ढाका पहुंचे जयशंकर ने क्यों नहीं की युनूस से मुलाकात? भारत के तगड़े प्लान की इनसाइड स्टोरी
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बांग्लादेश की जमीन पर भूचाल ला दिया है। यूनुस के परखच्चे उड़ाते हुए भारत ने एक ऐसा काम किया है जिसने कट्टरपंथी ब्रिगेड के होश उड़ा डाले हैं। ढाका की राजनीति में एक ऐसा तूफान आने वाला है जो यूनुस और भारत विरोधियों को तबाही के रास्ते पर खड़ा करने वाला है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत के विदेश मंत्री ने बांग्लादेश में अपनी 4 घंटे की यात्रा से एक बहुत बड़ा एक्शन लिया और पूरी दुनिया को भारत का एक साफ संदेश दिया। आपने एक बात गौर की होगी कि बांग्लादेश की सरज पर जब भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर पहुंचे तो उन्होंने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस से कोई भी मुलाकात नहीं की। दूसरी तरफ एस जयशंकर के खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी कि बीएनपी के नेता तारिक रहमान से मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आई।
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विदेश नीति में जो होते दिखता है उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है वो छिपा हुआ संदेश जो भविष्य की तमाम नीतियों का संकेत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ढाका पहुंचे तो थे खालिदा जिया की मौत पर शोक संवेदना व्यक्त करने लेकिन इस यात्रा से भारत ने बांग्लादेश की सरकार को टेंशन में ला दिया है। हुआ यह कि ढाका पहुंचते ही एस जयशंकर ने पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। खालिदा जिया के बेटे और बीएनबी नेता तारिक रहमान से मुलाकात की। पीएम मोदी का शोक संदेश दिया। मुलाकात गर्मजशी से हुई। लेकिन सबसे दिलचस्प यह रहा कि एस जयशंकर की यूनुस से दूरी उनका यूनुस से मुलाकात ना करना जंगल में आग की तरह फैला। खबर सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। अब सवाल उठा कि एस जयशंकर ने यूनुस को भाव क्यों नहीं दिया? क्या यह सोची समझी रणनीति है?
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इस सवाल को लेकर विदेश नीति से जुड़े जानकार मान रहे हैं कि भारत ने ना सिर्फ यूनुस की घनघोर बेइज्जती की है बल्कि साफ-साफ बता दिया है कि भारत बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के भविष्य को संदेह से देखता है और यूनुस को सिर्फ एक अस्थाई मुखिया मान रहा है। भारत यह भी जानता है कि बांग्लादेश में चुनाव हुए तो तारिक रहमान की सत्ता में वापसी लगभग तय है। ऐसे में केयरटेकर और चीन पाकिस्तान की गोद में बैठे यूनुस से दूरी बनाने का वक्त आ गया है। यूनुस से मुलाकात ना करके भारत ने सिर्फ यूनुस को ही संदेश नहीं दिया बल्कि बीए एनपी नेता तारिक रहमान को भी बता दिया कि दिल्ली उन्हें बांग्लादेश का भविष्य मान रही है।
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भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर का तारिक रहमान से मिलना एक सोचा समझा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि तारिक रहमान ना सिर्फ खालिदा जिया के बेटे हैं बल्कि उन्हें बांग्लादेश के अगले संभावित प्रधानमंत्री के रूप में भी देखा जा रहा है। पिछले दिनों तारीख ने जमात इस्लामी जैसे कट्टरपंथी सहयोगियों से दूरी बनाई है और वह अब बांग्लादेश फर्स्ट की बात करते हुए भी नजर आ रहे हैं। इस मुलाकात को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि भारत भविष्य के राजनीतिक विकल्पों पर नजर बनाए हुए हैं। जानकारों का कहना है कि शेख हसीना के जाने के बाद बीएनपी ने सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर दिया कि विदेश नीति पर ज्यादा बयानबाजी ना हो। खासकर भारत के मामले में और यही वजह है कि पिछले डेढ़ साल में बीएनपी के किसी भी नेता ने भारत के खिलाफ कोई भी बयान नहीं दिया। उल्टे तारिक रहमान ने पाकिस्तान समर्थित जमान को निशाने पर लिया।
अमेरिका ने सूअर के मल वाला भेजा मक्का, बांग्लादेश में मचा भयंकर बवाल
