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FTII से 'नीम करौली बाबा' बनने तक, प्रेरणादायक है एक्टर शोभिनव सत्या की कहानी

बता दें कि अपने दमदार एक्टिंग और कहानी की वजह से फिल्म ने 100 करोड़ का आंकड़ा भी पार कर लिया है। एक्टर शोभनव की बात करें, तो यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। चलिए जानते हैं कि क्या है एक्टर शोभिनव सत्या की सक्सेस स्टोरी और इन्होंने कहां से पढ़ाई-लिखाई की है।

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UP Election 2027: संभल की 5 सीटों पर सपा का दबदबा या BJP का खेल?

Sambhal Election 2027: 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर करवट लेती दिख रही है. प्रदेश में एक जिला है संभल. बता दें पिछले कुछ सालों में संभल जिला उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चित नामों में शुमार हो गया है. यहां शाही जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा ने इस जिले को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया और विधानसभा चुनाव से पहले फिर इस जिले की चर्चा हो रही है. आइए आपको बताते हैं संभल जिले की पांचों सीटों का हाल.

जिले में मुस्लिम आबादी करीब 70 प्रतिशत

संभल जिला मुरादाबाद से अलग होकर 2011 में अस्तित्व में आया था. इसका शुरुआती नाम भीम नगर था. बाद में जनता के विरोध के चलते इसका नाम संभल कर दिया गया. जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार यहां की कुल आबादी करीब 21 लाख 93 हजार है, जिसमें पुरुषों की संख्या करीब 11 लाख 61 हजार और महिलाओं की संख्या करीब 10 लाख 32 हजार है. यहां साक्षरता दर करीब 77 प्रतिशत आंकी गई है, जबकि लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर करीब 908 महिलाओं का है. यहां मुस्लिम आबादी करीब 60 से 70 प्रतिशत के बीच है, जिसकी वजह से यह प्रदेश के सबसे ज्यादा मुस्लिम बहुल जिलों में गिना जाता है. 

संभल जिले जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से एक आरक्षित

संभल जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं संभल, चंदौसी, बिलारी, असमोली और गुन्नौर. बता दें इनमें से चंदौसी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है जबकि बाकी चारों सीटें सामान्य श्रेणी में आती हैं.

सपा का दिखा था एकतरफा दबदबा

चुनाव आयोग के डेटा के मुताबिक 2022 के विधानसभा चुनाव में संभल जिले की पांच सीटों में से चार पर सपा ने कब्जा जमाया था जबकि सिर्फ एक सीट भाजपा के खाते में गई थी. आइए आपको यहां की पांचों सीटों के बारे में ब्रीफ में बताते हैं.

संभल सीट की बात करें तो यहां से सपा के इकबाल महमूद ने भाजपा के राजेश सिंघल को करीब 42 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया था. 

असमोली सीट पर सपा की पिंकी सिंह यादव ने भाजपा के हरेंद्र कुमार को करीब 25 हजार वोटों से पराजित किया था.

बिलारी सीट पर सपा के मोहम्मद फहीम इरफान ने भाजपा के परमेश्वर लाल सैनी को करीब साढ़े सात हजार वोटों के अंतर से हराया था.

गुन्नौर सीट पर सपा के राम खिलाड़ी सिंह यादव ने जीत दर्ज की थी.

चंदौसी (सुरक्षित) विधानसभा सीट पर भाजपा को जीत मिली थी. यहां से भाजपा की गुलाब देवी विधायक चुनी गईं थीं.

संभल जिले में कभी था सपा का गढ़, 2017 में भाजपा ने लगाई थी सेंध

संभल जिले की राजनीति लंबे समय से समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव परिवार के प्रभाव में रही है. खासकर गुन्नौर सीट को लेकर तो यह कहा जाता रहा है कि यहां मुलायम परिवार के इशारे भर से उम्मीदवार जीत जाया करते थे. मगर 2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के दौरान भाजपा के अजीत कुमार यादव उर्फ राजू यादव ने यह परंपरागत सीट सपा से छीनकर बड़ा उलटफेर किया था.

संभल सदर सीट पर भी सपा का इतिहास मजबूत 

संभल सदर सीट पर भी सपा का इतिहास मजबूत रहा है. यहां से इकबाल महमूद कई बार विधायक रह चुके हैं. कुल मिलाकर देखा जाए तो 2017 की मोदी लहर में भी संभल जिला पूरी तरह भाजपामय नहीं हो सका था. जबकि प्रदेश के बाकी हिस्सों में पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला था. यह इस बात का संकेत है कि जिले का मुस्लिम बहुल सामाजिक ताना-बाना यहां की राजनीति को बाकी यूपी से अलग दिशा देता रहा है.

