BRICS Summit 2026: किनुआ बिरयानी से लेकर सत्तू तक, विदेशी मेहमानों की थाली में दिखेगा हिंदुस्तान का देसी स्वाद
BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को BRICS का 18वां समिट आयोजित किया गया है. यह पूरा कार्यक्रम व मुख्य बैठकें भारत मंडपम में होने वाली हैं. इस समिट में भाग लेने के लिए अलग-अलग देशों के नेता व प्रतिनिधि पहुंचने वाले हैं. आज यानी 11 सितंबर को मेहमानों का आगमन होने लगा है. सभी मेहमान दिल्ली के लग्जरी होटल द लीला में ठहरेंगे. BRICS डेलीगेशन के लिए स्वागत का इंतजाम करने के साथ-साथ मेहमानों के लिए खास मेन्यू भी इस होटल ने ही तैयार किया है. ब्रिक्स स्पेसल मेन्यू में भारत का देसी स्वाद शामिल है, जो विदेशी मेहमानों को परोसा जाएगा.
2-3 महीने पहले ही तैयार हो गया था स्पेशल मेन्यू
होटल के एग्जीक्यूटिव सू-शेफ अस्तिक ओबेरॉय के अनुसार. मेहमानों के लिए मेन्यू की तैयारी पिछले 2-3 महीने से हो रही है. सभी मेहमानों की पसंद, डाइट और जरूरतों को भी ध्यान रखा गया है. हर डेलीगेशन का खान-पान और चॉइस अलग-अलग हो सकती है. इसी तर्ज पर खास मेन्यू बनाया गया है. उन्होंने बताया कि कुछ मेहमानों की स्पेशस डाइटरी जरूरते हैं तो कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें किसी खाने से एलर्जी है. ऐसे में सभी बातों को ध्यान रखते हुए व्यंजनों को मेन्यू में शामिल किया गया है. सभी मेहमानों के लिए स्वाद के साथ-साथ उनकी सेहत का भी पूरा ख्याल रखा गया है.
नॉर्थ टू साउथ का टेस्ट थाली में परोसा जाएगा
इस पूरे फूड मेन्यू का सबसे खास हिस्सा इंडियन खाने का है. होटल का भारतीय रेस्टोरेंट BRICS समिट के दौरान आकर्षण का मुख्य केंद्र होगा. यहां तैयार किए गए मेन्यू में भारत के अलग-अलग राज्यों व प्रांतों की झलक देखने को मिलेगी. देसी फूड्स को भी नए अंदाज से मेहमानों को सर्व किया जाएगा. मेन्यू में नॉर्थ, सेंट्रल और साउथ इंडियन क्यूजिन को जगह दी गई है. मेन्यू का मकसद विदेशी मेहमानों को भारतीय खाने की डायवर्सिटी का एक्सपीरियंस करवाना है. अलग-अलग क्षेत्रों के व्यंजनों के साथ भारतीय मसालों और सामग्रियों पर खास ध्यान दिया गया है.
मिलेट्स है मेन्यू की जान
ब्रिक्स स्पेशल मेन्यू में श्री अन्न यानी कि मिलेट्स को खास जगह दी घई है. पारंपरिक अनाजों को आधुनिक अंदाज में पेश किया जाएगा. खाने में विशेष मिलेट्स उपमा परोसा जाएगा. इसके अलावा, किनुआ बिरयानी भी परोसी जाएगी. मेन्यू में भारतीय मसालों के साथ जौ के आटा, मिलेट, ज्वार का सत्तु जैसी पारंपरिक सामग्रियों को भी जगह दी गई है. विदेशी मेहमानों को भारत के पारंपरिक अनाजों से रूबरू करवाया जाएगा. इसलिए, श्री अन्न की अलग-अलग डिशेज तैयार की गई है.
