ईशान किशन ने 334 बॉल पर 270 रन बनाए:दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन 708 पर ऑलआउट; कुमार कुशाग्र की भी सेंचुरी
दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने दोहरा शतक लगाया। चेन्नई में साउथ जोन के खिलाफ खेले जा रहे मुकाबले में ईशान 334 गेंदों पर 270 रन बनाकर आउट हुए। ईस्ट जोन की टीम सोमवार को दूसरे दिन पहली पारी में 708 रन पर ऑलआउट हो गई। ईशान ने 270 गेंदों में डबल सेंचुरी लगाई ईशान ने 270 गेंदों में दोहरा शतक ठोका। ईशान ने 10 सालों के बाद फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ये कमाल किया। इससे पहले उन्होंने साल 2016 में रणजी ट्रॉफी में पहला दोहरा शतक लगाया था। ईशान ने दिल्ली के खिलाफ 273 रनों की पारी खेली थी। वे अबतक फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 10 शतक लगा चुके हैं। ईशान थकान के कारण रिटायर्ड हर्ट हुए थे ईशान किशन 250 रन के स्कोर पर थकान के कारण रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर चले गए थे। 130.2 ओवर में एक रन लेने के बाद वे काफी थके हुए नजर आए। इसके बाद फिजियो ने मैदान पर आकर उनसे बातचीत की, जिसके बाद ईशान पवेलियन लौट गए। उस समय ईस्ट जोन का स्कोर 5 विकेट पर 611 रन था। हालांकि, टीम का 7वां विकेट गिरने के बाद ईशान दोबारा मैदान पर लौटे और अपनी पारी को आगे बढ़ाते हुए 270 रन बनाए। कुमार कुशाग्र ने 101 रन बनाए कुमार कुशाग्र ने ईस्ट जोन के लिए शतकीय पारी खेली। उन्होंने 132 गेंदों पर 101 रन बनाए, जिसमें 8 चौके और 5 छक्के शामिल रहे। कुशाग्र 101 रन के स्कोर पर चामा मिलिंद की गेंद पर त्रिपुराना विजय के हाथों कैच आउट हुए। वैभव सूर्यवंशी ने 44 रन बनाए ईस्ट जोन ने रविवार को पहले दिन टॉस जीतकर बैटिंग चुनी। टीम की शुरुआत भी अच्छी रही थी। वैभव सूर्यवंशी ने 37 गेंदों पर 44 रन बनाए, जबकि अभिमन्यु ईश्वरन ने 72 और शिखर मोहन ने 85 रन की पारियां खेलीं। सूर्यवंशी और ईश्वरन ने पहले विकेट के लिए 100 रन जोड़े थे। इसके बाद ईशान ने पारी को संभाला और टीम को बड़े स्कोर की ओर पहुंचाया। सिराज को एक भी विकेट नहीं साउथ जोन की ओर से त्रिपुराना विजय ने सबसे ज्यादा 4 विकेट झटके। चामा मिलिंद और श्रेयस गोपाल ने 2-2 विकेट लिए। शेख रशीद को एक विकेट मिला। अभिमन्यु ईश्वरन रन आउट हुए। हालांकि, मोहम्मद सिराज समेत साउथ जोन के गेंदबाज ईस्ट जोन के बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाने में नाकाम रहे हैं। सिराज को पहली पारी में एक भी विकेट नहीं मिला। दोनों टीमों की प्लेइंग-11 ईस्ट जोन: अभिमन्यु ईश्वरन, वैभव सूर्यवंशी, कुमार कुशाग्र, सुदीप कुमार घरामी, शिखर मोहन, ईशान किशन (विकेटकीपर/कप्तान), एमडी कौनैन कुरैशी, अनुकूल रॉय, मोहम्मद शमी, अभिजीत के सरकार, मुकेश कुमार। साउथ जोन: रिकी भुई, नारायण जगदीसन (विकेटकीपर), देवदत्त पडिक्कल, शेख रशीद, तिलक वर्मा (कप्तान), स्मरण रविचंद्रन, श्रेयस गोपाल, त्रिपुराना विजय, मोहम्मद सिराज, चामा वी मिलिंद, एमडी निधिश। ------------------------ दलीप ट्रॉफी से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… सूर्यवंशी की बैटिंग देखने उमड़ी हजारों की भीड़ चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में रविवार की सुबह अचानक भीड़ उमड़ने लगी। वजह थी दलीप ट्रॉफी फाइनल में वैभव सूर्यवंशी की बैटिंग। जैसे ही खबर फैली कि ईस्ट जोन के सूर्यवंशी बल्लेबाज कर रहे हैं, 12 हजार से ज्यादा दर्शक स्टेडियम पहुंच गए। पूरी खबर…
