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UP Election 2027: शामली की 3 सीटों पर BJP-RLD गठबंधन से कितना बदलेगा सियासी गणित?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का शामली जिला हमेशा सियासी तौर पर सुर्खियों में रहा है. जिले की  कैराना सीट तो देशभर में हिंदू पलायन के मुद्दे को लेकर चर्चा में रही. वहीं, राजनीतिक जानकार कहते हैं कि यहां की जाट-मुस्लिम गठजोड़ की राजनीति लखनऊ का रास्ता तय करती है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आइए जानते हैं जिले की सभी सीटों का पूरा हाल.

2011 में मुजफ्फरनगर से अलग होकर बना था जिला

शामली जिला 2011 में मुजफ्फरनगर से अलग होकर बना था और शुरुआत में इसे प्रबुद्ध नगर नाम दिया गया था. बाद में 2012 में इसका नाम बदलकर शामली कर दिया गया. जनगणना 2011 के अनुसार जिले की कुल आबादी करीब 12 लाख 74 हजार है. यहां प्रति हजार पुरुषों पर 880 महिलाएं हैं. बता दें जिले की करीब 30 प्रतिशत आबादी शहरों में और बाकी गांवों में रहती है. एक रिपोर्ट के अनुसार शामली में हिंदू आबादी करीब 67 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 32 प्रतिशत है. यहां की कैराना तहसील में मुस्लिम आबादी करीब 53 प्रतिशत और हिंदू आबादी करीब 45 प्रतिशत है. बता दें जिले में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 11 प्रतिशत है.

जिले में तीन विधानसभा सीटें, कोई भी आरक्षित नहीं

शामली जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं कैराना, थाना भवन और शामली. जानकारी के मुताबिक यह तीनों सीटें कैराना लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं. तीनों सीटें सामान्य श्रेणी में आती हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में शामली जिले में सपा-रालोद गठबंधन ने तीनों सीटों पर कब्जा जमाया था। आइए आपको हर सीट का समीकरण समझाते हैं.

कैराना विधानसभा सीट पर सपा के नाहिद हसन ने भाजपा की मृगांका सिंह को करीब 26 हजार वोटों से हराया था. खास बात यह रही कि नाहिद हसन उस वक्त जेल में बंद थे और वहीं से उन्होंने चुनाव लड़ा था.

थाना भवन सीट पर रालोद के अशरफ अली खान ने प्रदेश के तत्कालीन गन्ना मंत्री सुरेश राणा को करीब साढ़े दस हजार वोटों से हराया था. 

शामली सीट पर रालोद के प्रसन्न चौधरी ने भाजपा के तेजेंद्र सिंह निर्वाल को करीब सात हजार वोटों के अंतर से हराया था. बता दें निर्वाल इससे पहले 2017 में इसी सीट से जीत चुके थे.

कैराना में हसन बनाम हुकुम सिंह की पुरानी रंजिश

शामली जिले की राजनीति समझने के लिए कैराना सीट का इतिहास जानना जरूरी है. बताया जाता है कि यहां दशकों से हसन परिवार और भाजपा के दिवंगत नेता हुकुम सिंह के बीच सीधी टक्कर होती रही है. चुनाव आयोग के मुताबिक 1991 में चौधरी मुनव्वर हसन (नाहिद हसन के पिता) ने हुकुम सिंह को हराकर बड़ी सनसनी मचाई थी. मुनव्वर हसन की एक हादसे में मौत के बाद उनकी पत्नी तबस्सुम हसन ने राजनीतिक विरासत संभाली थी

2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनावों में नाहिद हसन ने कैराना सीट पर अपनी पकड़ बरकरार रखी

2014 में हुकुम सिंह सांसद बने जिससे कैराना सीट खाली हुई और उपचुनाव में नाहिद हसन पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद हुकुम सिंह ने कैराना से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाया जो 2017 के चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बहस का विषय बन गया. 2019 में हुकुम सिंह के निधन के बाद हुए लोकसभा उपचुनाव में तबस्सुम हसन ने हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को शिकस्त दी थी. बता दें 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनावों में नाहिद हसन ने कैराना सीट पर अपनी पकड़ बरकरार रखी थी.

शामली सीट 2012 में नई बनी थी

थाना भवन और शामली सीटों पर परंपरागत रूप से जाट बहुल इलाकों में भाजपा और रालोद के बीच ही मुख्य मुकाबला रहा है. शामली सीट 2012 में नई बनी थी जिसके पहले चुनाव में कांग्रेस के पंकज मलिक जीते थे. फिर 2017 में भाजपा के तेजेंद्र निर्वाल ने इस सीट से जीत दर्ज की थी.

अब क्या हैं मौजूदा हालात

2027 से पहले जिले की राजनीति में सबसे बड़ा बदलाव गठबंधन के समीकरण में आया है. 2022 में जिन तीनों सीटों पर रालोद-सपा गठबंधन ने भाजपा को हराया था अब रालोद खुद भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा बन चुकी है. रालोद प्रमुख जयंत चौधरी केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं और उन्होंने हाल ही में साफ किया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन जारी रहेगा. इसका सीधा असर जिले की सीट बंटवारे की राजनीति पर पड़ रहा है.

