फाइन डाइनिंग को अलविदा:स्टार शेफ ग्लैमरस मेन्यू छोड़कर खोल रहे मोहल्ला ढाबा; जहां जेब पर बोझ कम और जायका पुराना
रेस्टोरेंट इंडस्ट्री करवट ले रही है। जो शेफ पहले महंगे वैगू स्टेक और दुर्लभ मसालों से सजी थ्री-मिशेलिन-स्टार व्यंजन तैयार करते थे, वही अब सस्ती डिश परोसकर मोहल्ले का पसंदीदा अड्डा बनना चाह रहे हैं। अमेरिका में महंगाई से जूझते ग्राहकों को लुभाने के लिए बड़े नामी शेफ भी स्टेक फ्राइट्स, चिकन पार्म और सादी पिज्जा-पास्ता की ओर लौट रहे हैं। ब्लूमबर्ग ने एक रिपोर्ट में न्यूयॉर्क के मशहूर रेस्टोरेंट एलेवन मैडिसन पार्क के शेफ डैनियल के हवाले से लिखा, ‘हम थ्री-स्टार फ्लैगशिप से ब्रेक लेकर वेस्ट विलेज में एक कैजुअल डाइनिंग स्पेस खोल रहे हैं।’ साउथ कैरोलिना के शेफ जो कैश, जिन्होंने 2022 में महंगे रेस्टोरेंट ‘स्काउंड्रल’ की शुरुआत की थी, दादी के नाम पर किफायती 77-सीटर इटैलियन-अमेरिकी जॉइंट ‘डूट्सीज’ खोल रहे हैं। ग्लैमर से बाहर निकल रहे नामी-गिरामी शेफ, जेब पर बोझ कम, पर जायका वही पुराना और भरोसेमंद सादा मेन्यू - ‘नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन’ के मुताबिक, फरवरी 2020 से मई 2026 के बीच रेस्टोरेंट मेन्यू के दाम करीब 36% बढ़ चुके हैं। बावजूद इसके पिछले साल 42% ऑपरेटर मुनाफा नहीं कमा सके। ऐसे में सादा मेन्यू शेफ के लिए भी फायदे का सौदा है। आटा और पानी जैसी सस्ती चीजों से बनने वाला पास्ता, महंगे मीट और बड़े स्टाफ वाले फाइन-डाइनिंग मॉडल से कहीं सस्ता पड़ता है। यह ट्रेंड सिर्फ न्यूयॉर्क तक सीमित नहीं है। न्यू ऑरलिंस में जस्टिन और मिया डेविलियर ‘डॉटर्स नेबरहुड इटैलियन’ खोल रहे हैं, जो टेस्टिंग मेन्यू और तड़क-भड़क वाले टेबलसाइड शो से थके ग्राहकों के लिए है। अपनापन की छौंक - चार्ल्सटन में शेफ जॉनी होआंग का कहना है कि लोग अब ऐसी जगह चाहते हैं, जहां स्टाफ को पहचानें और नियमित ग्राहक बन सकें। वॉशिंगटन डीसी में मिशेलिन-स्टार शेफ माइकल रफीदी वुड-फायर्ड पिज्जा (करीब 30 डॉलर) के साथ ‘बिजेरिया’ खोल रहे हैं, ताकि आम लोगों तक अच्छा खाना पहुंच सके। पारिवारिक नुस्खे - टेक्सास के मिडलैंड में शेफ डेविड रूल पारिवारिक नुस्खों पर दांव लगा रहे हैं। 130-सीटर ‘मिली लेह्स’ में स्क्रैच से बनी बिस्किट और फ्राइड चिकन जैसी सदर्न डिशेज मिलेंगी। यहां औसत बिल सिर्फ 50 डॉलर (4,724 रुपए) है। कैलिफोर्निया में शेफ फ्लॉयड नन, जिन्होंने थ्री-मिशेलिन-स्टार किचन में काम किया है, अब सैन फ्रांसिस्को में सीफूड रेस्टोरेंट ‘मूनचाइल्ड’ खोल रहे हैं, जहां बड़ा बार सेक्शन ग्राहकों को कम कीमत में ड्रिंक-स्नैक का विकल्प देगा। तनाव में कम्फर्ट - रेस्टोरेंटर मैक्स आरोन्सन का कहना है कि महंगाई के अलावा एआई से नौकरी जाने की चिंता और राजनीतिक माहौल की उठापटक के बीच लोग अब ‘कम्फर्ट फूड’ और अपनापन चाहते हैं। यही वजह है कि इस बार अमेरिका के टॉप शेफ भी ग्लैमरस मेन्यू छोड़कर मोहल्ले के ढाबे का मॉडल अपना रहे हैं, जहां जेब पर बोझ कम हो और जायका वही पुराना हो। करिअर 360 डिग्री घूमकर वापस पुराने मोहल्ले में आया न्यूयॉर्क के ‘द एस्टर’ में औसत बिल 75 डॉलर (7,087 रुपए) होगा, जबकि शेफ की पिछली जगह ‘कैफे कार्मेलिनी’ में अकेली एक डिश की कीमत ही इतनी थी। जर्सी सिटी के कोरियाई रेस्टोरेंट ‘डूबू हाना’ में घर जैसा खाना सिर्फ 40 डॉलर (3,780 रुपए) में मिलेगा। ब्रुकलिन के फ्रेंच बिस्ट्रो ‘पारी’ में 64 सीटें पेरिस के वाइन बार जैसे माहौल में सजाई जाएंगी। शेफ जॉन फ्रेजर का 35-सीटर ‘ओनदीन’ उसी पते पर खुल रहा है, जहां उन्होंने 2003 में अपनी पहली हेड-शेफ नौकरी की थी। यानी करिअर पूरा (360 डिग्री) घूमकर वापस उसी मोहल्ले में आ गया है।
