रूना खान रैमन मैग्सेसे अवार्ड 2026 से सम्मानित:तैरता हुआ अस्पताल; चलता-फिरता स्कूल बनाया, हर साल 75 लाख लोगों को दे रहीं सेवाएं
बांग्लादेश की सामाजिक उद्यमी और मानवतावादी रूना खान का नाम 2026 के रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया है। यह घोषणा 31 अगस्त 2026 को मनीला में की गई। यह अवार्ड उन्हें 15 नवंबर को मनीला, फिलीपींस में आयोजित समारोह में दिया जाएगा। रूना खान को पहले भी अशोका फैलोशिप, रोलेक्स अवार्ड और श्वाब फाउंडेशन जैसे सम्मान मिल चुके हैं। दूसरी जगह ले जाए जाने वाले स्कूल बनवाए रूना खान ने उन लोगों तक अस्पताल पहुंचाया जिनके गांव तक सड़क नहीं पहुंचती थी। नदी के कटाव से प्रभावित बच्चों के लिए ऐसे स्कूल बनाए जिन्हें जरूरत पड़ने पर दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। रूना ने जलवायु परिवर्तन से प्रभावित और गरीब लोगों तक स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी जरूरी सुविधाएं पहुंचाने का काम किया। रूना खान बांग्लादेश की सामाजिक, मानवतावादी और लेखिका हैं। वह Friendship नाम की सामाजिक संस्था की संस्थापक और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। यह संस्था स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु, रोजगार, आपदा प्रबंधन, नागरिक अधिकार और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे कई क्षेत्रों में काम कर रही है। नाव को बनाया अस्पताल रूना खान की सबसे खास पहल तैरता हुआ अस्पताल है। उन्होंने एक पुराने जहाज को अस्पताल में बदलकर उसे नदी के रास्ते दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाना शुरू किया। इस अस्पताल में डॉक्टरों की टीम, ऑपरेशन थिएटर, लैब और जरूरी दवाओं की सुविधा उपलब्ध रहती है। इससे उन लोगों को इलाज मिल सका, जिनके लिए सामान्य अस्पताल तक पहुंचना बेहद मुश्किल था। शुरुआत में बच्चों के लिए किताबें लिखीं उन्होंने अपने सामाजिक कार्यों की शुरुआत एक टीचर के तौर पर की थी। 1979 में चटगांव में किंडरगार्डन बच्चों को पढ़ाते हुए उन्होंने महसूस किया कि शिक्षा में बच्चों को केवल चीजें याद कराने पर ज्यादा जोर दिया जाता है, जबकि उन्हें समझने और सवाल पूछने के अवसर कम मिलते हैं। इस अनुभव ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव के लिए प्रेरित किया। बाद में उन्होंने बच्चों के लिए कहानी की किताबें और शैक्षणिक सामग्री लिखीं। रूना ने महिलाओं और कारीगरों के लिए भी काम किया। समाज के वंचित लोगों की मददगार रूना रूना खान का जन्म 17 नवंबर 1958 को बांग्लादेश में हुआ था। उन्होंने ढाका और कोलकाता से हायर एजुकेशन हासिल की। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने टीचिंग के साथ टूरिज्म और ट्रेडिशनल हैंडीक्राफ्ट से जुड़े काम किए। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना पूरा ध्यान समाज के वंचित लोगों की मदद करने पर केंद्रित कर दिया। रूना की संस्था Friendship को जानिए Friendship की शुरुआत 2002 में एक अस्पताल जहाज से हुई थी, जो जमुना नदी के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाता था। आज Friendship स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा राहत, आर्थिक विकास और जलवायु अनुकूलन सहित कई क्षेत्रों में काम करती है। यह करीब 75 लाख लोगों को हर साल सेवाएं देती है। रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड क्या है रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड “एशिया का नोबेल पुरस्कार” कहा जाता है। इसकी शुरुआत 1958 में फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रैमन मैग्सेसे की याद में हुई थी। यह एशिया में असाधारण सेवा और नेतृत्व के लिए दिया जाता है। -------------------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें 6 साल के आदित्य का आंदोलन खत्म:पेरेंट्स को जेल ले जाने से नाराज, कहा - जैसे मांझी ने पहाड़ का घमंड तोड़ा, वैसे ही मैं सरकार का घमंड तोड़ूंगा पटना में BPSC TRE-4 उम्मीदवारों के प्रदर्शन के दौरान 6 साल के बच्चे का वीडियो पहले ही दिन से खूब वायरल हुआ। इस बच्चे का नाम आदित्य कुमार है। वह पहली कक्षा का छात्र है। पूरी खबर यहां पढ़ें