हेयरड्रेसर ने जिंदा की अमेरिका की ऐतिहासिक रेस:10 साल पहले बजट की कमी से बंद हुई फिलाडेल्फिया क्लासिक रेस फिर खेली गई
अमेरिका की सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक रेस ‘फिलाडेल्फिया साइक्लिंग क्लासिक’ पूरे एक दशक के सन्नाटे के बाद फिर से सड़कों पर लौट आई है। 1985 से 2016 तक दुनिया भर के दिग्गज साइकिल चालकों को आकर्षित करने वाला यह आयोजन 10 लाख डॉलर (करीब 94 लाख रुपए) के भारी बजट और प्रायोजकों की कमी के चलते बंद हो गया था। इस बार इस रेस को वापस पटरी पर लाने वाला कोई अरबपति खेल प्रमोटर नहीं, बल्कि फिलाडेल्फिया के एक हेयर सैलून के मालिक और पूर्व शौकिया राइडर कार्लोस रोजर्स हैं। रोजर्स के चार साल के कड़े संघर्ष, शहर के पूर्व मेयर के साथ और एक प्रमुख प्रायोजक के दम पर इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का पुनर्जन्म संभव हुआ है। रोजर्स का इस रेस से भावनात्मक जुड़ाव बचपन से रहा है। वे मानायंक इलाके में पले-बढ़े, जहां इस रेस का सबसे कठिन और मशहूर हिस्सा ‘मानायंक वॉल’ मौजूद है। कभी किशोर उम्र में पुलिस की हार्ले-डेविडसन की गड़गड़ाहट देखकर रोमांचित होने वाले रोजर्स ने 1994 में एक कंपोजिट टीम से खुद इस रेस में पैडल मारे थे और लांस आर्मस्ट्रांग जैसे दिग्गजों के साथ 130 मील तक राइड की थी। अगस्त 2022 में मैरीलैंड साइक्लिंग क्लासिक देखने के बाद रोजर्स में अपने शहर की रेस को लौटाने की तड़प जगी। उन्होंने पूर्व रेस डायरेक्टर रॉबिन मॉर्टन से तकनीकी बारीकियां समझीं और अपने सैलून में बाल कटवाने आने वाले ग्राहकों से लेकर उद्योगपतियों तक सैकड़ों कोल्ड कॉल्स किए। शुरुआती असफलताओं के बाद 2024 में रोजर्स की मुलाकात उद्यमी एरिक रॉबिंस और फिलाडेल्फिया के पूर्व मेयर माइकल नटर से हुई। नटर के जुड़ते ही इस मुहिम को प्रशासनिक और नैतिक मजबूती मिली और तीनों इसके सह-संस्थापक बने। इसके बाद 2025 में ‘अमेरीगैस’ के सीईओ बॉब फ्लेक्सन बतौर टाइटल स्पॉन्सर सामने आए, जिससे 10 लाख डॉलर से जुड़े वित्तीय संकट का समाधान हुआ। जून 2025 तक जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर विश्व साइक्लिंग संस्था से 2026 के अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में इसे शामिल करने की औपचारिक मंजूरी हासिल कर ली गई। अगस्त अंत में हुई यूसीआई 1.1 श्रेणी की इस रेस में आठ वर्ल्ड टूर टीमें उतरीं, जहां पुरुष वर्ग में 193 किमी और महिला वर्ग में 100 किमी का कड़ा मुकाबला हुआ। इस आयोजन में लैंगिक समानता को तरजीह देते हुए दोनों वर्गों के लिए समान 62 लाख रुपए की इनामी राशि रखी गई थी। मानायंक वॉल के आधे मील में 250 फीट से अधिक की चढ़ाई और 14 फीसदी तक के तीखे ढलान ने एक बार फिर राइडर्स का कड़ा इम्तिहान लिया। इस ऐतिहासिक ट्रैक पर पेरिस ओलिंपिक की स्वर्ण पदक विजेता क्रिस्टन फॉल्कनर और क्विन सिमंस जैसे सितारे भी उतरे। जर्मनी के टिम टॉर्न ने पुरुष और इटली की चियारा कोंसोनी ने महिला कैटेगरी का खिताब जीता। रोजर्स के मुताबिक, दोबारा इस रेस की शुरुआत होना किसी पदक से कम नहीं है।
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