पहले गले मिले, फिर मिलाया हाथ और भेंट किया संत तिरुवल्लुर की बुक का रूसी संस्करण, पीएम मोदी-पुतिन की मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट के दौरान द्विपक्षीय बातचीत की। इस बातचीत में रक्षा, ऊर्जा और व्यापार मुख्य मुद्दे रहे। फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से, यह पुतिन की रूस के बाहर किसी ब्रिक्स समिट में पहली बार आमने-सामने की भागीदारी थी। दोपहर 3:30 बजे शुरू हुई इस बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ व्यापार, निवेश और लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
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ईरान संघर्ष से पैदा हुए संकट के बीच भारत स्थिर ईंधन आपूर्ति चाहता है, इसलिए ऊर्जा सहयोग का महत्व और बढ़ गया है। रूस, नई दिल्ली के प्रमुख रणनीतिक साझेदारों और ऊर्जा के महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ताओं में से एक बना हुआ है।
मोदी और पुतिन के बीच किन मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना थी
सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच 2030 तक आपसी व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के बड़े लक्ष्य पर चर्चा होने की उम्मीद थी। औद्योगिक सहयोग भी चर्चा का अहम हिस्सा रहने की संभावना थी, जिसमें भारत में INNOPROM (इनोप्रोम) के आयोजन, रेलवे और टनलिंग में सहयोग, स्टील वैल्यू चेन को विकसित करने और ज़्यादा बिज़नेस-टू-बिज़नेस (B2B) अवसर पैदा करने पर बातचीत होनी थी। भारत रूसी बाज़ार में अपनी पहुँच बढ़ाने की भी कोशिश कर रहा है। चर्चा के अन्य संभावित क्षेत्रों में अहम खनिजों (critical minerals) में सहयोग और ज़्यादा कुशल भारतीय कामगारों के रूस जाने की सुविधा शामिल थी। दोनों पक्षों के बीच मज़बूत सिविल न्यूक्लियर सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा होने की उम्मीद थी, जिसमें न्यूक्लियर फ़्यूल और प्लांट लाइफ़ साइकल से जुड़े सहयोग शामिल थे।
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यूक्रेन युद्ध पर फोकस
यह बैठक बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के दौरान मोदी और पुतिन की संक्षिप्त मुलाकात के कुछ दिनों बाद हुई। उस बातचीत के दौरान, मोदी ने यूक्रेन संघर्ष को तुरंत खत्म करने की अपील की और पुतिन से "कभी न खत्म होने वाले युद्ध" से हटकर "युद्ध को खत्म करने" की दिशा में बढ़ने का आग्रह किया। पुतिन ने पिछली बार दिसंबर 2025 में भारत का दौरा किया था, जब मोदी ने दोहराया था कि भारत इस संघर्ष में तटस्थ नहीं है, बल्कि शांति के पक्ष में खड़ा है। उन्होंने पुतिन को एक दूरदर्शी नेता भी बताया और इस बात पर ज़ोर दिया कि मौजूदा दौर शांति का होना चाहिए। दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंध भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी का एक अहम आधार रहे हैं। वे पिछले 11 वर्षों में 19 बार मिल चुके हैं। यह ताज़ा बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब यूक्रेन युद्ध अपने पांचवें साल में प्रवेश कर रहा है। पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जबकि शांति समझौते के लिए कूटनीतिक प्रयासों में बहुत कम प्रगति हुई है।
South Korea के पूर्व राष्ट्रपति Yoon Suk Yeol मरीन सैनिक मौत मामले में बरी
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को एक मरीन सैनिक की डूबने से हुई मौत से जुड़े मामले में शुक्रवार को बरी कर दिया गया। यह मार्शल लॉ लागू करने के कारण पद से हटाए जाने के बाद यून के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों में बड़ी राहत है। विशेष जांच पक्ष द्वारा दायर अभियोग में आरोप लगाया गया था कि यून ने जानबूझकर पूर्व रक्षा मंत्री ली जोंग-सुप को ऑस्ट्रेलिया में राजदूत नियुक्त किया, ताकि उन्हें देश छोड़ने और 2023 में बाढ़ पीड़ितों की तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान डूबे कॉर्पोरल चे सु-गुन की मौत की आपराधिक जांच से बचने में मदद मिल सके।
हालांकि, सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि यून द्वारा ली की नियुक्ति का उद्देश्य जांच में बाधा डालना था या नहीं। यून ने कहा कि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के साथ सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने के लिए ली को राजदूत नियुक्त किया था। उनके वकीलों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए अभियोजकों से इसके खिलाफ अपील नहीं करने का आग्रह किया।
पूर्व न्याय मंत्री और राष्ट्रपति सुरक्षा निदेशक समेत अन्य आरोपियों को भी उन आरोपों से बरी कर दिया गया, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने जांच से बचने में ली की मदद करने के लिए यून के साथ मिलकर साजिश रची थी। अभियोजक फैसले के खिलाफ अपील करेंगे या नहीं, इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी। एक अलग अभियोग में आरोप लगाया गया है कि यून और अन्य अधिकारियों ने चे की मौत की जांच को दबाने और उसमें हेरफेर करने की कोशिश की।
यह मामला तब सार्वजनिक आक्रोश का कारण बना, जब यह सामने आया कि सैन्य कमांडरों ने सैनिकों को लाइफ जैकेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के बिना तलाश अभियान चलाने का आदेश दिया था। यून को अप्रैल 2025 में औपचारिक रूप से पद से हटा दिया गया था। इसके बाद राष्ट्रपति ली जे-म्युंग द्वारा मार्शल लॉ लागू करने और चे की मौत समेत कई अन्य मामलों की विशेष जांच को मंजूरी दिए जाने के बाद यून को कई आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ा है।
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