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पाकिस्तान के सबसे बड़े 'खलनायक' बने हैरी ब्रुक, सिर्फ 14 पारियों में यह कारनामा कर रचा इतिहास

Harry Brook: इंग्लैंड के धाकड़ बल्लेबाज हैरी ब्रुक का पाकिस्तान के खिलाफ धमाकेदार प्रदर्शन जारी है. उन्होंने सिर्फ 14 पारियों में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैचों में अपने 1000 रन पूरे कर लिए हैं. ब्रुक ने पाकिस्तान के खिलाफ यह कारनामा एजबेस्टन टेस्ट के दूसरे दिन 75 रनों की शानदार पारी खेलते हुए अंजाम दिया. इसके साथ ही वह पाकिस्तान के खिलाफ सबसे कम पारियों में 1000 टेस्ट रन बनाने वाले इंग्लैंड के सबसे तेज बल्लेबाज बन गए हैं. 

पाकिस्तान के खिलाफ हैरी ब्रुक का हैरान करने वाला रिकॉर्ड

पाकिस्तान के खिलाफ हैरी ब्रुक का बल्ला हमेशा आग उगलता है. उन्होंने बेहद कम समय में पाकिस्तान को अपनी पसंदीदा विरोधी टीम बना लिया है. ब्रुक ने अब तक पाकिस्तान के खिलाफ खेले 9 टेस्ट मैचों की 14 पारियों में 75.42 के बेमिसाल औसत से 1056 रन जड़ दिए हैं, जिसमें 4 शतक और 3 अर्धशतक शामिल हैं. इस दौरान साल 2024 के मुल्तान टेस्ट में बनाया गया 317 रन उनका हाईएस्ट स्कोर रहा है, जो उनकी इस जबर्दस्त फॉर्म की गवाही देता है. 

पाकिस्तान के खिलाफ सबसे तेज 1000 रन बनाने वाले इंग्लिश बल्लेबाज बने ब्रूक

हैरी ब्रुक ने पाकिस्तान के खिलाफ सबसे तेज सिर्फ 14 पारियों में 1000 रन पूरे करके एक नया इतिहास रच दिया है. वह इंग्लैंड के सिर्फ चौथे ऐसे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में 1000 रनों का आंकड़ा छुआ है. उनसे पहले इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज एलिस्टेयर कुक, डेविड गॉवर और जो रूट यह कारनामा कर चुके हैं, लेकिन इन सभी सीनियर खिलाड़ियों ने इसके लिए ब्रुक से कहीं ज्यादा पारियां खेली थीं. अगर वर्ल्ड क्रिकेटकी बात करें, तो टेस्ट इतिहास में सिर्फ भारत के वीरेंद्र सहवाग और ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर ही ऐसे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ ब्रुक से भी तेज (दोनों ने सिर्फ 11-11 पारियों में) 1000 रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है. 

पाकिस्तान के खिलाफ मजबूत स्थिति में इंग्लैंड की टीम

इस मैच की बात करें तो इंग्लैंड की टीम बेहद मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, क्योंकि उसने पाकिस्तान की पहली पारी को सिर्फ 133 रनों पर समेट दिया था. इसके बाद बल्लेबाजी करने उतरे हैरी ब्रुक ने डैन लॉरेंस (65 रन) के साथ मिलकर कमाल की पार्टनरशिप की. ब्रुक दूसरे दिन 52 रनों से आगे खेलने उतरे और स्कोरबोर्ड को बढ़ाते हुए 75 रनों की शानदार पारी खेली. हालांकि, जब वह अपने 11वें टेस्ट शतक की तरफ तेजी से बढ़ रहे थे, तब एक गलत तालमेल की वजह से वह दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट हो गए. ब्रुक ने अपनी 97 गेंदों की इस सूझबूझ भरी पारी में 6 चौके जड़े और इंग्लैंड को एक बड़ी बढ़त दिलाने में सबसे अहम रोल निभाया. 

