जरूरत की खबर- क्या बॉडी बनाने के लिए क्रिएटिन जरूरी:डॉक्टर से जानें क्या है ये सप्लीमेंट, इसके फायदे-नुकसान और 5 सावधानियां
जिम जाने वाले युवाओं में मसल्स बनाने और वर्कआउट की क्षमता बढ़ाने के लिए क्रिएटिन सप्लीमेंट काफी लोकप्रिय है। लेकिन सवाल ये है कि क्या इसे लेने से सच में मसल्स और ताकत बढ़ती है? क्या इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं? दरअसल, क्रिएटिन शरीर में प्राकृतिक रूप से बनने वाला एक कंपाउंड है। यह मांसपेशियों को ऊर्जा देने में मदद करता है। खासकर तेज और हाई इंटेंसिटी एक्सरसाइज में इसकी जरूरत पड़ती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर जिम जाने वाले व्यक्ति को क्रिएटिन सप्लीमेंट लेना चाहिए। इसे शुरू करने से पहले इसके साइंस को समझना जरूरी है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में क्रिएटिन से जुड़े जरूरी सवालों के जवाब जानेंगे। साथ ही समझेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- क्रिएटिन क्या है? जवाब- क्रिएटिन एक नेचुरल कंपाउंड है, जो शरीर में बनता है और मुख्य रूप से मसल्स में स्टोर रहता है। जरूरत पड़ने पर लोग इसे सप्लीमेंट के तौर पर भी लेते हैं। यह जिम जाने वालों और एथलीट्स के बीच काफी लोकप्रिय है। सवाल- क्रिएटिन का हमारे शरीर में क्या काम है? जवाब- क्रिएटिन का मुख्य काम हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट के दौरान मसल्स तक जल्दी एनर्जी पहुंचाना है। क्रिएटिन ATP बनाने में मदद करता है। ATP मसल्स को एनर्जी देता है। इसका मतलब है कि जब शरीर में क्रिएटिन होगा तो मांसपेशियां अच्छे से काम करेंगी, ज्यादा वजन उठाएंगी और एक्टिव रहेंगी। ग्राफिक में शरीर में क्रिएटिन का काम देखिए- सवाल- शरीर को डेली कितने क्रिएटिन की जरूरत होती है? जवाब- डॉ. रोहित शर्मा के मुताबिक, शरीर को डेली करीब 1-2 ग्राम क्रिएटिन की जरूरत होती है। सवाल- अगर शरीर में क्रिएटिन न हो या कम हो तो उससे क्या नुकसान होता है? जवाब- क्रिएटिन की कमी से ये समस्याएं हो सकती हैं- सवाल- क्रिएटिन शरीर खुद बनाता है या यह फूड सोर्स से मिलता है? जवाब- शरीर में मौजूद क्रिएटिन का करीब आधा हिस्सा डाइट से मिलता है। बाकी हिस्सा लिवर, किडनी और पैंक्रियाज में प्राकृतिक रूप से बनता है। शरीर में मौजूद क्रिएटिन का लगभग 95% हिस्सा स्केलेटल मसल्स (हडि्डयों से जुड़ी हुई मांसपेशियां) में स्टोर होता है। बाकी हिस्सा हार्ट, ब्रेन और दूसरे टिश्यूज में होता है। सवाल- खाने-पीने की किन चीजों में क्रिएटिन होता है? जवाब- क्रिएटिन मुख्य रूप से एनिमल-बेस्ड फूड्स में पाया जाता है। ग्राफिक में फूड सोर्स देखिए- सवाल- क्या सिर्फ फूड से क्रिएटिन की जरूरत पूरी हो सकती है? जवाब- आमतौर पर क्रिएटिन की जरूरत का कुछ हिस्सा फूड से पूरा हो सकता है। मांस–मछली जैसे फूड क्रिएटिन का अच्छा सोर्स हैं। इसलिए हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए क्रिएटिन सप्लीमेंट लेना जरूरी नहीं है। हालांकि प्लांट-बेस्ड फूड्स में क्रिएटिन की मात्रा न के बराबर होती है। इसलिए जिम जाने वाले शाकाहारी लोगों को सप्लीमेंट की जरूरत हो सकती है। सवाल- लोग क्रिएटिन सप्लीमेंट क्यों लेते हैं? शरीर को कब इसकी जरूरत पड़ती है? जवाब- जब शरीर की क्रिएटिन की जरूरत भोजन और शरीर में बनने वाली मात्रा से पूरी नहीं हो पाती, तब लोग क्रिएटिन सप्लीमेंट लेते हैं। इसकी जरूरत आमतौर पर एथलीट्स और हैवी वर्कआउट करने वालों को होती है। ग्राफिक में क्रिएटिन सप्लीमेंट लेने के