अलग स्टडी परमिट आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। इससे आवेदन और प्रोसेसिंग की अतिरिक्त प्रक्रिया से समय बच सकता है। PR के लिए कैसे मदद मिल सकती है? जवाब: नई पॉलिसी सीधे PR नहीं देती। हालांकि, कनाडा में पहले से मौजूद वर्कर्स को अपनी स्किल और योग्यता बढ़ाने का मौका मिलने से वे भविष्य में कनाडा के आर्थिक इमिग्रेशन और PR के लिए अपनी प्रोफाइल मजबूत कर सकते हैं। कनाडा सरकार की इमिग्रेशन नीति भी पहले से देश में मौजूद ऐसे लोगों को PR की ओर आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रही है, जिनके पास जरूरी स्किल और अनुभव है। क्या इसके कोई अंक PR में जुड़ेंगे? जवाब: 2026-2028 के इमिग्रेशन प्लान में सरकार ने 2026 और 2027 के दौरान 33,000 तक टेंपरेरी वर्कर्स को PR में ट्रांजिशन कराने की योजना भी बताई है। हालांकि, सिर्फ इस पॉलिसी के तहत कोई कोर्स करने से PR या एक्सप्रेस एंट्री के अतिरिक्त अंक अपने-आप नहीं मिलेंगे। PR के लिए संबंधित इमिग्रेशन प्रोग्राम की अलग पात्रता पूरी करनी होगी। क्या इससे PGWP का फायदा नहीं मिलेगा? जवाब: इस सुविधा के तहत बिना स्टडी परमिट किए गए कोर्स के आधार पर पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) का अधिकार नहीं मिलेगा। इसलिए इसे इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए PGWP हासिल करने का नया रास्ता नहीं माना जा सकता। इस पॉलिसी का फायदा कब से उठा सकते हैं? जवाब: IRCC ने कहा है कि वह इस हफ्ते से पात्र वर्क परमिट होल्डर्स को सूचित करना शुरू करेगा कि वे नई व्यवस्था के तहत पढ़ाई कर सकते हैं। यह अस्थायी पॉलिसी 31 दिसंबर 2027 तक लागू रहेगी। क्या इस पॉलिसी के आधार पर कनाडा जा सकते हैं? जवाब: IRCC ने साफ किया है कि यह पॉलिसी वर्कर्स को कनाडा आने के लिए कोई नया इमिग्रेशन या वर्क परमिट रास्ता नहीं देती। यह सुविधा उन टेंपरेरी वर्कर्स के लिए है जो पहले से कनाडा में हैं और वैध वर्क परमिट रखते हैं। सरकार का उद्देश्य मौजूदा वर्कफोर्स की क्षमता बढ़ाकर लेबर मार्केट की जरूरतों को पूरा करना है।
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