आज पूरी दिल्ली छावनी में तब्दील है क्योंकि ब्रिक्स समिट के लिए मंच सज चुका है और पूरी दुनिया की नजर भारत में होने वाले इस ब्रिक्स समिट पर है। वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत में कदम रख चुके हैं। जिस दौरान पुतिन दिल्ली पहुंचे उनका सुरक्षा घेरा देखकर पूरी दुनिया दंग रह गई। एयरपोर्ट पर पुतिन का केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कई नेताओं ने जोरदार स्वागत किया। बता दें कि ब्रिक्स सम्मेलन में तमाम बड़े देशों के राष्ट्रीय अध्यक्ष शामिल होने के लिए यहां पर पहुंच चुके हैं। सबसे ज्यादा नजर पुतिन और जिंगपिंग पर लोगों की टिकी हुई है। क्योंकि तीन शक्तियां जब एक टेबल पर मिलेंगी यानी भारत, रूस, चीन तो अमेरिका जैसे देश की नींद ही उड़ जाएगी। यही वजह है कि जैसे ही ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय अध्यक्षों का भारत आना शुरू हुआ, डोनाल्ड ट्रंप बेचैन परेशान हो गए।
आज पीएम मोदी से पुतिन की मुलाकात होने वाली है। बता दें कि समिट में ऊर्जा रक्षा से लेकर व्यापार और निवेश तक साथ ही जमीनी स्तर पर भागीदारी बढ़ाने जैसे कई विषय शामिल हैं। इन पर चर्चा होगी। फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद से ब्रिक्स समिट में यह उनकी पहली विदेश यात्रा है। यानी कि पुतिन इस युद्ध के दौरान पहली बार भारत दौरे पर आए हैं। पीएम मोदी पुतिन भारत रूस संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा करेंगे। जिसमें व्यापार, ऊर्जा, रक्षा सहयोग पर खासतौर पर बात होने की संभावना है। यह दौरा 31 अगस्त को विशेष में संघई सहयोग संगठन समिति के दौरान पीएम मोदी और पुतिन के मुलाकात के कुछ दिनों बाद हो रहा है। बिकेक में बैठक में दोनों नेताओं ने राजनीतिक संबंधों, व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी और साथ ही साथ पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में चल रहे संघर्षों पर भी चर्चा की गई थी।
पुतिन का दिल्ली दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब भारत और रूस अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं। लेकिन लगातार डोनाल्ड ट्रंप टांग अड़ाने की कोशिश में लगे रहे। आपने देखा कि किस तरीके से रूस और यूक्रेन का युद्ध रुक जाए। डोनाल्ड ट्रंप ने तमाम कोशिशें की। कभी भारत को डराते नजर आए, कभी रूस से संबंध तोड़ने के लिए धमकियां देते नजर आए। लेकिन भारत और रूस के संबंध और मजबूत होते चले गए। पुतिन का दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि यूक्रेन में रूस की जंग और रूसी व्यापार पर पश्चिमी देशों की पाबंदियों की वजह से रूस पर भूराजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दामित्री ने पहले ही कहा था कि दोनों पक्ष रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग और भारत को सुखोई एसयू 57 स्टील फाइटर जेट बेचने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं। तो मॉस्को से एक वर्चुअल ब्रीफिंग के दौरान यह बात करते हुए कहा गया था कि हम उम्मीद कर रहे हैं कि इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच एक और द्विपक्षीय बैठक होगी। यह बैठक तय हो चुकी है जो अब आज या कल में होने वाली है। इसलिए हमेशा की तरह वो सबसे पहले द्विपक्षीय एजेंडे पर चर्चा करेंगे। व्यापार और आर्थिक सहयोग का दायरा बहुत बड़ा है। शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन के दौरे के एजेंडे में भारत को रूस के एसयू 57 स्टील फाइटर जेट्स की संभावित बिक्री भी शामिल हो सकती है।
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