क्या सच में टल जाएगा भारत-अफगानिस्तान का पहला टी20 मैच? या फिर इन शर्तों और नियमों के साथ खेला जाएगा मुकाबला
IND vs AFG : भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का आगाज होने वाला है. 13 सितंबर से लेकर 17 सितंबर तक इन दोनों टीमों के बीच 3 टी20 मैच दिल्ली के अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाएंगे. इस सीरीज का पहला टी20 मैच 13 सितंबर को दिल्ली में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेला जाने वाला है. इस मैच की शुरुआत शाम 7 बजे से होने वाली थी. इस मैच पर बीती रात खबर आई थी कि, भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाला मैच पहला टी20 मैच पोस्टपोन हो सकता है. अब सवाल उठता है कि, क्या ये मैच सच में टल जाएगा. आइए जानते हैं.
Abhishek Sharma ???? Shivam Dube ????
— BCCI (@BCCI) September 10, 2026
Who wins the ???????????????????? ???????? ???????????? '????????????????' ????????????? ????#TeamIndia | @OfficialAbhi04 | @IamShivamDube pic.twitter.com/pnCK1gqx63
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परमाणु ताकत में भारत की बड़ी छलांग! 30 नए परमाणु हथियारों की रिपोर्ट ने बढ़ाई दुनिया की नजर
India nuclear missile: अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था 'फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स' (FAS) ने भारत के परमाणु हथियारों को लेकर अपना ताजा आकलन जारी किया है. इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास इस समय लगभग 190 असेंबल किए गए परमाणु हथियार मौजूद हैं. इनमें से 160 से अधिक हथियार ऐसी मिसाइलों और डिलीवरी प्रणालियों से जुड़े हैं जो पूरी तरह से सक्रिय हैं. चूंकि दुनिया का कोई भी परमाणु शक्ति संपन्न देश अपने हथियारों का सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं करता, इसलिए खुले स्रोतों और उपग्रह तस्वीरों पर आधारित इस तरह के बाहरी आकलन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं.
भविष्य के डिलीवरी सिस्टम और अतिरिक्त हथियार
रिपोर्ट में एक खास बात यह सामने आई है कि भारत के पास तैनात लॉन्चरों की तुलना में हथियारों की कुल संख्या थोड़ी अधिक है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह अतिरिक्त हथियार उन नई मिसाइलों के लिए तैयार रखे गए हैं जो अभी विकास या उत्पादन के चरण में हैं. इनमें आधुनिक अग्नि-प्राइम और समुद्र से दागी जाने वाली लंबी दूरी की के-4 मिसाइलें शामिल हैं. सैन्य रणनीतिकारों का मानना है कि डिलीवरी सिस्टम के सेना में पूरी तरह शामिल होने से पहले ही हथियार तैयार कर लेना एक बेहद व्यावहारिक और योजनाबद्ध कदम है. जब भी नई मिसाइलें या प्लेटफॉर्म सेवा में आते हैं, तो उनके लिए हथियार तुरंत उपलब्ध रहने से देश की सुरक्षा क्षमता बिना किसी देरी के मजबूत होती है. यह प्रक्रिया किसी अव्यवस्था का संकेत नहीं है, बल्कि दुनिया के कई प्रमुख देशों द्वारा अपनाई जाने वाली एक सामान्य रणनीति है.
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संयम और जिम्मेदारी पर आधारित भारत की नीतियां
परमाणु हथियारों के भंडार में हो रही निरंतर प्रगति के बावजूद, रिपोर्ट इस बात को रेखांकित करती है कि भारत अपने बुनियादी सिद्धांतों पर मजबूती से कायम है. भारत आज भी अपनी 'नो-फर्स्ट-यूज' यानी पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल न करने की नीति पर पूरी निष्ठा से चल रहा है. इसका स्पष्ट अर्थ है कि भारत इन हथियारों का प्रयोग केवल उसी स्थिति में करेगा जब उस पर कोई दुश्मन देश परमाणु हमला करेगा. इसके साथ ही भारत ने 1998 के परीक्षणों के बाद से स्वयं घोषित परमाणु परीक्षण रोक को भी जारी रखा है. जहां कई देश अपनी परमाणु क्षमता बढ़ते ही अपनी नीतियों को अधिक आक्रामक बना लेते हैं, वहीं भारत का यह संयमित रुख उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक जिम्मेदार और परिपक्व परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित करता है.
भारत की परमाणु रणनीति का मुख्य आधार 'विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता' बनाए रखना है. इसका मतलब जरूरत से ज्यादा हथियारों का अंबार लगाना नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए पर्याप्त और अचूक तैयारी रखना है. भारत जमीन, हवा और समुद्र तीनों माध्यमों से हमला करने की अपनी क्षमता को लगातार आधुनिक बना रहा है. अग्नि-प्राइम जैसी मोबाइल मिसाइलें और के-4 जैसी पनडुब्बी आधारित मिसाइलें भारत की सुरक्षा परत को और अधिक अभेद्य बनाती हैं. आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे यह नए डिलीवरी प्लेटफॉर्म भारतीय सशस्त्र बलों का हिस्सा बनेंगे, देश का सामरिक संतुलन और अधिक स्पष्ट तथा प्रभावी होता जाएगा.
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