सभी कारण देखिए- सवाल- डॉक्टर किन लोगों को क्रिएटिन सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं? जवाब- डॉक्टर सेहत, डाइट और एक्सरसाइज को देखते हुए कुछ लोगों को ये सप्लीमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं, जैसेकि- सवाल- क्रिएटिन सप्लीमेंट लेने का सही तरीका क्या है? जवाब- यह व्यक्ति की सेहत और जरूरत पर निर्भर करता है। इसलिए सप्लीमेंट शुरू करने से पहले हेल्थकेयर प्रोफेशनल से सलाह लेनी चाहिए। सवाल- क्या क्रिएटिन सप्लीमेंट के कोई साइड इफेक्ट भी हैं? जवाब- क्रिएटिन एक सेफ सप्लीमेंट है। हालांकि ज्यादा या गलत इस्तेमाल पर कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जैसेकि- सवाल- किन लोगों को क्रिएटिन सप्लीमेंट नहीं लेना चाहिए? जवाब- कुछ लोगों को क्रिएटिन सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। ग्राफिक में देखिए, किन्हें यह सप्लीमेंट नहीं लेना चाहिए- सवाल- क्रिएटिन सप्लीमेंट लेते समय किन बाताें का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- क्रिएटिन शुरू करने से पहले अपनी सेहत और जरूरत को ध्यान में रखना जरूरी है। ग्राफिक में जरूरी सावधानियां देखें- सवाल- क्या डॉक्टर की सलाह के बिना अपने मन से ये सप्लीमेंट ले सकते हैं? जवाब- नहीं, क्रिएटिन सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर या हेल्थकेयर प्रोफेशनल से सलाह लेनी चाहिए। वे आपकी सेहत और जरूरत के अनुसार इसकी सही मात्रा और इस्तेमाल का तरीका बताते हैं। सवाल- क्या दूसरे मेडिकेशन के साथ क्रिएटिन सप्लीमेंट ले सकते हैं? जवाब- अगर आप कोई दवा, विटामिन या अन्य सप्लीमेंट लेते हैं, तो क्रिएटिन शुरू करने से पहले डॉक्टर को इसकी जानकारी दें। डॉक्टर आपकी दवाओं और हेल्थ कंडीशन के आधार पर सही सलाह देते हैं। सवाल- रेगुलर क्रिएटिन सप्लीमेंट लेने वालों को डोज बंद करने पर क्या साइड इफेक्ट दिख सकते हैं? जवाब- क्रिएटिन बंद करने के बाद शरीर में क्रिएटिन का लेवल अगले कुछ हफ्तों में धीरे-धीरे कम हो सकता है। इस दौरान कुछ लोगों में ये समस्याएं हो सकती हैं- ************** ग्राफिक्स- महेंद्र वर्मा ……………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- क्या आपके भोजन में विटामिन-P है: इससे खाना अच्छे से पचता और शरीर में लगता है, फूड में विटामिन-P बढ़ाने के 10 टिप्स न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स ‘विटामिन P’ (प्लेजर) यानी भोजन से मिलने वाली खुशी को भी हेल्दी ईटिंग का अहम हिस्सा मानते हैं। साल 2020 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक रिव्यू में 100 से ज्यादा स्टडीज को एनालाइज किया गया। रिव्यू में शामिल 57% स्टडीज में पाया गया कि जो लोग खाने का आनंद लेते हैं, उनमें हेल्दी ईटिंग की आदतें भी बेहतर होती हैं। पूरी खबर पढ़ें…
मेंटल हेल्थ- रात होते ही एक्टिव होता दिमाग:नींद नहीं आती, ऑफिस से लेकर भविष्य और मौत तक की चिंता सताती है, क्या करूं
सवाल– मैं 34 साल की हूं और एक आईटी कंपनी में काम करती हूं। दिन भर तो मैं ऑफिस के कामों में व्यस्त रहती हूं, लेकिन जैसे ही रात में बिस्तर पर जाती हूं, मेरा दिमाग सुपर एक्टिव हो जाता है। दिमाग में दिन भर की बातें घूमने लगती हैं। कौन-सा काम अधूरा रह गया, बॉस ने क्या कहा, कल क्या करना है। यहां तक कि नई-पुरानी जाने कहां-कहां की बातें आने लगती हैं। किसी इनविजिबल फ्यूचर और मौत तक का डर सताने लगता है। मैं चाहकर भी अपने दिमाग को रोक नहीं पाती और इन्हीं सबके बारे में सोचती रहती हूं। कई बार दो-तीन घंटे तक नींद नहीं आती। क्या ये स्ट्रेस है या किसी मेंटल हेल्थ इशु के कारण है? