केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को ब्रिक्स (BRICS) के सदस्य और सहयोगी देशों से कहा कि वे अपने पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ें, लोकल करेंसी में व्यापार को बढ़ावा दें और नियमों-कानूनों को आसान बनाएं, ताकि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ सके और सप्लाई चेन को ज़्यादा मज़बूत बनाया जा सके। नई दिल्ली में ब्रिक्स बिज़नेस फ़ोरम को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत का डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) भी शामिल है, ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं के बीच सीमा-पार सहयोग को बढ़ाने का आधार बन सकता है।
गोयल ने कहा आज इसे 11 देशों में स्वीकार किया जाता है और मैं ब्रिक्स सदस्य देशों और सहयोगी देशों से आग्रह करूंगा कि वे हमारे पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ें, एक-दूसरे की लोकल करेंसी में व्यापार करें, डिजिटल व्यापार को वैश्विक बनाएं और भविष्य की उभरती टेक्नोलॉजी के लिए मिलकर काम करें। मंत्री ने समूह के भीतर बाज़ार तक बेहतर पहुंच की भी वकालत की, खासकर कच्चे माल और ज़रूरी खनिजों के लिए, साथ ही देशों से नियमों को आसान बनाने और कंसाइनमेंट की मंज़ूरी में तेज़ी लाने का आग्रह किया। गोयल ने कहा कि 88 प्रतिशत देशों में टैरिफ की तुलना में नॉन-टैरिफ उपायों के कारण निर्यात की लागत ज़्यादा आ रही है, जिससे व्यापार को आसान बनाने के लिए बाज़ार तक बेहतर पहुंच की ज़रूरत पर ज़ोर मिलता है।
उन्होंने कहा हमें एक-दूसरे के उत्पादों के लिए अपने बाज़ार खोलने चाहिए, जिसमें कच्चा माल और ज़रूरी खनिज भी शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सप्लाई चेन तब मज़बूत होती है जब वे दोनों तरफ़ से काम करती हैं। मंत्री ने कहा कि भारत ब्रिक्स (BRICS) को अपने मैन्युफैक्चर्ड एक्सपोर्ट - खासकर इंजीनियरिंग के सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स - के लिए एक अहम बाज़ार मानता है। उन्होंने सर्विस सेक्टर में भी ज़्यादा सहयोग की बात कही, जिसमें पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाना और प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन को आपसी मान्यता देना शामिल है। गोयल ने आर्थिक सहयोग को मज़बूत करने में स्टार्टअप्स और महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों की भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत के 2,50,000 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से 45 प्रतिशत से ज़्यादा में कम से कम एक महिला पार्टनर या डायरेक्टर है।
उन्होंने ब्रिक्स देशों से कहा कि वे प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों और दूसरे कारोबारी मौकों में महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों की ज़्यादा भागीदारी सुनिश्चित करें। मंत्री ने एग्री-टेक स्टार्टअप्स के बीच सहयोग और ब्रिक्स के सदस्य व सहयोगी देशों के स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच बेहतर तालमेल का प्रस्ताव भी रखा। ब्रिक्स बिज़नेस फ़ोरम, जो प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी के लिए इस समूह का मुख्य मंच है, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। यह फ़ोरम व्यापार, निवेश, वित्त, टेक्नोलॉजी और टिकाऊ आर्थिक विकास पर चर्चा करने के लिए कारोबार और सरकार के नेताओं को एक साथ लाता है। गोयल ने कहा कि भारत ब्रिक्स सदस्य और सहयोगी देशों के साथ आर्थिक सहयोग को और मज़बूत करना चाहता है, क्योंकि वह 2047 तक एक विकसित देश बनने के अपने लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है।
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(सीमा हाकू काचरू)
ह्यूस्टन, 11 सितंबर भारतीय-अमेरिकी दंपति ने इंजीनियरिंग अनुसंधान और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ह्यूस्टन विश्वविद्यालय को 40 लाख डॉलर का दान दिया है। विश्वविद्यालय ने बताया कि ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के कुलेन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को दिए गए इस दान से मैकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग में दो स्थायी प्रोफेसर पद, शिक्षकों के शोध के लिए कोष, स्नातक छात्रों के लिए फेलोशिप और एक संगोष्ठी श्रृंखला स्थापित की जाएगी। भारतीय-अमेरिकी इंजीनियर मनमोहन सिंह कलसी और उनकी पत्नी मैरी-लुइस शूबर्ट कालसी ने शोध और शिक्षा के विस्तार के उद्देश्य से यह राशि दान की है।
कुलेन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रदीप शर्मा ने कहा, ‘‘ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के स्नातक छात्र से लेकर उद्योग जगत के नवोन्मेषक और उद्यमी तक मनमोहन कलसी की यात्रा कुलेन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाती है।’’
यह योगदान इस दंपति के विश्वविद्यालय के साथ लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को और मजबूत करता है। मनमोहन कलसी ने ह्यूस्टन विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में परास्नातक और पीएचडी की डिग्री हासिल की थी। उन्होंने दिवंगत प्रोफेसर गैब्रियल फाजेकास के मार्गदर्शन में अध्ययन किया था।
वर्ष 1978 में उन्होंने हाइड्रोडायनेमिक रोटरी सीलिंग तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी कलसी इंजीनियरिंग की स्थापना की थी। इस दंपति ने इससे पहले 2014 में भी कॉलेज में एक स्थायी प्रोफेसर पद के लिए आर्थिक सहयोग दिया था, जिसे प्रोफेसर फाजेकास की स्मृति में स्थापित किया गया था।
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