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थार-फॉर्च्यूनर्स लेकर सड़क पर ‘भाईगिरी’ नहीं चलेगी:दमन में सैकड़ों मालिकों ने ली शपथ; हाथों में पोस्टर- गुंडागर्दी दिखाने की गाड़ी नहीं; VIDEO वायरल

दमन के जिला कलेक्टर ने सड़क सुरक्षा को लेकर थार और फॉर्च्यूनर के मालिकों से सुरक्षित तरीके से गाड़ी चलाने का संकल्प दिलाया। अभियान के दौरान दमन के एक खुले मैदान में सैकड़ों थार और फॉर्च्यूनर को कतार में खड़ा कराया गया। उनके मालिकों और ड्राइवरों को गाड़ियों के सामने लाइन में खड़ा किया गया। गाड़ी मालिकों और ड्राइवरों ने हाथों में रोड सेफ्टी के संदेश वाले पोस्टर लेकर मैदान का चक्कर लगाया। इसके बाद सभी ने हिंदी में सड़क सुरक्षा की शपथ ली। यह अभियान 9 सितंबर की शाम को चलाया गया था। अभियान की 4 तस्वीरें… ड्राइवर और मालिकों ने ली शपथ, 4 मुख्य बातें… कलेक्टर ने सभी को सोशल मीडिया पर इस अभियान को शेयर करने को कहा कलेक्टर मिश्रा ने थार मालिकों से सोशल मीडिया पर इस अभियान को शेयर करने और महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा को टैग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिंद्रा को भी इस पहल से प्रेरणा लेकर देशभर में थार के साथ सड़क सुरक्षा को लेकर अभियान चलाना चाहिए। दमन के डिप्टी कलेक्टर प्रियंशु सिंह ने बताया कि दमन आरटीओ में रजिस्टर्ड सभी थार और फॉर्च्यूनर मालिकों को संकल्प यात्रा में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। लोगों से विंडशील्ड या बदले हुए टायर और साउंड सिस्टम जैसी चीजें हटाने को कहा गया। थार से जुड़े 7 वायरल मामले, गोवा में रेंटल थार पर रोक की मांग दिल्ली, अगस्त 2025: 2 लोगों की मौत- चाणक्यपुरी में कथित तौर पर तेज रफ्तार रेंटेड थार ने 2 पैदल यात्रियों को कुचल दिया, जिससे दोनों की मौत हो गई। बाद में इस मामले में आरोपी की जमानत पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। गोवा, फरवरी 2026: 65 साल के व्यक्ति की मौत- उत्तरी गोवा के असगांव में एक रेंटेड थार की हुंडई i20 से टक्कर हुई। हादसे में 65 साल के व्यक्ति की मौत हो गई। इस घटना के बाद गोवा में रेंटल थार और सड़क सुरक्षा को लेकर बहस तेज हुई। गुरुग्राम, मार्च 2026: दादा और 2 पोते की मौत- पटौदी के खोड़ गांव में कथित तौर पर तेज रफ्तार Thar ने सड़क पर जा रहे 52 वर्षीय व्यक्ति और उनके दो नाबालिग पोतों को पीछे से टक्कर मार दी। तीनों की मौत हो गई। पुलिस ने चालक को गिरफ्तार किया। लखीमपुर खीरी, अप्रैल 2026: दंपती की मौत- शादी से लौट रहे तीन लोगों की बाइक को तेज रफ्तार थार ने टक्कर मार दी। हादसे में पति-पत्नी की मौत हुई, जबकि तीसरी महिला गंभीर रूप से घायल हुई। मुंबई, जुलाई 2026: दो बाइक सवारों को टक्कर- वायरल वीडियो में हरियाणा नंबर की थार को 2 बाइक सवारों को टक्कर मारने के बाद रुकने के बजाय आगे जाते हुए दिखाया गया। मामले में मुंबई पुलिस ने FIR दर्ज की। भोपाल, सितंबर 2026: कॉलोनी में थार का उत्पात- भोपाल की एक कॉलोनी में थार ने कई खड़ी कारों को टक्कर मारी, गेट तोड़ा और बाहर भी वाहनों को टक्कर मारी। घटना के बाद करीब 150 निवासी पुलिस थाने पहुंचे। नोएडा, जून 2025: सड़क पर व्यक्ति को टक्कर- एक वायरल वीडियो में थार से एक व्यक्ति को पीछे से टक्कर लगती दिखी, जिसके बाद वह सड़क किनारे नाले में जा गिरा। पुलिस ने रैश ड्राइविंग समेत धाराओं में केस दर्ज किया। ----------------- ये खबर भी पढ़ें… महाराष्ट्र- ट्रक-बोलेरो की भिड़ंत, 3 बच्चों समेत 8 की मौत:SUV को जेसीबी-क्रेन की मदद से निकाला; रायपुर से नागपुर जाते वक्त हादसा महाराष्ट्र के भंडारा जिले में शुक्रवार को ट्रक और बोलेरो की टक्कर में 3 बच्चों समेत 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 लोग घायल हैं। पुलिस के मुताबिक, हादसा सुबह करीब 4 बजे नागपुर-रायपुर नेशनल हाईवे पर पिंपलगांव सड़क के पास हुआ। पूरी खबर पढ़ें…

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Hartalika Teej Rituals: जानें क्यों हरतालिका तीज पर बनाई जाती है मिट्टी से शिव-पार्वती की मूर्ति, क्या है महत्व?

