सेबी डेरिवेटिव्स के लिए एक्सपायरी-डे पर क्लोजिंग प्राइस निर्धारण पद्धति में बदलाव की तैयारी कर रहा है, शुरुआती दौर में तरलता संबंधी चुनौतियां रहीं: सेबी प्रमुख
मुंबई, 10 सितंबर (आईएएनएस)। सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने गुरुवार को कहा कि बाजार नियामक डेरिवेटिव्स अनुबंधों के एक्सपायरी दिवस पर क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) के तहत क्लोजिंग प्राइस तय करने की मौजूदा पद्धति की समीक्षा कर रहा है और इसमें जरूरी बदलावों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि सीएएस व्यवस्था को लागू करने के शुरुआती चरण में विशेष रूप से तरलता (लिक्विडिटी) से जुड़ी कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।
मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के दूसरे दिन बोलते हुए पांडे ने स्पष्ट किया कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन व्यवस्था जारी रहेगी और इसे वापस लेने का कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि समय के साथ इसकी कार्यप्रणाली अधिक सुचारु हुई है और बाजार भागीदारों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है।
पांडे ने बताया कि वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई ने भी हाल में हुए सूचकांक पुनर्संतुलन (इंडेक्स रीबैलेंसिंग) को सीएएस फ्रेमवर्क के तहत सफल और सुचारु रूप से संपन्न होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि नई प्रणाली धीरे-धीरे प्रभावी होती जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी नए ढांचे की तरह सीएएस के शुरुआती कार्यान्वयन के दौरान तरलता की समस्या देखी गई थी। हालांकि समय के साथ इसमें सुधार आया है। उन्होंने कहा, शुरुआत में लिक्विडिटी एक चुनौती थी, लेकिन समय के साथ बाजार में लिक्विडिटी का निर्माण होता है और व्यवस्था अधिक स्थिर हो जाती है।
सेबी प्रमुख ने अपने संबोधन में वित्तीय बाजारों में तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से एजेंटिक एआई प्रणालियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस नई तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ नियामकों और बाजार भागीदारों को इसके उपयोग की स्पष्ट सीमाएं और नियम तय करने होंगे।
पांडे ने कहा कि एजेंटिक एआई के संदर्भ में यह स्पष्ट होना चाहिए कि उसे किस प्रकार की जानकारी तक पहुंच मिलेगी, उसकी स्वायत्तता का स्तर क्या होगा, कौन-सी गतिविधियां उसके लिए अनुमत होंगी और उसकी निर्णय प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी प्रणालियों के लिए कुछ कठोर सीमाएं निर्धारित करना भी आवश्यक है ताकि यह स्पष्ट रहे कि एआई क्या नहीं कर सकता।
उन्होंने बताया कि उत्पादन स्तर पर उपयोग होने वाली प्रत्येक एआई प्रणाली में ऑडिट योग्य रिकॉर्ड, अनुसंधान आधारित सत्यापन और बदलावों का विस्तृत लॉग उपलब्ध होना चाहिए। इससे जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी और किसी भी निर्णय या त्रुटि की समीक्षा करना आसान होगा।
तुहिन कांता पांडे ने कहा कि वित्तीय बाजारों के विकास के लिए नवाचार और सुरक्षा को एक-दूसरे का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा, तेजी से बढ़ना और सुरक्षित तरीके से बढ़ना परस्पर विरोधी लक्ष्य नहीं हैं।
सेबी चेयरमैन ने आगे कहा, किसी भी बाजार की स्थायी प्रगति तभी संभव है जब नवाचार के साथ निवेशकों का विश्वास भी बना रहे। भरोसा तभी मजबूत होता है जब वित्तीय प्रणाली लचीली, पारदर्शी और सुरक्षित हो।
सेबी चेयरमैन ने कहा कि नियामकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसा संतुलित ढांचा तैयार करने की है जो तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करे, लेकिन साथ ही निवेशक संरक्षण, बाजार की निष्पक्षता और वित्तीय स्थिरता जैसे मूलभूत सिद्धांतों को भी सुरक्षित रखे।
--आईएएनएस
डीबीपी
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क्या होता है मैच सिमुलेशन टेस्ट? क्रिकेट के मैदान पर किस तरह करता है काम, जानिए इसकी पूरी डिटेल्स
Match Simulation Test : भारतीय क्रिकेट टीम दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में से एक हैं. भारत ने वनडे वर्ल्ड कप और टी20 वर्ल्ड कप में भी अपनी बादशाहत दिखाई है. भारत का घरेलू क्रिकेट भी काफी मजबूत है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) एक ही समय पर कई टीमें बना सकती है. ऐसा भारतीय क्रिकेट में कई दफा हुआ है, जब इंडियन क्रिकेट टीम एक ही समय में दो देशों के साथ सीरीज खेल रही होती है.
