Responsive Scrollable Menu

भारत का एयरोस्पेस बाजार 2035 तक 61 अरब डॉलर तक पहुंचेगा, एमएसएमई के लिए खुलेंगे बड़े अवसर: राम मोहन नायडू

नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने गुरुवार को कहा कि भारत का एयरोस्पेस मार्केट वर्ष 2025 के 30 अरब डॉलर से अधिक के स्तर से बढ़कर 2035 तक लगभग 61 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में देश के वाणिज्यिक विमान बेड़े का आकार भी दोगुना से अधिक होकर करीब 2,050 विमानों तक पहुंच सकता है, जिससे भारतीय विनिर्माण कंपनियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए वैश्विक एयरोस्पेस आपूर्ति शृंखला का हिस्सा बनने का बड़ा अवसर पैदा होगा।

सीआईआई और नागर विमानन मंत्रालय की संयुक्त पहल वोर्टेक्स 2026 को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा कि सरकार भारत में एक मजबूत एयरोस्पेस विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता एवियोनिक्स क्षेत्र में अवसर तलाश सकते हैं, प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपनियां एयरोस्पेस कलपुर्जों के निर्माण में प्रवेश कर सकती हैं और ऑटोमोबाइल उद्योग को आपूर्ति करने वाले एमएसएमई भी एयरोस्पेस क्षेत्र में अपनी क्षमताओं का विस्तार कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के ऑटो कंपोनेंट उद्योग, जिसका आकार आज लगभग 70 अरब डॉलर है, और मोबाइल फोन विनिर्माण क्षेत्र की सफलता एयरोस्पेस उद्योग के लिए प्रेरणादायक उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि आज भारत में उपयोग होने वाले लगभग 99 प्रतिशत मोबाइल फोन देश में ही निर्मित हो रहे हैं और इसी तरह की सफलता एयरोस्पेस क्षेत्र में भी हासिल की जा सकती है।

मंत्री ने कहा कि एमएसएमई निर्यात में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2021 में जहां यह लगभग 4 लाख करोड़ रुपए था, वहीं 2025 तक बढ़कर 12.4 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया। वर्तमान में 1.73 लाख से अधिक एमएसएमई सीधे वैश्विक बाजारों में निर्यात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एयरोस्पेस क्षेत्र की आवश्यकताओं का लगभग 80 प्रतिशत आधार भारतीय उद्योग के पास पहले से मौजूद है और शेष 20 प्रतिशत के लिए सरकार आवश्यक नियामकीय सहयोग प्रदान करेगी।

नायडू ने बताया कि भारतीय एयरलाइंस ने कुल 1,640 विमानों का ऑर्डर दिया हुआ है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में लगभग 80 करोड़ पुर्जों और कलपुर्जों की आवश्यकता होगी। यह भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक विशाल अवसर है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2035 तक भारत में हवाई यात्री यातायात में औसतन 8.9 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि होने का अनुमान है, जो दुनिया की किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था में सबसे तेज वृद्धि दर होगी। उनके अनुसार, एयरोस्पेस ऐसा क्षेत्र है जहां तेजी से बढ़ता घरेलू बाजार और भारत में आपूर्ति शृंखला विविधीकरण की तलाश कर रही वैश्विक कंपनियां, दोनों एक साथ अवसर प्रदान कर रही हैं।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि केवल भारत की जरूरतें ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार भी भारतीय उद्योग के लिए बड़ा अवसर लेकर आ रहा है। उन्होंने बताया कि दुनिया की दो सबसे बड़ी विमान निर्माता कंपनियों एयरबस और बोइंग के पास वर्तमान में 15,000 से अधिक वाणिज्यिक विमानों के ऑर्डर हैं। इससे भारतीय एमएसएमई को वैश्विक स्तर पर पुर्जे और घटक आपूर्ति करने का अवसर मिल सकता है।

इस बीच, नागर विमानन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा ने कहा कि भारत पहले ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में देश में परिचालित हवाईअड्डों की संख्या 74 थी, जो अब बढ़कर 166 हो चुकी है। इसी अवधि में विमान बेड़ा लगभग 350 विमानों से बढ़कर 874 विमानों तक पहुंच गया है। आने वाले दो दशकों में भारतीय विमानन बेड़े में 2,000 से अधिक नए विमान शामिल होने की उम्मीद है।