गर्ल्स हॉस्टल के खाने में प्लास्टिक और सिगरेट के टुकड़े:सूरत में छात्राओं ने भजन गाकर किया प्रदर्शन, कहा- सिर्फ 1 घंटे आता है पानी
सूरत के सरकारी समरस गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने 1 सितंबर की रात को विरोध प्रदर्शन किया। उनका ये प्रदर्शन खाने की खराब क्वालिटी, पानी की सप्लाई और रहने की खराब व्यवस्थाओं को लेकर था। छात्राओं ने "रामधुन" गाया और कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक विरोध जारी रहेगा। विरोध करने वाली एक छात्रा ने कहा - इस हॉस्टल के खाने में कीड़े और खराब पानी के अलावा भी कई समस्याएं हैं। ये विरोध हमारी मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा। इससे पहले 11 अगस्त को किया था प्रदर्शन इससे पहले, 11 अगस्त को छात्रों ने खाने की क्वालिटी, साफ - सफाई, पानी की पर्याप्त सप्लाई और हॉस्टल वार्डन के खराब व्यवहार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। छात्रों का आरोप था कि हॉस्टल में परोसे जाने वाले खाने में कीड़े और दूसरी चीजें मिली थीं। हॉस्टल परिसर के आस-पास कैमरे लगाने की मांग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की भावनगर जिला इकाई की अध्यक्ष दीपिका कचोट ने आरोप लगाया कि गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को अपने खाने में प्लास्टिक और सिगरेट के टुकड़े मिले हैं। उन्होंने कहा - पानी की क्वालिटी खराब है। नौ मंजिल के इस हॉस्टल में सिर्फ दो या तीन मंजिलों पर ही पानी मिलता है। ABVP अध्यक्ष ने यह भी कहा कि हॉस्टल परिसर के आस-पास CCTV कैमरे लगाने चाहिए। कॉलेज जाने के लिए हॉस्टल से बाहर निकलने पर छात्राओं को लड़कों की छेड़छाड़ का सामना करना पड़ता है। वार्डन के बुरे बर्ताव से परेशान छात्राएं एक छात्रा ने आरोप लगाया कि जब छात्राओं ने वार्डन से घर जाने की इजाजत मांगी, तो वार्डन ने उनके साथ बुरा बर्ताव किया। उन्होंने यह भी कहा कि खाने में कीड़े मिलने की उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। डिप्टी कलेक्टर ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसके बाद अगले दिन विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया गया। खराब पानी पीने से कई बार बीमारी हुई छात्राएं इतना ही नहीं छात्राओं ने हॉस्टल के पानी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। पहले भी छात्राओं ने कहा था कि पानी का रंग कई बार हरा दिखाई देता है। इस पानी को पीने से कई छात्राओं की तबियत खराब हो गई है। उन्होंने आगे बताया कि जब हॉस्टल में निरीक्षण के लिए अधिकारी आते हैं, तो अचानक सारी व्यवस्था सुधर जाती हैं। 1200 महिलाओं के लिए सिर्फ 1 घंटे आता है पानी हॉस्टल और मेस की साफ-सफाई को लेकर भी छात्राओं में नाराजगी है। पानी की सप्लाई यहां सिर्फ एक घंटे के लिए होती है। छह मंजिला इस हॉस्टल की तीन मंजिल तक भी पानी नहीं चढ़ता। फिलहाल यहां 1200 महिलाएं रहती है। हॉस्टल अथॉरिटी का कहना है कि एक घंटे जो पानी आता है, उसी दौरान महिलाएं नहा लें, अपने कपड़े वगैरह भी धो लें और उसी टाइम लिमिट के अंदर पानी स्टोर करके भी रखें। सब्जियों में तेल और पानी ज्यादा होना आम समस्या कई बार अगर हमारे फ्लोर पर पानी नहीं आता है तो दूसरे फ्लोर से पानी लेकर आना पड़ता है। इस वजह से बहुत ज्यादा तकलीफें हो रही हैं। यहां खीर में अजीब तरह की स्मेल आना आम बात है। यहां बनने वाली छाछ में पानी ज्यादा हो जाना और रोज सिर्फ आलू की सब्जी बनना, सब्जियों में तेल ज्यादा, पानी ज्यादा, रोटी इतनी कड़क होती है जो टूटती नहीं हैं। छात्रा ने आगे कहा कि इस हॉस्टल में समस्याएं इतनी सारी हैं कि मैं बोलते-बोलते थक जाऊंगी लेकिन यहां की समस्याएं खत्म नहीं होंगी। ----------------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें बिहार में 32,388 पदों पर निकली टीचर भर्ती स्थगित:आज से शुरू थी आवेदन प्रक्रिया, आयोग के फैसले से उम्मीदवारों के बीच फिर छाई मायूसी बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 32,388 पदों पर निकली टीचर भर्ती को स्थगित कर दिया है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 1 सितंबर 2026 से शुरू होना थी। आयोग ने इसके पीछे प्रक्रिया में किए बदलाव को वजह बताया है। पूरी खबर यहां पढ़ें
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 





