दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को एक मरीन सैनिक की डूबने से हुई मौत से जुड़े मामले में शुक्रवार को बरी कर दिया गया। यह मार्शल लॉ लागू करने के कारण पद से हटाए जाने के बाद यून के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों में बड़ी राहत है। विशेष जांच पक्ष द्वारा दायर अभियोग में आरोप लगाया गया था कि यून ने जानबूझकर पूर्व रक्षा मंत्री ली जोंग-सुप को ऑस्ट्रेलिया में राजदूत नियुक्त किया, ताकि उन्हें देश छोड़ने और 2023 में बाढ़ पीड़ितों की तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान डूबे कॉर्पोरल चे सु-गुन की मौत की आपराधिक जांच से बचने में मदद मिल सके।
हालांकि, सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि यून द्वारा ली की नियुक्ति का उद्देश्य जांच में बाधा डालना था या नहीं। यून ने कहा कि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के साथ सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने के लिए ली को राजदूत नियुक्त किया था। उनके वकीलों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए अभियोजकों से इसके खिलाफ अपील नहीं करने का आग्रह किया।
पूर्व न्याय मंत्री और राष्ट्रपति सुरक्षा निदेशक समेत अन्य आरोपियों को भी उन आरोपों से बरी कर दिया गया, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने जांच से बचने में ली की मदद करने के लिए यून के साथ मिलकर साजिश रची थी। अभियोजक फैसले के खिलाफ अपील करेंगे या नहीं, इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी। एक अलग अभियोग में आरोप लगाया गया है कि यून और अन्य अधिकारियों ने चे की मौत की जांच को दबाने और उसमें हेरफेर करने की कोशिश की।
यह मामला तब सार्वजनिक आक्रोश का कारण बना, जब यह सामने आया कि सैन्य कमांडरों ने सैनिकों को लाइफ जैकेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के बिना तलाश अभियान चलाने का आदेश दिया था। यून को अप्रैल 2025 में औपचारिक रूप से पद से हटा दिया गया था। इसके बाद राष्ट्रपति ली जे-म्युंग द्वारा मार्शल लॉ लागू करने और चे की मौत समेत कई अन्य मामलों की विशेष जांच को मंजूरी दिए जाने के बाद यून को कई आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ा है।
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18वें ब्रिक्स समिट की मेज़बानी करने के लिए भारत का समर्थन करते हुए, चीन ने शुक्रवार को कहा कि वह संगठन के सदस्यों के बीच सहयोग को महत्व देता है। साथ ही, उसने इस बात पर ज़ोर दिया कि नई दिल्ली और बीजिंग को अपने मतभेदों को सही ढंग से सुलझाना चाहिए और उनके संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नज़रिए से देखा जाना चाहिए। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दिल्ली आने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि ब्रिक्स (BRICS) के सदस्यों ने "खुलेपन, सबको साथ लेकर चलने और आपसी फायदे वाले सहयोग की भावना" को बनाए रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने सदस्यों के बीच सहयोग के लिए "सक्रिय रूप से" पहल की है। इसके अलावा, माओ ने कहा कि ब्रिक्स उभरते बाजारों और विकासशील देशों के लिए एकजुटता और सहयोग बनाए रखने का एक मंच है।
माओ ने कहा चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक निर्देशों पर अमल करने, रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से द्विपक्षीय संबंधों को संभालने, बातचीत बढ़ाने और मतभेदों को ठीक से सुलझाने के लिए सहयोग बढ़ाने के लिए भारत के साथ काम करेगा। साथ ही, हम अच्छे पड़ोसी और एक-दूसरे की मदद करने वाले साझेदार बनकर रहेंगे। उन्होंने कहा ब्रिक्स बहुपक्षवाद, निष्पक्षता और न्याय को बनाए रखने और साझा विकास की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। यह 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों के समूह) में सबसे आगे रहने वाली एक वास्तविक ताकत के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा यह 'ग्लोबल साउथ' में सबसे आगे रहने वाली एक बड़ी ताकत बन गया है।"
शी की भारत यात्रा और ब्रिक्स समिट
शी 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स समिट के लिए शनिवार को नई दिल्ली पहुंचेंगे। लगभग सात साल में यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। अपनी यात्रा के दौरान, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे। रूस के कज़ान और चीन के तियानजिन में हुई मुलाकातों के बाद, पीएम मोदी के साथ शी की यह तीसरी बैठक होगी। दोनों नेताओं के बीच होने वाली इस बैठक से नई दिल्ली और बीजिंग को अपने संबंधों को सामान्य करने में मदद मिलेगी, जो पूर्वी लद्दाख में 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद खराब हो गए थे। 18वें ब्रिक्स समिट की बात करें तो, भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में इसकी मेजबानी करेगा। भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में तीन बार इसकी अध्यक्षता कर चुका है।
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