सिन्हा ने कहा कि लगभग 29,000 करोड़ रुपए के बजटीय प्रावधान वाली संशोधित उड़ान योजना के तहत 100 नए हवाईअड्डों और 200 आधुनिक हेलिपैड के विकास के माध्यम से विमानन पारिस्थितिकी तंत्र का और विस्तार किया जाएगा।

वहीं, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के अध्यक्ष विपिन कुमार ने कहा कि भारतीय एमएसएमई और स्टार्टअप पहले से ही वैश्विक बाजार को हर वर्ष 18,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के विमान कलपुर्जे उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यात्री यातायात में वृद्धि से विमान, कलपुर्जों, एमआरओ सेवाओं, ग्राउंड सपोर्ट उपकरण, नेविगेशन प्रणालियों, हवाईअड्डा प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण सुविधाओं और डिजिटल समाधानों की मांग लगातार बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि एएआई विमानन अवसंरचना और कनेक्टिविटी के विस्तार के माध्यम से इस पहल को समर्थन देगा तथा भारतीय तकनीकों को हवाईअड्डा पारिस्थितिकी तंत्र में प्रोत्साहन प्रदान करेगा।

वहीं, बोइंग इंडिया एवं दक्षिण एशिया के अध्यक्ष और सीआईआई राष्ट्रीय एयरोस्पेस विनिर्माण समिति के अध्यक्ष सलिल गुप्ते ने कहा कि बोइंग के भारत में 300 आपूर्तिकर्ता साझेदार हैं, जिनमें से लगभग 25 प्रतिशत एमएसएमई हैं। उन्होंने कहा कि प्रश्न यह नहीं है कि भारत एयरोस्पेस उत्पाद बना सकता है या नहीं, क्योंकि यह पहले से हो रहा है। असली सवाल यह है कि भारत इस क्षमता का विस्तार कितनी तेजी से कर सकता है।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

कविता कृष्णमूर्ति और श्रेया घोषाल का सुपरहिट गाना, 2 हसीनाओं की जमकर हुई टक्कर, 24 साल बाद भी लड़कियों का फेवरेट

बॉलीवुड में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिनकी कहानी के साथ उनके गाने भी लोगों की यादों में बस जाते हैं. संजय लीला भंसाली की शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित स्टारर 'देवदास' भी ऐसी ही फिल्मों में से एक है. साल 2002 में रिलीज हुई इस ट्रैजिक लव स्टोरी ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया था. फिल्म के एक गाने में ऐश्वर्या और माधुरी ने एक दूसरे को जमकर टक्कर दी थी. गाने को कविता कृष्णमूर्ति और श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज से अमर बनाया था.

Continue reading on the app

  Sports

लगातार सबसे ज्यादा टेस्ट हारने वाली 5 टीमें, एक टीम गंवा चुकी है 21 मैच, जीत को वर्षों तरसती रहीं

5 team Most consecutive defeats in Test: टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में लगातार सबसे ज्यादा मैच हारने का शर्मनाक रिकॉर्ड बांग्लादेश के नाम दर्ज है, जिसने 2001 से 2004 के दौरान लगातार पराजय का सामना किया. इसके अलावा जिम्बाब्वे दो अलग-अलग दौरों में लगातार 11 और 10 मुकाबले हारा. शुरुआती दौर (1889-1899) में दक्षिण अफ्रीका भी लगातार 8 टेस्ट हार चुका है. सबसे ज्यादा टेस्ट हारने वाली 5 टीमें इस प्रकार हैं. Fri, 11 Sep 2026 07:01:02 +0530

  Videos
See all

Iran-US War:ईरान का पलटवार! अमेरिका के 5 टैंकर तबाह होने के बाद 10 जहाजों पर हमला | Iran US War #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-11T02:15:29+00:00

BRICS Summit 2026: ब्रिक्स समिट में भाग लेने New Delhi पहुंचे Vladimir Putin, PM Modi से आज मुलाकात #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-11T02:17:28+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers