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न स्टार स्पोर्ट्स, न सोनी लिव, अफगानिस्तान की 'मेजबानी' ने बदला ब्रॉडकास्ट का खेल, जानें कहां देख सकेंगे IND vs AFG T20I मैच

IND vs AFG Live Streaming: भारतीय टीम के फैंस के लिए एक नया रोमांच शुरू होने जा रहा है. अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए टीम इंडिया कमर कस चुके हैं. इस सीरीज का पहला मुकाबला 13 सितंबर को खेला जाएगा, जिसके लिए अब काउंटडाउन शुरू हो चुका है. अगर आप भारत बनाम अफगानिस्तान टी20 सीरीज को टीवी या मोबाइल पर लाइव देखने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो इसके ब्रॉडकास्टिंग और लाइव स्ट्रीमिंग की सही डिटेल्स पहले ही जान लें ताकि कोई मैच न छूटे. एशियन गेम्स से पहले की तैयारियों के लिहाज से यह सीरीज दोनों टीमों के लिए अहम होने वाली है.

दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जाएंगे सभी मुकाबले

दिल्ली का अरुण जेटली स्टेडियम इस पूरी टी20 सीरीज का गवाह बनने जा रहा है. दिलचस्प बात यह है कि भारतीय सरजमीं पर होने के बावजूद कागजों पर इस सीरीज की मेजबानी अफगानिस्तान के हाथों में है. अफगानिस्तान के होम ग्राउंड के रूप में चुने जाने के कारण ये तीनों मैच एक ही वेन्यू पर खेले जाएंगे. इस सीरीज को एशियन गेम्स 2026 की तैयारी के लिहाज से एक महत्वपूर्ण 'रिहर्सल' माना जा रहा है. भारत और अफगानिस्तान के बीच पहला मैच 13, दूसरा 15 और तीसरा मुकाबला 17 सितंबर को खेला जाएगा. 

सोनी स्पोर्ट्स पर टीवी पर देख सकेंगे भारत-अफगानिस्तान टी20 मैच

भारत और बनाम अफगानिस्तान टी20 मैचों का लुफ्त टीवी या मोबाइल पर लाइव उठाना चाहते हैं, तो प्रसारण से जुड़ी सही डिटेल्स नोट कर लीजिए. टीवी पर लाइव एक्शन देखने के लिए आपको सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर जाना होगा, इसपर कई अलग-अलग चैनलों पर आपकी पसंदीदा क्षेत्रीय भाषाओं में कमेंट्री के साथ मैच का टेलीकास्ट किया जाएगा.

फैनकोड एप पर मोबाइल पर देख पाएंगे लाइव मुकाबला

वहीं, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मैच देखने वाले फैंस को एक जरूरी बात का ध्यान रखना होगा. इस सीरीज की लाइव स्ट्रीमिंग सोनी के ऑफिशियल ऐप 'सोनी लिव' (Sony LIV) पर नहीं की जाएगी. मोबाइल या स्मार्ट टीवी पर मैच देखने के लिए आपको फैनकोड ऐप (FanCode App) का इस्तेमाल करना होगा, जहां इस पूरी सीरीज की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग उपलब्ध रहेगी. 

स्टार स्पोर्ट्स और जियो हॉट स्टार पर नहीं देख सकेंगे लाइव मैच

आमतौर पर भारत में खेले जाने वाले इंटरनेशनल मैचों के टीवी राइट्स स्टार स्पोर्ट्स और डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग राइट्स जियो सिनेमा या हॉटस्टार के पास होते हैं. लेकिन जैसा कि हमने आपको पहले बताया, यह सीरीज भले ही दिल्ली में हो रही है, लेकिन इसकी आधिकारिक मेजबानी अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पास है. इसी वजह से इस सीरीज के मीडिया राइट्स भी अफगानिस्तान बोर्ड द्वारा ही बेचे गए हैं. लिहाजा, इस बार स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क या जियो और हॉटस्टार के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इन मैचों का कोई प्रसारण नहीं किया जाएगा. अगर आप मैच देखने की उम्मीद में इन प्लेटफॉर्म्स पर लॉग-इन करेंगे, तो आपको निराशा ही हाथ लगेगी. 

भारत और अफगानिस्तान का टी20 स्क्वाड:

अफगानिस्तान T20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का स्क्वाड: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा (उप-कप्तान), शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह और यश ठाकुर.