हिंदू धर्म व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व माना जाता है। हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत और अखंज सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है। 
खासकर इस व्रत की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें बाजार की बनीं महंगी मूर्तियों की पूजा नहीं की जाती बल्कि सुहागिन महिलाएं अपने हाथों से शुद्ध मिट्टी के भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाती हैं। आइए आपको इस व्रत में मिट्टी की मूर्तियां बनाने की परंपरा क्यों शुरु की गई और इसके पीछे कौन-सी पौराणिक कथा जुड़ी है।

माता पार्वती द्वारा स्वयं की गई पहली स्थापना की परंपरा
असल में हरतालिका तीज में मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति बनाने का सीधा संबंध माता पार्वती के उस ऐतिहासिक तप से है, जो उन्होंने शिवजी को पाने के लिए जंगल में किया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब माता पार्वती को अपनी सखियों के साथ महल छोड़कर घने जंगल में शरण लेनी पड़ी थी, तब वहां उनके पास पूजा करने के लिए सोने-चांदी या किसी अन्य धातु की मूर्तियां उपलब्ध नहीं थी। 

उन्होंने एकांत और प्राकृतिक वातावरण में अपने कोमल और पवित्र हाथों से नदी के किनारे की रेत और शुद्ध मिट्टी को इकट्ठा किया। फिर माता पार्वती ने भगवान शिव के लिंग रुप और अपनी श्रद्धा के अनुसार उनकी प्रतिमा को आकार दिया।

माता ने श्रद्धा के साथ उस मिट्टी की मूर्ति की विधि-विधान से पूजा की थी। क्योंकि इस व्रत की शुरुआत ही माता पार्वती द्वारा मिट्टी की पूजा से हुई थी, इसलिए आज भी सुहागिन महिलाएं उसी प्राचीन परंपरा को जीवित रखते हुए हाथों से मिट्टी के भगवान बनाकर उनकी आराधना करती हैं।

शिव और माता पार्वती की मूर्ति बनाने की मिट्टी को खास क्यों माना जाता है?
धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से मिट्टी को पंचतत्वों में से एक सबसे पवित्र और शुद्ध तत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस संसार की हर रचना अंतत: इसी मिट्टी में विलीन हो जाती है और जीवन का आधार भी यही है। जब सुहागिनें अपने हाथों से मिट्टी को गूंथकर भगवान शिव और माता पार्वती का स्वरुप देती हैं, तो यह इस बात का प्रतीक होता है कि उनकी आस्था और भक्ति बिल्कुल इस कच्ची और पवित्र मिट्टी की तरह ही निर्मल, सच्ची और अडिग है। 

वहीं, हाथों से मूर्ति बनाना इस बात को भी दर्शाता है कि पूजा सिर्फ दिखावे या बाजार की महंगी चीजों की मोहताज नहीं होती बल्कि इसके लिए सच्चे मन, समर्पण और भावना की बेहद जरुरत होती है। मिट्टी से बनीं मूर्तियों को बाद में विधिवत रुप से जल में विसर्जित कर देती है।

मिट्टी की मूर्ति बनाने को लेकर पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने जब राजा हिमालय के महल को त्याग किया और जंगल की गुफा में बालू के शिवलिंग की स्थापना करते कठोर तपस्या शुरु की थी, जिसमें उन्होंन अन्न-जल त्याग दिया था। उनकी इस कठिन तपस्या और मिट्टी से बनाए गए शिवलिंग के प्रति अटूट प्रेम को देखकर भोलेनाथ काफी प्रसन्न हुए।
वहीं, भगवान शिव उसी बालू के शिवलिंग से प्रकट होकर माता पार्वती को उनकी तपस्या का फल दिया और उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रुप में स्वीकार करने का वरदान दिया। तब से यह प्रथा प्रचलित हो गई है, जो महिला इस दिन पूरी श्राद्धा से अपने हाथों से मिट्टी के शिवलिंग और माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर उनकी पूजा करती हैं, तो उसे माता पार्वती जैसा अखंड सौभाग्य और शिवजी जैसा वर प्राप्त होता है।

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जब हार मानकर ड्रेसिंग रूम में सो गई भारतीय टीम, जागी तो कर दिया बड़ा उलटफेर, मैच जीता पर अवॉर्ड ले गया पाकिस्तानी कप्तान

india miracle win over pak: शारजाह में भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत हमेशा से सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि भावनाओं का ज्वार रही है. लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि एक ऐसा मैच भी था जहां भारतीय टीम पूरी तरह घुटने टेक चुकी थी, खिलाड़ी रणनीति बनाने के बजाय ड्रेसिंग रूम में गहरी नींद सो रहे थे, और फिर अचानक जागकर उन्होंने इतिहास का सबसे अकल्पनीय चमत्कार कर दिया. यह कहानी है मार्च 1985 की, जब शारजाह के मैदान पर रॉथमैन कप फोर-नेशन टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में एक ऐसा उलटफेर हुआ जो आने वाले 40 सालों के लिए एक मिसाल बन गया. Fri, 11 Sep 2026 16:34:22 +0530

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