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फिनटेक वित्तीय समावेशन को दे रहा नई ऊंचाई, गांव-गांव तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में निभा रहा अहम भूमिका: आरबीआई गवर्नर

मुंबई, 10 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने गुरुवार को कहा कि फिनटेक कंपनियां भारत के वित्तीय तंत्र की महत्वपूर्ण भागीदार हैं और वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आरबीआई का प्रयास फिनटेक कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर काम करने का है, ताकि देश के हर व्यक्ति तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाई जा सकें, डिजिटल धोखाधड़ी को कम किया जा सके और बैंकिंग सेवाओं की लागत घटाई जा सके।

ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) 2026 के दौरान न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वित्तीय समावेशन, ग्राहक-केंद्रित सेवाएं और सुरक्षित डिजिटल वित्तीय प्रणाली आरबीआई की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक की मदद से वित्तीय सेवाओं को लोगों के गांवों और घरों तक पहुंचाना ही भविष्य की दिशा है।

आरबीआई गवर्नर ​​ने कहा, फिनटेक हमारे लिए एक बहुत महत्वपूर्ण भागीदार है, और हमारा प्रयास है कि हम उनके साथ और अपने वित्तीय क्षेत्र की संस्थाओं के साथ मिलकर काम करें, ताकि पूरे भारत में हम वित्तीय समावेशन, ग्राहक-केंद्रितता और डिजिटल धोखाधड़ी को कम करने के अपने प्राथमिक उद्देश्य को प्राप्त कर सकें, साथ ही बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के लिए लागत को भी कम कर सकें।

उन्होंने आगे कहा, हमारा लक्ष्य इन लक्ष्यों को पूरा करने और वित्तीय प्रणाली को सभी लोगों के करीब लाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करना है-उनके गांवों और घरों तक पहुंचना है।

इससे पहले जीएफएफ 2026 कार्यक्रम में बोलते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने बताया कि देश में वर्तमान में 57 करोड़ प्रधानमंत्री जनधन खाते, 25 करोड़ माइक्रो इंश्योरेंस पॉलिसियां और 9 करोड़ अटल पेंशन योजना लाभार्थी हैं। वहीं, यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेनदेन का पैमाना भी लगातार बढ़ रहा है और यह आज करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुका है।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल इन आंकड़ों का आकार नहीं है, बल्कि यह है कि डिजिटल वित्तीय सेवाएं आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों का हिस्सा बन गई हैं। बैंकिंग अब केवल शाखाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि मोबाइल फोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे लोगों तक पहुंच रही है।

संजय मल्होत्रा ने कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साझेदारी ने भारत में वित्तीय समावेशन को नई गति दी है। हालांकि, अगला लक्ष्य वित्तीय सेवाओं को पूरी तरह सर्वव्यापी और हर जगह उपलब्ध बनाना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अभी भी महिलाओं, किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तक छोटे ऋण और अन्य वित्तीय सेवाएं पहुंचाने में चुनौतियां मौजूद हैं। पारंपरिक बैंकिंग संस्थानों के लिए इन वर्गों तक पहुंचना हमेशा आसान नहीं रहा है। ऐसे में फिनटेक कंपनियां तकनीक के जरिए इन अंतरालों को भर सकती हैं और वित्तीय समावेशन को और मजबूत बना सकती हैं।

आरबीआई गवर्नर ने फिनटेक उद्योग को चेताते हुए कहा कि तकनीक जितनी महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण विश्वास है। उन्होंने कहा कि विश्वास बनाने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन यह कुछ ही क्षणों में टूट सकता है।

मल्होत्रा ने कहा कि फिनटेक कंपनियों को साइबर सुरक्षा, पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ डेटा सुरक्षा और साइबर जोखिमों का प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है।

उन्होंने कहा, ऐसी वित्तीय प्रणाली जो प्रकाश की गति से काम करती हो लेकिन लोगों का भरोसा हासिल न कर सके, उसे व्यापक स्वीकार्यता नहीं मिलेगी।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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वनडे में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले 5 बल्लेबाज, 12 साल से अटूट है विश्व कीर्तिमान

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