कपड़ा निर्माता सोनासेलेक्शन इंडिया का 141.6 करोड़ रुपये का IPO 17 सितंबर से खुलेगा, ₹94-99 तय हुआ प्राइस बैंड
राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित प्रमुख एकीकृत कपड़ा विनिर्माण और प्रसंस्करण कंपनी 'सोनासेलेक्शन इंडिया लिमिटेड' (Sonaselection India Limited) अपने 141.6 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के साथ शेयर बाजार में कदम रखने जा रही है। कंपनी ने अपने इस सार्वजनिक निर्गम के लिए 94 से 99 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। कंपनी ने बृहस्पतिवार को सार्वजनिक घोषणा में कहा कि आईपीओ 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा। बड़े (एंकर) निवेशक 16 सितंबर को शेयरों के लिए बोली लगा सकेंगे।
भीलवाड़ा मुख्यालय वाली कंपनी के आईपीओ में 1.43 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे जिनकी कीमत मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर पर 141.57 करोड़ रुपये बैठती है। इसमें बिक्री पेशकश (ओएफएस) शामिल नहीं है। नए शेयरों की बिक्री से प्राप्त राशि का इस्तेमाल कर्ज चुकाने, कंपनी की विनिर्माण इकाई में संयंत्र और मशीनरी खरीदने तथा सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए किया जाएगा।
वर्ष 2022 में स्थापित सोनासेलेक्शन इंडिया टेक्सटाइल सेक्टर की एक उभरती हुई एकीकृत विनिर्माण और प्रसंस्करण कंपनी है। इसका मुख्य विनिर्माण ढांचा और परिचालन केंद्र राजस्थान के टेक्सटाइल हब भीलवाड़ा में स्थित है। कर्ज मुक्त होने और नई मशीनरी के साथ अपनी विनिर्माण क्षमता का विस्तार करने की योजना से कंपनी को उम्मीद है कि शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद उसकी वित्तीय स्थिति और बाजार हिस्सेदारी दोनों में मजबूती आएगी।
Supreme Court ने Delhi Metro के 17 स्टेशन बंद करने पर केंद्र और DMRC से मांगा जवाब
उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन के दौरान 17 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर बृहस्पतिवार को केंद्र, दिल्ली पुलिस और अन्य से जवाब मांगा। जुलाई में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल के आसपास 17 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और सुरक्षा प्रतिबंध लगाए जाने से मध्य दिल्ली में यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई थी। कई जगहों पर यात्रियों को घंटों फंसे रहना पड़ा था और कई लोगों को लंबे तथा अधिक खर्च वाले वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा था।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अधिवक्ता स्पर्शकांत नायक की ओर से दायर याचिका पर केंद्र, दिल्ली पुलिस, दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) और अन्य को नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह याचिका आम जनता के संवैधानिक अधिकारों और सार्वजनिक सेवा को बंद करने के संबंध में तय संवैधानिक मानकों से जुड़ी है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे आदेश जारी करने के लिए कोई विशेष कानून भी नहीं है।
वास्तव में कोई आदेश पारित ही नहीं किया गया था। जनता को फैसले की जानकारी देने के लिए केवल सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए थे।’’ न्यायमूर्ति बागची ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि आम तौर पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए संबंधित पुलिस कानूनों के तहत पुलिस आयुक्त या पुलिस अधीक्षक द्वारा निर्देश जारी किए जाते हैं। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि मेट्रो रेल अधिनियम के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत किसी मेट्रो स्टेशन को बंद किया जा सके।
इसके बाद शीर्ष अदालत ने इस मामले में नोटिस जारी करने पर सहमति जताई।
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