देवी तोरी सांवली बा सुरतिया…” से शुरू होती थी कजरी, पूर्वांचल की सदियों पुरानी है स्मृति, अकबर के दौर से जुड़ा है इसका इतिहास
जौनपुर में कजरी लोकगीत का इतिहास मुगल बादशाह अकबर के दौर से जुड़ा है. वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के डॉ. मनोज मिश्रा इस प्राचीन लोक परंपरा को सहेजने का प्रयास कर रहे हैं. कजरी का संसार केवल एक गांव या एक जिले तक सीमित नहीं रहा। पूर्वांचल से लेकर हिंदी भाषी क्षेत्रों तक इसकी अलग-अलग शैलियां विकसित हुईं. मिर्जापुर, विंध्याचल और बनारस की कजरी ने अपनी खास मिठास और गायकी के कारण अलग पहचान बनाई. डॉ. मिश्रा बताते हैं कि कजरी में जीवन के अनेक रंग दिखाई देते हैं.
न प्याज-टमाटर की झंझट, न ज्यादा मेहनत! घर पर ऐसे बनाएं दही वाली मूंग दाल मंगोड़ी की सब्जी, रोटी-चावल के साथ लगेगी लाजवाब, जानें रेसिपी
Mangodi ki Sabzi Recipe: मूंग दाल मंगोड़ी और दही से बनने वाली सब्जी भी एक ऐसी ही पारंपरिक रेसिपी है. इसमें न तो प्याज़ की जरूरत होती है और न ही टमाटर की, दही को मुख्य सामग्री के तौर पर इस्तेमाल करके ही यह स्वादिष्ट डिश तैयार हो जाती है. आइए जानते हैं इसकी आसान रेसिपी.
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