हिंदू धर्म व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व माना जाता है। हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत और अखंज सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है।
खासकर इस व्रत की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें बाजार की बनीं महंगी मूर्तियों की पूजा नहीं की जाती बल्कि सुहागिन महिलाएं अपने हाथों से शुद्ध मिट्टी के भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाती हैं। आइए आपको इस व्रत में मिट्टी की मूर्तियां बनाने की परंपरा क्यों शुरु की गई और इसके पीछे कौन-सी पौराणिक कथा जुड़ी है।
माता पार्वती द्वारा स्वयं की गई पहली स्थापना की परंपरा
असल में हरतालिका तीज में मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति बनाने का सीधा संबंध माता पार्वती के उस ऐतिहासिक तप से है, जो उन्होंने शिवजी को पाने के लिए जंगल में किया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब माता पार्वती को अपनी सखियों के साथ महल छोड़कर घने जंगल में शरण लेनी पड़ी थी, तब वहां उनके पास पूजा करने के लिए सोने-चांदी या किसी अन्य धातु की मूर्तियां उपलब्ध नहीं थी।
उन्होंने एकांत और प्राकृतिक वातावरण में अपने कोमल और पवित्र हाथों से नदी के किनारे की रेत और शुद्ध मिट्टी को इकट्ठा किया। फिर माता पार्वती ने भगवान शिव के लिंग रुप और अपनी श्रद्धा के अनुसार उनकी प्रतिमा को आकार दिया।
माता ने श्रद्धा के साथ उस मिट्टी की मूर्ति की विधि-विधान से पूजा की थी। क्योंकि इस व्रत की शुरुआत ही माता पार्वती द्वारा मिट्टी की पूजा से हुई थी, इसलिए आज भी सुहागिन महिलाएं उसी प्राचीन परंपरा को जीवित रखते हुए हाथों से मिट्टी के भगवान बनाकर उनकी आराधना करती हैं।
शिव और माता पार्वती की मूर्ति बनाने की मिट्टी को खास क्यों माना जाता है?
धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से मिट्टी को पंचतत्वों में से एक सबसे पवित्र और शुद्ध तत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस संसार की हर रचना अंतत: इसी मिट्टी में विलीन हो जाती है और जीवन का आधार भी यही है। जब सुहागिनें अपने हाथों से मिट्टी को गूंथकर भगवान शिव और माता पार्वती का स्वरुप देती हैं, तो यह इस बात का प्रतीक होता है कि उनकी आस्था और भक्ति बिल्कुल इस कच्ची और पवित्र मिट्टी की तरह ही निर्मल, सच्ची और अडिग है।
वहीं, हाथों से मूर्ति बनाना इस बात को भी दर्शाता है कि पूजा सिर्फ दिखावे या बाजार की महंगी चीजों की मोहताज नहीं होती बल्कि इसके लिए सच्चे मन, समर्पण और भावना की बेहद जरुरत होती है। मिट्टी से बनीं मूर्तियों को बाद में विधिवत रुप से जल में विसर्जित कर देती है।
मिट्टी की मूर्ति बनाने को लेकर पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने जब राजा हिमालय के महल को त्याग किया और जंगल की गुफा में बालू के शिवलिंग की स्थापना करते कठोर तपस्या शुरु की थी, जिसमें उन्होंन अन्न-जल त्याग दिया था। उनकी इस कठिन तपस्या और मिट्टी से बनाए गए शिवलिंग के प्रति अटूट प्रेम को देखकर भोलेनाथ काफी प्रसन्न हुए।
वहीं, भगवान शिव उसी बालू के शिवलिंग से प्रकट होकर माता पार्वती को उनकी तपस्या का फल दिया और उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रुप में स्वीकार करने का वरदान दिया। तब से यह प्रथा प्रचलित हो गई है, जो महिला इस दिन पूरी श्राद्धा से अपने हाथों से मिट्टी के शिवलिंग और माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर उनकी पूजा करती हैं, तो उसे माता पार्वती जैसा अखंड सौभाग्य और शिवजी जैसा वर प्राप्त होता है।
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राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के तहत BRICS बिजनेस फोरम का भव्य आयोजन हुआ। फोरम को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सदस्य देशों के बीच गहरे और अधिक मजबूत आर्थिक सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), व्यापार सुगमता, डिजिटल नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर दिया।
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि ब्रिक्स का यह मंच अपने संस्थागत सहयोग के 20 वर्ष पूरे कर रहा है, जो इसके वैश्विक प्रभाव और परिपक्वता को दर्शाता है। BRICS समिट ऐसे समय में हो रहा है जब भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता, महामारी और जलवायु से जुड़ी परेशानियाँ बढ़ रही हैं।
जयशंकर ने कहा, "हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में उथल-पुथल मची हुई है। अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता हमारे आस-पास की दुनिया की मुख्य विशेषताएँ बन गई हैं। हम भू-राजनीतिक संघर्षों, महामारियों और जलवायु से जुड़ी परेशानियों के आर्थिक परिणाम देख रहे हैं। साथ ही, तेज़ी से हो रहे डिजिटलाइज़ेशन और तकनीकी प्रगति से विकास, उत्पादकता और तरक्की के लिए नई संभावनाएँ खुल रही हैं। इसका नतीजा एक ऐसा आर्थिक परिदृश्य है जहाँ जोखिम और अवसर दोनों व्यापक रूप से फैल रहे हैं और जहाँ पहले से अनुमान लगाने, अनुकूलन करने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।"
BRICS आर्थिक सुरक्षा को मज़बूत कर सकता है
जयशंकर ने ज़ोर दिया कि आर्थिक मज़बूती और स्थिरता को गहरे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ-साथ चलना चाहिए। BRICS, अपने विविध बाज़ारों, संसाधनों, क्षमताओं और अनुभवों के साथ, सदस्य देशों को व्यावसायिक अवसरों का विस्तार करने और आर्थिक सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए एक मंच प्रदान कर सकता है।
जयशंकर के साथ-साथ, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी BRICS बिज़नेस फ़ोरम में बोलने वालों में शामिल हैं।
रविवार को दिल्ली मेट्रो सेवाएँ जल्दी शुरू होंगी
इस बीच, DMRC ने शुक्रवार को कहा कि BRICS समिट के कारण ट्रैफिक प्रतिबंधों के बीच परीक्षा देने वाले छात्रों और यात्रियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए रविवार को सभी कॉरिडोर पर दिल्ली मेट्रो ट्रेन सेवाएँ सुबह 6 बजे शुरू होंगी।
आमतौर पर, रविवार को पिंक, मैजेंटा और ग्रे लाइनों पर सेवाएँ सुबह 7 बजे शुरू होती हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने X पर एक पोस्ट में कहा, "BRICS समिट के कारण ट्रैफिक प्रतिबंधों के बीच परीक्षा देने वाले छात्रों और आम जनता की सुचारू और समय पर आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए, रविवार को सभी लाइनों पर मेट्रो ट्रेन सेवाएँ सुबह 6 बजे शुरू होंगी।"
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