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घर के पास पीपल का पेड़ होना क्यों माना जाता है शुभ? जानें धार्मिक मान्यता और पूजा के नियम

Peepal tree religious significance: हिंदू धर्म में कई पेड़-पौधों को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया गया है। इनमें पीपल का पेड़ भी प्रमुख माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल को देवताओं का वास स्थल माना जाता है और इसकी पूजा करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। कई स्थानों पर लोग सुबह पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाकर पूजा करते हैं।

पीपल के पेड़ से जुड़ी क्या है धार्मिक मान्यता?
धार्मिक मान्यताओं में पीपल के पेड़ को भगवान विष्णु से भी जोड़ा जाता है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने वृक्षों में स्वयं को पीपल बताया है। इसी वजह से सनातन परंपरा में पीपल को श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है।

शनिवार को पीपल की पूजा क्यों की जाती है?
पीपल के पेड़ की पूजा विशेष रूप से शनिवार के दिन करने की परंपरा कई जगहों पर प्रचलित है। मान्यता है कि पीपल का संबंध शनिदेव से भी है। शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर शनिदेव का स्मरण करने से शनि से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलने की मान्यता है।

पीपल की परिक्रमा करने का क्या महत्व है?
कई धार्मिक परंपराओं में पीपल के पेड़ की परिक्रमा करने का विधान बताया गया है। भक्त पीपल की पूजा करने के बाद उसकी परिक्रमा करते हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में परिक्रमा की संख्या और विधि अलग हो सकती है।

पीपल पर जल चढ़ाने की भी है परंपरा
कई श्रद्धालु पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करते हैं। इसके बाद दीपक जलाकर पूजा और प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यता में इसे भगवान के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम माना जाता है।

हालांकि, पेड़ की देखभाल को ध्यान में रखते हुए जल देने की मात्रा और स्थानीय परिस्थितियों का भी ध्यान रखना चाहिए।

पीपल के पेड़ को काटने से क्यों बचते हैं?
धार्मिक आस्था के कारण पीपल के पेड़ को काटने से लोग बचते हैं। इसे पवित्र वृक्ष मानकर इसकी रक्षा करने की परंपरा रही है। यही वजह है कि पुराने मंदिरों, धार्मिक स्थलों और गांवों में पीपल के पेड़ के आसपास पूजा स्थल भी देखने को मिलते हैं।

पीपल सिर्फ धार्मिक आस्था का हिस्सा नहीं
पीपल भारतीय संस्कृति में धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति से जुड़ी परंपराओं का भी प्रतीक रहा है। इसके आसपास बने चबूतरे पर लोग बैठते हैं और कई जगहों पर सामुदायिक गतिविधियां भी होती रही हैं। इस तरह पीपल का पेड़ धार्मिक और सामाजिक जीवन, दोनों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

पीपल की पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
पीपल की पूजा करते समय स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। पेड़ को नुकसान पहुंचाने वाली कोई सामग्री नहीं बांधनी चाहिए और पूजा के बाद आसपास गंदगी नहीं छोड़नी चाहिए। धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए प्रकृति और पेड़ की सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी जरूरी है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों, संप्रदायों और परिवारों में पूजा की विधि अलग हो सकती है। इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।

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Preity Zinta का बड़ा बयान: आज Paparazzi और Social Media के दबाव में काम कर रहे कलाकार

 अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने कहा कि आज के कलाकारों पर पहले की तुलना में अधिक दबाव है। बढ़ती पैपराजी संस्कृति और सोशल मीडिया की दखलअंदाजी के कारण उन्हें लगातार कड़ी सार्वजनिक निगरानी का सामना करना पड़ता है, जिससे पहले के कलाकारों को नहीं जूझना पड़ता था।

अभिनेत्री जिंटा वर्ष 2016 में शादी के बाद अमेरिका जाकर बस गईं थीं। वह अपनी आगामी जासूसी हास्य फिल्म “वाइब” के प्रचार के लिए मुंबई लौटीं जिसमें वह कुणाल खेमू के साथ दिखाई देंगी। फिल्म “वाइब” में जिंटा जासूस मैडम एच की अनोखी भूमिका में नजर आएंगी। सनी देओल के साथ उनकी विभाजन पर आधारित फिल्म “बंटवारा 1947” की रिलीज के कुछ ही सप्ताह बाद यह सिनेमाघरों में आएगी। फिल्म में वह दो अनाड़ी दोस्तों को एक बेहद महत्वपूर्ण गुप्त मिशन के लिए भर्ती कर उन्हें प्रशिक्षण देने वाली जासूस की भूमिका निभा रही हैं।

जब उनसे पूछा गया कि फिल्मों में वापसी के बाद सबसे बड़ा सांस्कृतिक बदलाव उन्हें क्या लगा, तो उन्होंने कहा कि अब अभिनय में फिल्म के सेट से बाहर की चीजों से भी निपटना शामिल है। जिंटा ने पीटीआई-को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “मेरे लिए सबसे बड़ा सांस्कृतिक बदलाव फिल्मों से जुड़ा नहीं है, बल्कि फिल्मों के आसपास की चीजों से जुड़ा है। जैसे, पैपराजी और सोशल मीडिया की दखलअंदाजी।

पहले हमें सिर्फ सेट पर जाकर अभिनय करना होता था और काम खत्म करना होता था। अब, यहां आप कैसे कपड़े पहनते हैं, यह महत्वपूर्ण है, एयरपोर्ट पर आपका पहनावा कैसा है, यह भी महत्वपूर्ण है। अगर आप दुखी हैं, तो आपको भी फैशनेबल तरीके से दुखी दिखना है और अगर आप खुश हैं, तो आपको फैशनेबल तरीके से खुश दिखना है।”

कुणाल खेमू और चिराग निहलानी ने अपने निर्माण बैनर ड्रोंगो फिल्म्स के तहत, अमेजन एमजीएम स्टूडियोज के सहयोग से इस फिल्म का निर्माण किया है। “वाइब” 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में कुणाल खेमू के साथ स्पर्श श्रीवास्तव और वंशिका धीर भी अभिनय कर रहे हैं।

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7 दशक, 779 मेडल...1951 के पहले एशियाई खेल से 100 पदकों की तड़प तक, ऐसे बदला भारतीय खेलों का इतिहास

India At Asian Games: मार्च 1951 में नई दिल्ली के नेशनल स्टेडियम से 'एवर ऑनवर्ड' के संकल्प के साथ शुरू हुआ भारत का एशियन गेम्स का सफर दशकों तक संघर्षों और सीमित पदकों से भरा रहा. मिल्खा सिंह और पीटी उषा की स्वर्णिम चमकों के बावजूद देश 100 पदकों का आंकड़ा हासिल करने को तरसता रहा. हालांकि, ग्वांग्झू 2022 में भारतीय एथलीटों ने 28 गोल्ड सहित रिकॉर्ड 107 पदक जीतकर इतिहास रचा. अब 'इस बार 100 पार' के इस आत्मविश्वास के साथ भारतीय दल की नजरें जापान के आइची-नागोया खेलों पर टिकी हैं. Sat, 12 Sep 2026 18:27:28 +0530

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