बॉम्बे और कराची के हलवे का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मुंह में पानी आने लगता है। यह चमकीला रबर की तरह खिंचने वाला और मुंह में घुल जाने वाला होता है। बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी को यह बहुत पसंद आता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि इसको घर में बनाना काफी मुश्किल है और यह बाजार जैसा नहीं बनेगा। लेकिन आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इसकी आसान रेसिपी के बारे में बताने जा रहे हैं। ऐसे में आप भी पहली बार में एकदम हलवाई जैसा हलवा बना सकती हैं।
सामग्री
कॉर्नफ्लोर - आधा कप
चीनी - डेढ़ कप
देसी घी - एक चौथाई कप
पानी - 2 कप
नींबू का रस - 1 छोटी चम्मच
फूड कलर - 2 चुटकी (ऑरेंज, लाल या हरा - जो आपको पसंद हो)
कटे हुए मेवे - 2-3 बड़े चम्मच (काजू, बादाम, मगज के बीज)
इलायची पाउडर - आधा छोटा चम्मच
ऐसे बनाएं बॉम्बे-कराची हलवा
सबसे पहले एक बड़े बाउल में आधा कप कॉर्नफ्लोर लें। फिर इसमें एक कप पानी डालकर इसको अच्छे से मिक्स करें। ध्यान रखें कि इसमें कोई गांठ न हो। फिर गैस पर एक भारी तली वाली कड़ाही रखें। अब इसमें एक कप पानी और डेढ़ कप चीनी डालें। गैस की आंच को मीडियम रखें और चीनी को पानी में पूरी तरह से घुलने दें। इसमें ताल वाली चाशनी नहीं बननी चाहिए। बस चीनी को पिघलाकर पानी में एक उबाल लाना है।
जैसे ही चाशनी उबलने लगे, इसमें 1 चम्मच नींबू का रस मिला दें। नींबू का रस चीनी को जमने से रोकता है और हलवे में भी मार्केट जैसी चमक लाता है। फिर गैस को स्लो करें और कॉर्नफ्लोर वाले घोल को चम्मच से चलाकर धीरे-धीरे कढ़ाही में डालते जाएं। वहीं दूसरे हाथ से इसको लगातार चलाते जाएं, जिससे कि इसमें गांठ न पड़े। कुछ ही मिनटों में मिश्रण गाढ़ा और जेली जैसा हो जाएगा।
इस दौरान इसको चलाते रहना जरूरी है, वरना यह जल भी सकता है। जह हलवा गाढ़ा होने लगे, तो इसमें एक-एक चम्मच करके देसी घी डालें। एक चम्मच घी डालें और उसको पूरी तरह से हलवे मिक्स होने दें और फिर दूसरा चम्मच घी डालें। इससे हलवा चिपकेगा नहीं और हलवे को शानदार चमक मिलेगी। जब हलवा सारा घी सोख लेगा, तो थोड़े से पानी में घोलकर अपना मनपसंद फूड कलर डालें। इसके साथ ही बारीक कटे ड्राई फ्रूट्स और इलायची पाउडर डालकर अच्छे से मिक्स करें।
जब हलवे का मिश्रण कड़ाही के किनारों को छोड़ने लगे और एक जगह पर एकत्र होने लगे, तो गैस को पूरी तरह से बंद कर दें। फिर एक ट्रे में थोड़ा सा घी लगाकर इसको चिकना कर दें। अब कढ़ाही से गरमागरम मिश्रण को ट्रे में निकालकर बराबर फैला दें। इसके ऊपर से थोड़े ड्राई फ्रूट्स सजा दें। इसको कमरे के तापमान पर 2 से 3 घंटे के लिए सेट होने का छोड़ दें। जब यह अच्छे से सेट हो जाए, तो चाकू से अपने मनचाहे आकार में काट लें।
जानें हलवा न बिगड़ने के खास टिप्स
यह हलवा बनाते समय गैस की आंच को शुरू से लेकर लास्ट तक स्लो रखना है। तेज आंच पर कॉर्नफ्लोर कच्चा रह जाएगा और इसका स्वाद बिगड़ जाएगा।
इस रेसिपी में सबसे ज्यादा मेहनत आपके हाथों की हैं। आपको लगातार इसको चलाते रहना है, तभी हलवा रबर जैसा लचीला और मुलायम बनेगा।