सत्तू और जौ से बनाई गई वेलकम ड्रिंक्स
होटल के वेलनेस प्रोग्राम के तहत, मेहमानों के लिए स्पेशल वेलकम ड्रिंक्स बनाई गई है. सत्तू और जौ जैसी पारंपरिक भारतीय सामग्रियों से ड्रिंक्स सर्व होंगी. इन्हें लीला अमृत ड्रिंक नाम दिया गया है. इसे बनाने के लिए अदरक, तुलसी, शहद, नींबू और जीरे का इस्तेमाल किया गया है.
स्वीट डिश में भी इंडियन मसालों का ट्विस्ट
विदेशी डेलीगेसन के लिए स्पेश डेजर्ट भी बनाए गए हैं. डेजर्ट मेन्यू में भी इंडियन फ्लेवर देखने को मिलने वाला है. लोटस डेजर्ट खासतौर पर मेहमानों को सर्व किया जाने वाला है. लोटस डेजर्ट को गुलाब और इलायची का फ्लेवर दिया गया है. इसके अलावा, केसर-पिस्ता कलश, बिना चीनी का अंजीर-काजू रोल और मोंक फ्रूट से तैयार स्वीट डिश भी मेन्यू में शामिल है.
मां के हाथों का स्वाद इंडियन स्नैक्स में
वहीं, ताज होटल ने भी अपने मेहमानों के लिए ट्रेडिशनल टू टेबल थीम मेन्यू को तैयार किया है. इनमें सभी शेफ्स ने अपनी माताओं से सीखी पारंपरिक डिशेज को ग्लोबल टच के साथ तैयार किया है. छह प्रकार के अलग-अलग स्नैक्स चुने गए हैं, जिनमें कश्मीर के मसालेदार अखरोट, राजस्थान की मिनी कचौरी, बंगाल की कुचो निमकी और तमिलनाडु के मुरुक्कू के साथ पुरानी दिल्ली का मैदा काजू शामिल है. मेहमानों को गालौटी कबाब और तंदूर में तैयार रोटियों के साथ कई मुगलयी डिशेज भी सर्व होंगी.
सिक्योरिटी के भी खास इंतजाम
होटल की तैयारियों में खाने और मेहमाननवाजी के साथ सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. दिल्ली पुलिस की टीमें होटल की टीम के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था पर काम कर रही है. पूरे इंतजामों पर कड़ी नजर रखी जा रही है.
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उत्तराखंड में युवाओं को मिल रहा स्टार्टअप का सहारा, सरकार दे रही फंडिंग से लेकर पेटेंट तक मदद
Uttarakhand Startups: उत्तराखंड में युवाओं के लिए नौकरी तलाशने के साथ-साथ अपना कारोबार शुरू करने के रास्ते भी तेजी से खुल रहे हैं. राज्य सरकार स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है, जिसमें नए आइडिया पर काम करने वाले युवाओं को आर्थिक मदद, प्रशिक्षण और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. सरकार का जोर खास तौर पर ऐसे युवाओं को आगे लाने पर है, जो अपने नए विचारों को कारोबार में बदलना चाहते हैं.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. इसका असर राज्य में स्टार्टअप की बढ़ती संख्या में भी दिखाई दे रहा है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2018 के अंत तक उत्तराखंड में करीब 100 स्टार्टअप थे. वहीं 2021 के अंत तक इनकी संख्या बढ़कर 500 से ज्यादा हो गई। सरकार अब इस क्षेत्र को और विस्तार देने की तैयारी में है.
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पांच साल में 1000 नए स्टार्टअप का लक्ष्य
राज्य सरकार की स्टार्टअप नीति-2023 के तहत अगले पांच वर्षों में 1000 नए स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही राज्य के हर जिले में कम से कम एक इनक्यूबेटर स्थापित करने की योजना है. इनक्यूबेटर ऐसे केंद्र होते हैं, जहां नए उद्यमियों को अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन, तकनीकी मदद और दूसरी जरूरी सुविधाएं मिलती हैं. सरकार की कोशिश है कि युवाओं को केवल स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित न किया जाए, बल्कि उन्हें शुरुआत से लेकर कारोबार को आगे बढ़ाने तक जरूरी सहायता भी मिले. इसके लिए इनोवेटर्स, इनक्यूबेटर्स, मेंटर्स और निवेशकों को एक साथ जोड़ने की व्यवस्था की गई है.