भारत के खिलाफ T20I सीरीज के लिए अफगानिस्तान की टीम: इब्राहिम जादरान (कप्तान), रहमानुल्लाह गुरबाज (विकेटकीपर), सेदिकुल्लाह अटल, दरविश रसूली, अजमतुल्लाह उमरजई, गुलबदीन नायब, नूर रहमान, मोहम्मद नबी, रशीद खान, नांग्याल खरोटी, मुजीब उर रहमान, नूर अहमद, फजलहक फारूकी, नवीन-उल-हक, अब्दुल्ला अहमदजई.

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UP Election 2027: शामली की 3 सीटों पर BJP-RLD गठबंधन से कितना बदलेगा सियासी गणित?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का शामली जिला हमेशा सियासी तौर पर सुर्खियों में रहा है. जिले की  कैराना सीट तो देशभर में हिंदू पलायन के मुद्दे को लेकर चर्चा में रही. वहीं, राजनीतिक जानकार कहते हैं कि यहां की जाट-मुस्लिम गठजोड़ की राजनीति लखनऊ का रास्ता तय करती है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आइए जानते हैं जिले की सभी सीटों का पूरा हाल.

2011 में मुजफ्फरनगर से अलग होकर बना था जिला

शामली जिला 2011 में मुजफ्फरनगर से अलग होकर बना था और शुरुआत में इसे प्रबुद्ध नगर नाम दिया गया था. बाद में 2012 में इसका नाम बदलकर शामली कर दिया गया. जनगणना 2011 के अनुसार जिले की कुल आबादी करीब 12 लाख 74 हजार है. यहां प्रति हजार पुरुषों पर 880 महिलाएं हैं. बता दें जिले की करीब 30 प्रतिशत आबादी शहरों में और बाकी गांवों में रहती है. एक रिपोर्ट के अनुसार शामली में हिंदू आबादी करीब 67 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 32 प्रतिशत है. यहां की कैराना तहसील में मुस्लिम आबादी करीब 53 प्रतिशत और हिंदू आबादी करीब 45 प्रतिशत है. बता दें जिले में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 11 प्रतिशत है.

जिले में तीन विधानसभा सीटें, कोई भी आरक्षित नहीं

शामली जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं कैराना, थाना भवन और शामली. जानकारी के मुताबिक यह तीनों सीटें कैराना लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं. तीनों सीटें सामान्य श्रेणी में आती हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में शामली जिले में सपा-रालोद गठबंधन ने तीनों सीटों पर कब्जा जमाया था। आइए आपको हर सीट का समीकरण समझाते हैं.

कैराना विधानसभा सीट पर सपा के नाहिद हसन ने भाजपा की मृगांका सिंह को करीब 26 हजार वोटों से हराया था. खास बात यह रही कि नाहिद हसन उस वक्त जेल में बंद थे और वहीं से उन्होंने चुनाव लड़ा था.

थाना भवन सीट पर रालोद के अशरफ अली खान ने प्रदेश के तत्कालीन गन्ना मंत्री सुरेश राणा को करीब साढ़े दस हजार वोटों से हराया था. 

शामली सीट पर रालोद के प्रसन्न चौधरी ने भाजपा के तेजेंद्र सिंह निर्वाल को करीब सात हजार वोटों के अंतर से हराया था. बता दें निर्वाल इससे पहले 2017 में इसी सीट से जीत चुके थे.

कैराना में हसन बनाम हुकुम सिंह की पुरानी रंजिश

शामली जिले की राजनीति समझने के लिए कैराना सीट का इतिहास जानना जरूरी है. बताया जाता है कि यहां दशकों से हसन परिवार और भाजपा के दिवंगत नेता हुकुम सिंह के बीच सीधी टक्कर होती रही है. चुनाव आयोग के मुताबिक 1991 में चौधरी मुनव्वर हसन (नाहिद हसन के पिता) ने हुकुम सिंह को हराकर बड़ी सनसनी मचाई थी. मुनव्वर हसन की एक हादसे में मौत के बाद उनकी पत्नी तबस्सुम हसन ने राजनीतिक विरासत संभाली थी

2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनावों में नाहिद हसन ने कैराना सीट पर अपनी पकड़ बरकरार रखी

2014 में हुकुम सिंह सांसद बने जिससे कैराना सीट खाली हुई और उपचुनाव में नाहिद हसन पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद हुकुम सिंह ने कैराना से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाया जो 2017 के चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बहस का विषय बन गया. 2019 में हुकुम सिंह के निधन के बाद हुए लोकसभा उपचुनाव में तबस्सुम हसन ने हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को शिकस्त दी थी. बता दें 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनावों में नाहिद हसन ने कैराना सीट पर अपनी पकड़ बरकरार रखी थी.