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में क्या बन रहे हैं समीकरण?

संभल जिले की सियासत में सबसे बड़ा मोड़ नवंबर 2024 में आया जब शाही जामा मस्जिद के अदालती सर्वे के दौरान भीषण हिंसा भड़क उठी थी. इन दंगों में पांच लोगों की जान चली गई थी. इस घटना की जांच के लिए बनाए गए न्यायिक आयोग ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट सौंपी है जिसमें इस हिंसा को पूर्व नियोजित साजिश करार दिया गया है और स्थानीय सांसद व कुछ स्थानीय नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं.

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ओवैसी की पार्टी से 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं जामा मस्जिद प्रबंध कमेटी के सदस्य 

इस पूरे घटनाक्रम ने 2027 के चुनाव से पहले जिले की सियासी बिसात को नए सिरे से बदल दिया है. हाल ही में संभल हिंसा के मुख्य आरोपियों में शुमार और जामा मस्जिद प्रबंध कमेटी से जुड़े एक स्थानीय नेता ने असदुद्दीन ओवैसी की मौजूदगी में एआईएमआईएम का दामन थाम लिया और संकेत दिए कि वे 2027 का विधानसभा चुनाव भी लड़ सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो इससे मुस्लिम वोटों के बंटवारे की आशंका बढ़ सकती है जो अब तक सपा के पक्ष में एकतरफा जाते रहे हैं. इससे जिले की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली संभल सदर सीट पर भी मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना जताई जा रही है.

2027 का चुनाव संभल जिले के लिए संवेदनशील और बेहद अहम

दूसरी ओर भाजपा भी हिंदू मतदाताओं को गोलबंद करने और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की सियासत को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही मानी जा रही है ताकि जिले में अपनी मौजूदगी बढ़ाई जा सके. ऐसे में 2027 का चुनाव संभल जिले के लिए पहले से कहीं ज्यादा संवेदनशील और अहम माना जा रहा है.

संभल ​जिले की किस सीट पर किसका असर

- संभल सीट पर मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा और निर्णायक समूह है. इसके बाद यहां यादव व अन्य पिछड़ी जातियां अहम भूमिका में दिखती हैं.

- चंदौसी (सुरक्षित) सीट पर दलित मतदाता सबसे ज्यादा असरदार है. साथ ही हिंदू सामान्य वर्ग और मुस्लिम मतदाता भी बड़ी भूमिका निभाते आए हैं.

- बिलारी विधानसभा मुस्लिम बहुल सीट है. इसके साथ ही यहां सैनी और अन्य पिछड़ी जातियां भी निर्णारूक भूमिका में रहती हैं. 

- असमोली सीट पर यादव और मुस्लिम मतदाताओं का मजबूत गठजोड़ है.

- गुन्नौर यादव बहुल सीट है. साथ ही यहां मुस्लिम और सहसवान क्षेत्र के मतदाता भी अहम भूमिका में रहते हैं.

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FAQ

Q. संभल जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं?
A. संभल जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं जिनके नाम हैं संभल, चंदौसी, बिलारी, असमोली और गुन्नौर.

Q. इनमें से कौन-सी सीट आरक्षित है?
A. चंदौसी सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है, बाकी चारों सीटें सामान्य श्रेणी की हैं.

Q. 2022 चुनाव में संभल जिले में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
A. सपा को चार सीटें (संभल, असमोली, बिलारी, गुन्नौर) मिलीं, जबकि सिर्फ चंदौसी सीट भाजपा के खाते में गई थी.

Q. संभल जिले की आबादी में मुस्लिम समुदाय का हिस्सा कितना है?
A. अनुमान के अनुसार जिले में मुस्लिम आबादी करीब 60 से 70 प्रतिशत के बीच है, जिससे यह प्रदेश के सबसे ज्यादा मुस्लिम बहुल जिलों में गिना जाता है.

Q. संभल हिंसा क्या थी और इसका जिले की राजनीति पर क्या असर पड़ा?
A. नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के अदालती सर्वे के दौरान हिंसा भड़की थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हुई थी. चुनाव में इसका असर स्थानीय राजनीति और मुस्लिम वोटों के समीकरण पर पड़ सकता है.

Q. 2027 के चुनाव से पहले फिलहाल राजनीतिक माहौल कैसा है?
A. संभल हिंसा के एक प्रमुख आरोपी के एआईएमआईएम में शामिल होने से मुस्लिम वोटों के बंटवारे की आशंका बढ़ी है. वहीं, भाजपा हिंदू मतदाताओं को साधने की रणनीति पर काम कर रही मानी जा रही है.

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