जब से बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्ता पलट हुआ है और यूनुस अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार बने हैं तब से भारत और बांग्लादेश के रिश्ते लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। यूनुस की भारत विरोधी और हिंदू विरोधी हरकतों के चलते बॉर्डर पर तनाव बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों से कट्टरपंथियों की जमात जिस तरह से हिंदुओं पर बर्बरता वाले हमले कर रही है। उसने तो भारत के साथ संबंधों को और भी ज्यादा खराब कर दिया है। यूनुस पर आरोप लग रहे हैं कि वह पाकिस्तान और अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के इशारों पर ही सारे फैसले ले रहे हैं। कहा जाता है कि यूनुस को ही अमेरिका ने बांग्लादेश की कुर्सी पर बिठाने का काम किया है। इसीलिए वो अमेरिका की धुन पर नाच रहे हैं। लेकिन अब उन्हें ऐसा करना भारी भी पड़ रहा है। अब अमेरिका ने बांग्लादेश को ऐसा धोखा दिया है जिसने भयंकर बवाल मचा दिया है।
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बांग्लादेश में आने वाला अमेरिकी मक्का फिलहाल खाने से ज्यादा बहस का मुद्दा बन गया है। वजह सोशल मीडिया पर यह सवाल उठ गया कि क्या यह वही मक्का है जो अमेरिका में सूअर की खाद से उगाया जाता है? ढाका में अमेरिकी दूतावास ने एक पोस्ट किया। पोस्ट में लिखा कि अमेरिकी मक्का इस महीने बांग्लादेश पहुंच रहा है। पोषण के लिए जाना जाने वाला यह मक्का कई तरह के खाने में इस्तेमाल होता है। साथ ही यह पशुओं के चारे के रूप में भी काम आता है। जिससे मांस, दूध और अंडों की सप्लाई बनी रहती है। अमेरिका में मक्का की खेती के दौरान अक्सर सूअर की खाद का इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि बांग्लादेश एक मुस्लिम बहुल देश है और वहां सूअर से जुड़ी चीजें हराम मानी जाती है। इसीलिए यह मुद्दा चर्चा में आ गया और सोशल मीडिया पर लोगों ने टिका टिप्पणी करना शुरू कर दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कमेंट्स आने लगे। कई यूज़र्स ने तंज के लहजे में लिखा कि अब सूअर की खाद से उगा मक्का बांग्लादेश पहुंचेगा। एक यूजर ने लिखा कि ट्रंप की नीतियां अनैतिक है। दूसरे यूजर ने लिखा कि क्या यह हराम नहीं होगा?
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कुछ ने तो ग्रो से ही पूछ लिया। बताओ कि क्या ये सच बात है कि अमेरिका में मक्के की खेती में सूअर की खाद का इस्तेमाल होता है? तो जवाब में ग्रुप ने कहा कि हां अमेरिका में मक्का उगाने के लिए अक्सर सूअर की खाद का इस्तेमाल किया जाता है। खासकर उन इलाकों में जहां बड़ी मात्रा में सूअरों का पालन होता है। यूएसडीए की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में करीब 16% मक्का उगाने वाले खेतों में खाद के रूप में सूअर की खाद डाली गई थी। अमेरिका ने जो धोखा दिया है वह इस्लाम के खिलाफ है। जिसके बाद बांग्लादेश के मुसलमान भड़के हुए हैं। तो चलिए आपको पूरे मामले के बारे में बता देता हूं। दरअसल, लगातार बढ़ते तनाव के चलते अब बांग्लादेश और भारत का व्यापार भी धीरे-धीरे निचले स्तर पर पहुंच गया है। अब यूनुस अमेरिका को ही सब कुछ मान रहा है। लेकिन यूनुस को शायद नहीं पता था कि अमेरिका अपने फायदे के लिए बांग्लादेश के खिलाफ भी जा सकता है। दरअसल बांग्लादेश अमेरिका से मक्का आयात कर रहा है। इसकी जानकारी ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास ने दी है। अमेरिकी दूतावास ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि अमेरिकी मक्का बांग्लादेश में आने वाला है। जिसके बाद पूरे बांग्लादेश में बवाल मच गया। अमेरिकी दूतावास ने अपने पोस्ट में कहा कि अमेरिकी मक्का बांग्लादेश में इस माह आने वाला है। यह अपने पौष्टिक गुणवत्ता के लिए जाना जाता है।
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यह कॉर्न ब्रेड और ब्रेकफास्ट सेरेल जैसे मुख्य खाद्य पदार्थों सहित कई खाद्य पदार्थों में एक अहम सामग्री के रूप में काम करता है। मक्के का इस्तेमाल जानवरों को भी खिलाने के लिए किया जाता है जो मीट, डेरी और अंडों की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करती है। फिर क्या था? इस पोस्ट ने बवाल मचा दिया। जानकारी के मुताबिक अमेरिका में मक्के की खेती में सूअर के गोबर का इस्तेमाल उर्वरक के रूप में किया जाता है। अमेरिकी मक्के के खेत में प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए उसमें सूअर के मल डाले जाते हैं।
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