2027 में शामली जिले का मुकाबला भाजपा-रालोद गठबंधन बनाम सपा के बीच होने की संभावना है

मौजूदा गठबंधन फॉर्मूले के तहत शामली और थाना भवन सीटों पर रालोद अपना दावा जता रही है जहां फिलहाल पार्टी के ही विधायक काबिज हैं. वहीं, कैराना सीट पर सपा और हसन परिवार की पकड़ मजबूत बनी हुई है. जयंत चौधरी हाल में सहारनपुर में बड़ी रैली कर पश्चिमी यूपी में जाट-किसान वोट बैंक को साधने और रालोद की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान मजबूत करने में जुटे हैं जबकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी इस इलाके में लगातार सक्रिय हैं. इससे साफ है कि 2027 में शामली जिले का मुकाबला भाजपा-रालोद गठबंधन बनाम सपा के बीच होने की संभावना है जो 2022 के मुकाबले पूरी तरह अलग तस्वीर होगी.

 

किस सीट पर किसका असर, समझे शामली का पूरा समीकरण

- कैराना सीट पर मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा समूह है. इसके बाद दलित और जाट मतदाता भी यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

- थाना भवन सीट पर  जाट और मुस्लिम मतदाताओं का मजबूत गठजोड़ है. साथ ही यहां सैनी व दलित समाज भी अहम भूमिका में हैं.

- शामली सीट की बात करें तो ये इलाका जाट बहुल है. इसके अलावा यहां पंजाबी, वैश्य और मुस्लिम मतदाता भी नतीजों में बड़ी भूमिका निभाते हैं.

FAQ

Q. शामली जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं?
A. शामली जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं, जिनके नाम हैं कैराना, थाना भवन और शामली.

Q. शामली की कौन-सी सीट आरक्षित है?
A. जिले की तीनों सीटें सामान्य श्रेणी की हैं, यहां कोई भी सीट अनुसूचित जाति या जनजाति के लिए आरक्षित नहीं है.

Q. 2022 चुनाव में शामली जिले में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं थीं?
A. सपा-रालोद गठबंधन ने यहां तीनों सीटें जीतीं थीं. 

Q. शामली जिले की आबादी में हिंदू और मुस्लिम समुदाय का हिस्सा कितना है?
A. जनगणना 2011 के अनुसार शामली तहसील में हिंदू आबादी करीब 67 प्रतिशत है, जबकि कैराना तहसील में मुस्लिम आबादी करीब 53 प्रतिशत है.

Q. जिले में किस पार्टी का ऐतिहासिक तौर पर दबदबा रहा है?
A. कैराना सीट पर लंबे समय से हसन परिवार का प्रभाव रहा है, जबकि थाना भवन और शामली जैसी जाट बहुल सीटों पर भाजपा और रालोद के बीच बारी-बारी से मुकाबला होता रहा है.

Q. 2027 के चुनाव से पहले फिलहाल राजनीतिक माहौल कैसा है?
A. 2022 में गठबंधन में रहकर भाजपा को हराने वाली रालोद अब खुद भाजपा के साथ एनडीए गठबंधन में है, इसलिए 2027 में जिले का मुकाबला भाजपा-रालोद गठबंधन बनाम सपा के बीच होने की संभावना है, जो पिछले चुनाव से बिल्कुल अलग समीकरण होगा.

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सीएम धामी ने हल्द्वानी में शहीद स्मारक पहुंचकर अमर शहीदों को किया नमन, पुष्पांजलि अर्पित कर दी श्रद्धांजलि

उत्तराखंड के सीएम धामी ने कहा कि देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीदों का बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा. राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है. उन्होंने कहा कि शहीद स्मारक भावी पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति और देश सेवा की प्रेरणा देता रहेगा. 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शहीदों के परिजनों के सम्मान एवं कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, सांसद अजय भट्ट सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

कार्यक्रम में सहभागिता कर युवाओं से संवाद 

इससे पहले हल्द्वानी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन एवं सीएम पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में सहभागिता कर युवाओं से संवाद किया. इस दौरान करियर, रोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास, तकनीक, खेल और उत्तराखंड के भविष्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की .

राष्ट्रीय अध्यक्ष और सीएम से सवाल पूछे

संवाद के वक्त युवाओं ने प्रदेश एवं देश के विकास से जुड़े विषयों पर राष्ट्रीय अध्यक्ष और सीएम से सवाल पूछे. युवाओं ने सरकार की विभिन्न योजनाओं को लेकर अपने अनुभव साझा किए तथा रोजगार, स्वरोजगार और प्रदेश    में बेहतर अवसरों की उपलब्धता को लेकर सुझाव भी रखे.

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की युवा शक्ति के सामर्थ्य को नई दिशा देने के साथ ही युवाओं के लिए नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं. डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया और खेलो इंडिया जैसी पहलों ने युवाओं को अपनी प्रतिभा, क्षमता और कौशल के अनुरूप आगे बढ़ने का मंच दिया है. आज का युवा केवल रोजगार प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि रोजगार और नए अवसरों का सृजन करने वाला भी बन रहा है.

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