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। रात में सोने के समय दिमाग में तरह–तरह के विचार आना काफी कॉमन है। दिनभर हमारा दिमाग काम में बिजी होता है। ईमेल, मीटिंग, फोन, डेडलाइन और छोटे-बड़े फैसले ब्रेन को लगातार सक्रिय रखते हैं। यानी शरीर भले ही थक रहा हो, दिमाग को रुकने का मौका नहीं मिलता। फिर रात में काम खत्म होता है और हम बिस्तर पर पहुंचते हैं। तब बाहर की हलचल तो थम जाती है, लेकिन दिमाग इतनी जल्दी शांत नहीं होता। दिन भर जिन बातों पर ध्यान देने का समय नहीं मिला, वे एक-एक करके याद आने लगती हैं। रात में ब्रेन ओवरएक्टिव होने के पीछे ये संभावित कारण हो सकते हैं– रात में कौन से विचार आते हैं? रात के समय ब्रेन में दो तरह की चीजें एक्टिव हो सकती हैं– 1. बार-बार पुरानी बातों को दोहराना बार–बार पुरानी या एक ही तरह की बातों को दोहराते रहने को रुमिनेशन कहते हैं। मसलन— 2. भविष्य की चिंता करना यह चिंता है। इसमें दिमाग बार-बार भविष्य की संभावित परेशानियों के बारे में सोच–सोचकर परेशान होता है, जैसेकि– रुमिनेशन और चिंता, दोनों मिलकर दिमाग को लगातार सक्रिय रख सकते हैं। इसका संबंध एंग्जाइटी, डिप्रेशन या इंसोम्निया के साथ भी देखा गया है। लेकिन सिर्फ ज्यादा सोचने का मतलब कोई मानसिक बीमारी होना नहीं है। जितना रोकेंगे, विचार उतने ही ज्यादा आएंगे मान लीजिए कोई आपसे कहे कि अगले एक मिनट तक गुलाबी हाथी के बारे में बिल्कुल मत सोचिए। संभव है कि सबसे पहले आपके दिमाग में गुलाबी हाथी ही आए। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि विचार को रोकने के लिए दिमाग बार-बार जांचता है कि कहीं वही विचार तो नहीं आ रहा। इससे वह विचार और ज्यादा सक्रिय हो सकता है। यही बात रात में भी हो सकती है। आप खुद से कहें– “मुझे बिल्कुल नहीं सोचना है। मुझे अभी सोना है।” लेकिन दिमाग उसी विचार की निगरानी करने लगता है। इसलिए विचारों से लड़ने की बजाय उन्हें पहचानना बेहतर है। खुद से कहें— “मेरे दिमाग में यह विचार आया है। मुझे इसे अभी हल करने की जरूरत नहीं है।” क्या यह OCD (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) है? सिर्फ बार-बार सोचने का मतलब OCD नहीं है। OCD में विचार अक्सर व्यक्ति की इच्छा के खिलाफ आते हैं। वे परेशान करने वाले होते हैं और व्यक्ति को उनसे छुटकारा पाने या पूरी तरह आश्वस्त होने की जरूरत महसूस हो सकती है। इसके बाद व्यक्ति कुछ काम बार-बार कर सकता है, जिसे कंपल्शन कहते हैं। ये दो तरह के हो सकते हैं— फिजिकल कंपल्शन जैसेकि बार-बार हाथ धोना, ताला चेक करना, चीजों को खास तरीके से लगाना या बार-बार वापस जाकर देखना। मेंटल कंपल्शन जैसेकि मन–ही–मन गिनती करना, किसी शब्द या प्रार्थना को दोहराना, पुरानी घटना को बार-बार याद करके जांचना या अपनी भावनाओं को बार-बार परखना। मेंटल कंपल्शन बाहर से दिखाई नहीं देते। लेकिन इनमें भी काफी समय जा सकता है। OCD में इन कामों से थोड़ी देर के लिए राहत मिलती है। फिर वही संदेह या बेचैनी वापस आ सकती है। ये ओवरथिंकिंग है या OCD करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। पिछले दो हफ्तों को ध्यान में रखकर नीचे दिए सवालों का जवाब दें। नीचे ग्राफिक्स में दो सेक्शन में कुल 10 सवाल हैं। पहले सेक्शन में ‘ओवरस्टिमुलेशन और रूमिनेशन’ से जुड़े सवाल हैं और दूसरे सेक्शन में OCD से जुड़े सवाल हैं। आपको इन सवालों को 0 से 3 के स्केल