ऐसा ही इस बार एशियन गेम्स 2026 में होगा, जब भारतीय क्रिकेट टीम एशियन गेम्स में हिस्सा लेगी. उसी वक्त वो भारत में वेस्टइंडीज के साथ घरेलू क्रिकेट खेल रही होगी. इस स्थिति में भारतीय क्रिकेट टीम एक समय पर दो जगह पर मुकाबले खेल रही होगी. भारतीय क्रिकेट की बेंच स्ट्रेंथ इतनी मजबूत है कि, एक ही समय पर 2 से 3 टीमें बनाकर तैयार की जा सकती हैं. ये सभी टीमें मैन टीम की तरह पर प्रदर्शन कर सकती हैं.
चोट बनती है खिलाड़ियों की राह में रोड़ा
आज भारतीय क्रिकेट में अनगिनत खिलाड़ी हैं, जो टीम इंडिया के लिए लगातार क्रिकेट के मैदान पर अपना दम दिखा रहे हैं. ये सभी खिलाड़ी लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं. पर इन खिलाड़ियों के लिए थोड़ी मुश्किल भी खड़ी हो जाती है, क्योंकि जब ये खिलाड़ी लगातार टीम इंडिया के लिए क्रिकेट खेलते हैं तो चोटिल भी होते हैं. चोट लगने के चलते इनके करियर पर ब्रेक लग जाता है. ऐसे में उन्हें रिकवरी में काफी समय लग जाता है.
भारत के चोटिल हुए खिलाड़ी लगातार दोबारा से फिट होने के लिए और मैच फिटनेस हासिल करने के लिए पसीना बहाते हैं. इंडियन क्रिकेट के सभी खिलाड़ी बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) में कड़ी मेहनत करने के बाद अपने आप को फिट करते हैं. ये खिलाड़ी पहले 100 प्रतिशत ठीक होने पर टीम के लिए खेल सकते थे. अब नए नियम और शर्तों के अनुसार खिलाड़ी को क्लियरेंस तभी मिलेगा, जब वो 200% फिट हो जाएगा.
COE में होती है प्लेयर की असली परीक्षा
सीओई में कड़ी मेहनत करने के साथ-साथ इन खिलाड़ियों को अपनी फिटनेस साबित करने के लिए कई टेस्ट देने पड़ते हैं. इनमें कई सारे टेस्ट शामिल हैं, जिनमें यो-यो टेस्ट, ब्रॉन्को टेस्ट समेत कई अन्य टेस्ट भी शामिल हैं. अब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से फिटनेस क्लियरेंस मिलने के लिए इन खिलाड़ियों को एक और परीक्षा से गुजरना पड़ेगा. इसका नाम मैच सिमुलेशन टेस्ट (Match Simulation Test) है.
भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को भी टीम इंडिया में अफगानिस्तान के खिलाफ 13 सितंबर से शुरू होने वाली 3 मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले इस परीक्षा से गुजरना पड़ा था. बुमराह ने भी मैच सिमुलेशन टेस्ट पार किया. उनको 9 सितंबर को बेंगलुरु स्थिति सीओई में मैच सिमुलेशन टेस्ट से गुजरना पड़ा था.
???? UPDATE ON JASPRIT BUMRAH ⏳
— Johns. (@CricCrazyJohns) September 9, 2026
- Bumrah is likely to undergo match simulation test today ahead of the Afghanistan T20I series. [Sports Today] pic.twitter.com/q4IPl8BLJj
अब बुमराह इसे पार करके अफगानिस्तान सीरीज में जगह बना चुके हैं. ऐसे में आज हम आपको मैच सिमुलेशन टेस्ट (Match Simulation Test) के बारे में बताने वाले हैं. ये टेस्ट क्या होता है और कैसे काम करनता है. इसमें क्या-क्या होता है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
क्या होता है मैच सिमुलेशन टेस्ट?