शामली सीट 2012 में नई बनी थी

थाना भवन और शामली सीटों पर परंपरागत रूप से जाट बहुल इलाकों में भाजपा और रालोद के बीच ही मुख्य मुकाबला रहा है. शामली सीट 2012 में नई बनी थी जिसके पहले चुनाव में कांग्रेस के पंकज मलिक जीते थे. फिर 2017 में भाजपा के तेजेंद्र निर्वाल ने इस सीट से जीत दर्ज की थी.

अब क्या हैं मौजूदा हालात

2027 से पहले जिले की राजनीति में सबसे बड़ा बदलाव गठबंधन के समीकरण में आया है. 2022 में जिन तीनों सीटों पर रालोद-सपा गठबंधन ने भाजपा को हराया था अब रालोद खुद भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा बन चुकी है. रालोद प्रमुख जयंत चौधरी केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं और उन्होंने हाल ही में साफ किया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन जारी रहेगा. इसका सीधा असर जिले की सीट बंटवारे की राजनीति पर पड़ रहा है.

2027 में शामली जिले का मुकाबला भाजपा-रालोद गठबंधन बनाम सपा के बीच होने की संभावना है

मौजूदा गठबंधन फॉर्मूले के तहत शामली और थाना भवन सीटों पर रालोद अपना दावा जता रही है जहां फिलहाल पार्टी के ही विधायक काबिज हैं. वहीं, कैराना सीट पर सपा और हसन परिवार की पकड़ मजबूत बनी हुई है. जयंत चौधरी हाल में सहारनपुर में बड़ी रैली कर पश्चिमी यूपी में जाट-किसान वोट बैंक को साधने और रालोद की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान मजबूत करने में जुटे हैं जबकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी इस इलाके में लगातार सक्रिय हैं. इससे साफ है कि 2027 में शामली जिले का मुकाबला भाजपा-रालोद गठबंधन बनाम सपा के बीच होने की संभावना है जो 2022 के मुकाबले पूरी तरह अलग तस्वीर होगी.

 

किस सीट पर किसका असर, समझे शामली का पूरा समीकरण

- कैराना सीट पर मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा समूह है. इसके बाद दलित और जाट मतदाता भी यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

- थाना भवन सीट पर  जाट और मुस्लिम मतदाताओं का मजबूत गठजोड़ है. साथ ही यहां सैनी व दलित समाज भी अहम भूमिका में हैं.

- शामली सीट की बात करें तो ये इलाका जाट बहुल है. इसके अलावा यहां पंजाबी, वैश्य और मुस्लिम मतदाता भी नतीजों में बड़ी भूमिका निभाते हैं.

FAQ

Q. शामली जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं?
A. शामली जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं, जिनके नाम हैं कैराना, थाना भवन और शामली.

Q. शामली की कौन-सी सीट आरक्षित है?
A. जिले की तीनों सीटें सामान्य श्रेणी की हैं, यहां कोई भी सीट अनुसूचित जाति या जनजाति के लिए आरक्षित नहीं है.

Q. 2022 चुनाव में शामली जिले में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं थीं?
A. सपा-रालोद गठबंधन ने यहां तीनों सीटें जीतीं थीं. 

Q. शामली जिले की आबादी में हिंदू और मुस्लिम समुदाय का हिस्सा कितना है?
A. जनगणना 2011 के अनुसार शामली तहसील में हिंदू आबादी करीब 67 प्रतिशत है, जबकि कैराना तहसील में मुस्लिम आबादी करीब 53 प्रतिशत है.

Q. जिले में किस पार्टी का ऐतिहासिक तौर पर दबदबा रहा है?
A. कैराना सीट पर लंबे समय से हसन परिवार का प्रभाव रहा है, जबकि थाना भवन और शामली जैसी जाट बहुल सीटों पर भाजपा और रालोद के बीच बारी-बारी से मुकाबला होता रहा है.

Q. 2027 के चुनाव से पहले फिलहाल राजनीतिक माहौल कैसा है?
A. 2022 में गठबंधन में रहकर भाजपा को हराने वाली रालोद अब खुद भाजपा के साथ एनडीए गठबंधन में है, इसलिए 2027 में जिले का मुकाबला भाजपा-रालोद गठबंधन बनाम सपा के बीच होने की संभावना है, जो पिछले चुनाव से बिल्कुल अलग समीकरण होगा.

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