एजीआई और सुपरइंटेलिजेंस से देश की संप्रभुता को खतरा, भारत को बनाना होगा दुनिया का पहला एजेंटिक एआई कानून : पवन दुग्गल
नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट के वकील और साइबर विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने एआई के भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आने वाले 2-3 साल भारत और पूरी दुनिया के लिए सबसे अहम होने वाले हैं, क्योंकि एआई अब इंसानी दिमाग से आगे निकलने की तैयारी में है। अगर अभी से इस पर सख्त कानून और सुरक्षा के नियम नहीं बनाए गए, तो यह तकनीक देश की सुरक्षा और लोगों के अधिकारों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
पवन दुग्गल ने कहा, एआई हमारी सोच से कहीं ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रहा है। सैम ऑल्टमैन पहले ही बता चुके हैं कि सिंगुलैरिटी का कुछ हिस्सा हासिल हो चुका है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने इंसानी इंटेलिजेंस के कुछ हिस्सों को पीछे छोड़ दिया है। इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत में एजीआई यानी आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस आ सकता है और अगले 2-3 सालों में सुपरइंटेलिजेंस आने की संभावना है, ऐसे में हमारे सामने बहुत बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा, एक बार एजीआई आ जाए, तो आप इससे संबंधित कोई मॉडल बना पाते हैं या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। जो दांव पर लगा है और जो चुनौती है, वह एक देश के तौर पर आपकी संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता है। सुपरइंटेलिजेंस वह इंटेलिजेंस होगी जो इस रेस में पूरी मानवता की इंटेलिजेंस को पीछे छोड़ देगी। जब एलन मस्क कहते हैं कि एआई मानवता के लिए खतरा है, तो वह गलत नहीं हैं। इसलिए एआई, एजीआई और सुपरइंटेलिजेंस पर सुरक्षा आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है और भारत सरकार को इसे प्राथमिकता में रखते हुए आगे बढ़ना होगा।
पवन दुग्गल ने कहा कि भारत कोई सामान्य देश नहीं है। हम न सिर्फ दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, बल्कि सबसे ज्यादा आबादी वाला देश भी हैं। इसलिए आज हम जो करेंगे, वह पूरी दुनिया और खासतौर पर ग्लोबल साउथ के लिए एक बेंचमार्क बनेगा। भारत को एआई के लिए अलग और समर्पित कानूनी नियम बनाना शुरू करना चाहिए। क्योंकि भारत में लोग तभी काम करते हैं, जब किसी जरूरी काम के पीछे कानून की ताकत हो। जो चीजें सिर्फ सिफारिश या स्वैच्छिक होती हैं, वे अक्सर जमीन पर नहीं उतरतीं।
पवन दुग्गल ने कहा, दुनिया में किसी भी देश ने अब तक एजेंटिक एआई पर कानून नहीं बनाया है। सिंगापुर ने जनवरी में एजेंटिक एआई को लेकर गाइडलाइंस जारी की हैं, लेकिन वे सिर्फ स्वैच्छिक हैं। ऐसे में एआई को रेगुलेट करने के लिए भारत जो भी बेंचमार्क तय करेगा, वही ग्लोबल साउथ के लिए लागू होने वाले मानक बन सकते हैं। हम सभी ने 1948 की मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के बारे में सुना है, लेकिन अब वह समय आ गया है, जब हमें यह समझना होगा कि इंसानों के एआई के खिलाफ भी अधिकार हैं, ताकि एआई को अधिक जवाबदेह बनाया जा सके।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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