मैच सिमुलेशन टेस्ट क्रिकेट के मैदान पर आने से पहले खिलाड़ियों के लिए एक टेस्ट होता है. ये बिल्कुल असल मैच की तरह होता है. इसमें खिलाड़ियों को अपनी फिटनेस का प्रमाण दिया जाता है. मैच सिमुलेशन टेस्ट क्रिकेट में किसी खिलाड़ी या पूरी टीम को असली मैच जैसी परिस्थितियों में अभ्यास कराने के लिए तैयार किया जाता है. इसमें खिलाड़ी सिर्फ नेट्स में गेंदबाजी या बल्लेबाजी नहीं करते बल्कि उनको मैच के दबाव और परिस्थितियों में खुद को तैयार करने का मौका असली मैच से पहले मिल जाता है.
Indian bowling Coach said "Gill is improving on Day by day basis. We will take a call on the morning of the test. He played well in the match simulation in the build up, so fingers crossed". [RevSportz] pic.twitter.com/7UVApnNtHw
— Johns. (@CricCrazyJohns) November 20, 2024
कैसे काम करता है मैच सिमुलेशन टेस्ट?
- इस मैच सिमुलेशन टेस्ट में 2 टीमें बनाई जाती हैं. इसमें एक टीम मुख्य खिलाड़ियों की और दूसरी टीम रिजर्व/स्थानीय खिलाड़ियों शामिल होते हैं.
- इसमें पूरा मैच या निर्धारित समय का खेल कराया जाता है. इससे खिलाड़ियों को टेस्ट होता है, ये सिमुलेशन टेस्ट 1 या 2 दिन चल सकता है.
- इस मैच सिमुलेशन टेस्ट का उद्देश्य खिलाड़ियों के लिए मैच जैसा माहौल बनाना होता है.
- इसमें बल्लेबाजों मैच जैसी परिस्थितियों में बल्लेबाजी करनी होती है. वहीं गेंदबाजों को स्पेल में गेंदबाजी कराई जाती है, ताकि उनका वर्कलोड देखा जा सके.
- इस मैच सिमुलेशन टेस्ट के दौरान पूरी तरह से मैच के जैसे खिलाड़ियों को फील्डिंग, रनिंग, विकेट के बीच दौड़ और कैचिंग भी करनी होती है.
- इसमें कोच और फिजियो देखते हैं कि खिलाड़ी थकान, दबाव और लंबे समय तक खेलने को कैसे संभाल रहा है. क्या वो वैसे ही खेल रहा है, जैसा मैच के दौरान खेलता है.
- इस मैच सिमुलेशन टेस्ट को खिलाड़ी के पूरा करने के बाद टीम मैनेजमेंट तय करता है कि, प्लेयर मैच खेलने के लिए फिट और तैयार है या नहीं.
Same bowler, same batter, same exact first-ball result ????
— BCCI (@BCCI) July 26, 2026
Mayank Yadav dismisses Brian Bennett on the very first ball... AGAIN ????
Updates ▶️ https://t.co/oApMpI6eRc#TeamIndia | #ZIMvIND pic.twitter.com/SkfYVRzWEh
क्यों लिया जा रहा है खिलाड़ियों का मैच सिमुलेशन टेस्ट?
भारतीय क्रिकेटर्स चोट के बाद फिट होकर टीम में वापसी करते हैं और वो मैच खेलने के बाद फिर से चोटिल हो जाते हैं. ऐसे कई उदाहरण हैं. जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा और वाशिंगटन सुंदर जैसे कई खिलाड़ी चोट के बाद टीम इंडिया में वापस आए और फिर से चोटिल हो गए. अब खिलाड़ी को 200 प्रतिशत फिट होना होगा, तब ही वो टीम में वापसी कर पाएगा. अब बीसीसीआई खिलाड़ियों की पूरी फिटनेस चैक करने के लिए उनका मैच सिमुलेशन टेस्ट ले रही है.
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