हर महीने 15 हजार रुपये तक की मदद
स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं के लिए आर्थिक सहायता भी नीति का अहम हिस्सा है. पंजीकृत स्टार्टअप को एक साल तक हर महीने 15 हजार रुपये का भत्ता देने का प्रावधान है. इससे शुरुआती दौर में कारोबार से जुड़े खर्चों को संभालने में युवाओं को मदद मिल सकती है. वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग, ट्रांसजेंडर और जमीनी स्तर पर नए प्रयोग करने वाले स्टार्टअप को 20 हजार रुपये प्रति माह तक का भत्ता देने की व्यवस्था है. इसका उद्देश्य उन वर्गों के युवाओं को भी स्टार्टअप की दुनिया में आगे आने का मौका देना है, जिन्हें शुरुआती दौर में अतिरिक्त आर्थिक सहायता की जरूरत हो सकती है.
आइडिया को कारोबार में बदलने के लिए सीड फंडिंग
कई बार युवाओं के पास अच्छा बिजनेस आइडिया तो होता है, लेकिन उसे शुरू करने के लिए शुरुआती पूंजी नहीं होती. इसी समस्या को दूर करने के लिए स्टार्टअप नीति में सीड फंडिंग की व्यवस्था की गई है. पंजीकृत स्टार्टअप को 10 लाख रुपये तक की एकमुश्त सीड फंडिंग मिल सकती है. वहीं विशेष श्रेणी के स्टार्टअप के लिए यह सहायता 12.5 लाख रुपये तक है. इससे नए उद्यमियों को अपने आइडिया को जमीन पर उतारने, शुरुआती उत्पाद तैयार करने और कारोबार की शुरुआत करने में मदद मिल सकती है.
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पेटेंट और ट्रेडमार्क पर भी सरकार का साथ
नई तकनीक या नया उत्पाद तैयार करने वाले युवाओं के लिए पेटेंट और ट्रेडमार्क भी महत्वपूर्ण होते हैं. सरकार ने इस क्षेत्र में भी आर्थिक सहायता का प्रावधान किया है. राष्ट्रीय पेटेंट हासिल करने पर एक लाख रुपये तक और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए पांच लाख रुपये तक की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था है. इसके अलावा ट्रेडमार्क और औद्योगिक डिजाइन के आवेदन पर भी 10 हजार रुपये तक की सहायता दी जाएगी.
इनक्यूबेशन सेंटर को भी बढ़ावा
स्टार्टअप के लिए मजबूत माहौल तैयार करने के लिए सिर्फ युवाओं को आर्थिक सहायता देना ही पर्याप्त नहीं है. उन्हें सही मार्गदर्शन और काम करने की जगह भी चाहिए. इसी को ध्यान में रखते हुए नए इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने के लिए एक करोड़ रुपये तक की कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान किया गया है. वहीं मौजूदा इनक्यूबेशन सेंटरों के विस्तार के लिए 50 लाख रुपये तक की सहायता दी जा सकती है.
कुल मिलाकर, उत्तराखंड सरकार की स्टार्टअप नीति युवाओं को नौकरी तलाशने के साथ-साथ रोजगार देने वाला बनने का मौका भी दे रही है. आर्थिक सहायता, सीड फंडिंग, पेटेंट सहयोग और इनक्यूबेशन सेंटर जैसी सुविधाओं से राज्य में नए बिजनेस आइडिया को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. पहाड़ी राज्य के युवाओं के लिए यह व्यवस्था स्थानीय स्तर पर कारोबार और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है.
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