पर रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए अगर आपका जवाब 'कभी नहीं' है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब 'लगभग हर दिन' है तो 3 नंबर दें। अंत में अपना स्कोर टोटल करें। नीचे ग्राफिक के बाद स्कोर की एनालिसिस देखें। स्कोर इंटरप्रिटेशन सेक्शन A में अगर स्कोर 9 या उससे ज्यादा है तो इसका मतलब है कि ओवरस्टिमुलेशन और रूमिनेशन मुख्य समस्या हो सकती है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। सेक्शन B में अगर सवाल 8 और 10 का अंक 2 या 3 है तो OCD (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) मुख्य समस्या हो सकती है। नींद पर असर कितना गंभीर? अगर रात में ये चीजें हो रही हैं तो इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है– ऐसे में आप 14 दिन की स्लीप डायरी बनाएं और उसमें रोज लिखें— साथ ही ये बातें समझना भी जरूरी है– रात में ब्रेन को शांत करने के 6 स्टेप्स 1. सोने से 2 घंटा पहले काम बंद करें काम खत्म करते समय एक छोटी-सी सूची बनाएं— इससे दिमाग को यह भरोसा मिलता है कि कोई जरूरी बात भूली नहीं है। उन्हें लिख लिया गया है। 2. सोने से पहले 45-60 मिनट का शांत समय रखें इस दौरान ऑफिस का काम, ईमेल और बहुत ज्यादा उत्तेजित करने वाली स्क्रीन गतिविधियों से दूर रहें। दिमाग को काम से आराम की स्थिति में आने का समय दें। 3. सोचने, चिंता करने का टाइम फिक्स करें शाम को करीब 20 मिनट का समय “सोचने के लिए” फिक्स करें। अपनी हर चिंता के बारे में खुद से पूछें— क्या यह ऐसी समस्या है, जिसे मैं अभी हल कर सकती हूं? अगर हां, तो एक छोटा कदम तय करें। अगर यह सिर्फ “अगर ऐसा हो गया तो?” वाली चिंता है तो उसे लिख लें और उस समय आगे न बढ़ाएं। रात में खुद से कहें— “यह बात मैंने लिख ली है। इसे अभी हल करने की जरूरत नहीं है।” 4. विचार आए तो उसे पहचानें दिमाग में विचार आते ही खुद से कहें— “मेरा दिमाग मीटिंग को दोबारा चला रहा है।” या “यह भविष्य की चिंता है।” अपने विचार को रोकने की कोशिश न करें। उसे पहचानें और अपना ध्यान धीरे से वर्तमान में वापस लाएं। 5. बिस्तर को चिंता की जगह न बनाएं बिस्तर पर तभी जाएं, जब नींद आने लगे। अगर काफी देर तक नींद नहीं आ रही, तो बिस्तर से उठकर हल्की रोशनी वाली जगह पर शांत काम करें। नींद आने लगे तो वापस बिस्तर पर जाएं। बार-बार घड़ी न देखें। इससे नींद को लेकर चिंता बढ़ सकती है। 6. नींद की बुनियादी आदतें सुधारें डॉक्टर से कब मिलना चाहिए? अगर नींद की समस्या कई महीनों से बनी हुई है और काम या रिश्तों पर असर पड़ रहा है तो मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक की सलाह लें। अंतिम बात हमारा लक्ष्य दिमाग को पूरी तरह खाली करना नहीं है। विचार आना सामान्य है। हमें यह सीखना है कि हर विचार को खींचना या पकड़कर उसका विश्लेषण करने लगना जरूरी नहीं है। विचारों को आने दें, उन्हें पहचानें और फिर उन्हें जाने दें। *************** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ……………………… मेंटल हेल्थ की ये खबर भी पढ़िए मेंटल हेल्थ- बॉयफ्रेंड ने बिना कारण बताए ब्रेकअप कर लिया: तब से डिप्रेशन में हूं, उसे भूल नहीं पा रही, जिंदगी में आगे कैसे बढूं तीन साल का रिश्ता खत्म होने पर दुख होना स्वाभाविक है। यह किसी बेहद अपने को खोने जैसा अनुभव हो सकता है। इसके बाद मन में खालीपन, उदासी और बहुत सारे सवाल भी आ सकते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
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