घी को इसमें थोड़ा-थोड़ा करके ही डालें। इससे हलवा घी को अंदर तक अच्छे से सोख लेता है और उसका टेक्सचर सही आता है।
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ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में चैटजीपीटी का अगला रूप व्यक्ति की अनुमति से उसके कंप्यूटर पर चल रही गतिविधियों, बैठकों और बातचीत को समझकर काम में मदद कर सकता है।
हाल ही में जेड फेलोज के संस्थापक कोरी लेवी के साथ बातचीत में ऑल्टमैन से पूछा गया कि ऐसा सहायक कब वास्तव में उपयोगी हो सकता है। उन्होंने करीब छह महीने का अनुमान दिया। हालांकि, यह किसी नए उत्पाद की घोषणा या तय समयसीमा नहीं है। ऑल्टमैन ने न तो किसी खास उत्पाद का नाम बताया है और न ही इसकी शुरुआत की तारीख की पुष्टि की है।
ऑल्टमैन के मुताबिक, भविष्य का ऐसा सहायक उपयोगकर्ता की अनुमति से कंप्यूटर की स्क्रीन देख सकता है, बैठकों में मौजूद रह सकता है और बातचीत को दर्ज कर सकता है। इसके अलावा उसे ईमेल, संदेश, दस्तावेज और स्लैक जैसी सेवाओं से भी जोड़ा जा सकेगा। इसका मकसद व्यक्ति की जगह फैसले लेना नहीं, बल्कि उसके साथ काम करते हुए जरूरी जानकारी और संदर्भ उपलब्ध कराना होगा।
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति ग्राहक के लिए बिक्री प्रस्ताव तैयार कर रहा है या किसी योजना पर काम कर रहा है, तो सहायक उसके पास मौजूद दूसरी जानकारियों को देखते हुए सुझाव दे सकता है। वह किसी संभावित गलती की ओर ध्यान दिलाने या कोई काम पूरा करने में मदद कर सकता है। ऑल्टमैन का मानना है कि अगली पीढ़ी के मॉडल के बाद ऐसी व्यवस्था काफी उपयोगी हो सकती है।
गौरतलब है कि एआई में लगातार संदर्भ बनाए रखने की दिशा में पहले से काम चल रहा है। चैटजीपीटी में स्मृति जैसी सुविधा मौजूद है, जिसके जरिए पिछली बातचीत से जुड़ी कुछ जानकारियों का इस्तेमाल जवाबों को अधिक उपयोगी बनाने के लिए किया जा सकता है। उपयोगकर्ता अपनी स्मृति और बातचीत से जुड़ी सेटिंग को नियंत्रित भी कर सकते हैं।
माइक्रोसॉफ्ट ने भी स्क्रीन आधारित सहायक की दिशा में काम किया है। उसके विंडोज कंप्यूटरों में रिकॉल नाम की सुविधा के जरिए स्क्रीन की गतिविधियों के चित्र सुरक्षित किए जा सकते हैं। कंपनी के अनुसार यह सुविधा उपयोगकर्ता की सहमति पर आधारित है और इसमें जानकारी को रोकने, हटाने तथा रिकॉर्ड होने वाली सामग्री को नियंत्रित करने के विकल्प दिए गए हैं।
हालांकि, ऐसे सहायक के साथ निजता और सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होगी। किसी व्यक्ति की स्क्रीन, ईमेल, बैठक और निजी बातचीत तक पहुंच रखने वाली तकनीक में यह बेहद जरूरी होगा कि उपयोगकर्ता को साफ तौर पर पता हो कि कौन-सी जानकारी देखी जा रही है और उसका इस्तेमाल किस तरह हो रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सैम ऑल्टमैन का छह महीने वाला अनुमान केवल संभावित समय है, आधिकारिक घोषणा नहीं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि ओपनएआई भविष्य में इस तकनीक को किस रूप में पेश करता है और उपयोगकर्ताओं को अपनी जानकारी पर कितना नियंत्रण देता है।
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