किम जोंग उन ने विदेशी मिशनों में तैनात सैनिकों को सराहा, देशभक्ति का दिया संदेश
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने देश के स्थापना दिवस पर विदेशी सैन्य अभियानों में तैनात अपने सैनिकों का विशेष आभार जताया और देश के प्रति निष्ठा तथा देशभक्ति की भावना मजबूत करने का संदेश दिया। उत्तर कोरिया ने बुधवार को अपना 78वां स्थापना दिवस मनाया।
योनहाप ने बताया कि उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के अनुसार, प्योंगयांग में आयोजित एक कार्यक्रम में किम ने देश के विकास में योगदान देने वाले श्रमिकों और सैनिकों की सराहना की। उन्होंने विदेशों में सैन्य अभियानों में शामिल कमांडरों और सैनिकों के प्रति विशेष सम्मान और आभार व्यक्त किया।
किम के बयान को रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस की ओर से लड़ रहे उत्तर कोरियाई सैनिकों के संदर्भ में देखा जा रहा है। पश्चिमी देशों और दक्षिण कोरिया के अधिकारियों के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने 2024 के अंत से रूस की मदद के लिए करीब 14,000 से 15,000 सैनिक भेजे हैं। दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय खुफिया सेवा ने फरवरी 2026 में अनुमान लगाया था कि इनमें से करीब 6,000 सैनिक मारे गए या घायल हुए हैं।
उत्तर कोरिया और रूस के बीच सैन्य संबंध पिछले दो वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। प्योंगयांग ने रूस को सैनिकों और हथियारों की आपूर्ति की है, जबकि इसके बदले उसे आर्थिक सहायता और सैन्य तकनीक मिलने की बात दक्षिण कोरियाई खुफिया आकलनों में कही गई है।
किम की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उत्तर कोरिया और रूस अपने संबंधों को लगातार गहरा कर रहे हैं। हाल ही में दोनों देशों ने अपनी सीमा पर तुमेन नदी के ऊपर बने पहले सड़क पुल का उद्घाटन किया है। करीब एक किलोमीटर लंबे इस पुल से दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है।
स्थापना दिवस के अवसर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी किम जोंग उन को संदेश भेजकर दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। पुतिन ने रूस-उत्तर कोरिया साझेदारी को क्षेत्रीय सुरक्षा और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया।
किम का सैनिकों को सार्वजनिक रूप से धन्यवाद देना उत्तर कोरिया की उस नीति को भी दर्शाता है जिसमें देश की सुरक्षा, सैन्य ताकत और राष्ट्रीय एकजुटता को प्रमुखता दी जाती है। स्थापना दिवस के संदेश में उन्होंने देश के प्रति समर्पण और देशभक्ति को आगे भी मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया।
इस बीच, उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियां भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने हाल में बताया कि उत्तर कोरिया ने योंगब्योन में यूरेनियम संवर्धन की नई सुविधा तैयार की है और कांगसोन परिसर में भी संवर्धन क्षमता बढ़ाई है। आईएईए ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि इससे उत्तर कोरिया के हथियार-ग्रेड परमाणु सामग्री के उत्पादन में वृद्धि की आशंका है।
(DISCLAIMER: खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
पीएमएमएसवाई से देश में मछली उत्पादन को मिला बढ़ावा; निर्यात 73 हजार करोड़ रुपए के पार
नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) को गुरुवार को छह वर्ष पूरे चुके हैं और इस दौरान देश के मत्स्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मछली उत्पादन 2019-20 में रहे 141.64 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 197.75 लाख टन पर पहुंच गया। यह जानकारी गुरुवार को जारी की गई सरकारी फैक्टशीट में दी गई।
वहीं, मत्स्य निर्यात 2019–20 में रहे 46,663 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025–26 में 73,890 करोड़ रुपए हो गया, जो क्षेत्र की मजबूत वृद्धि को दर्शाता है।
फैक्टशीट में बताया गया कि सरकार 20,750 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ वर्ष 2020–21 से पीएमएमएसवाई कार्यान्वित कर रही है। सरकार ने पीएमएमएसवाई के तहत बजट अनुमान 2026–27 में रिकॉर्ड 2,500 करोड़ रुपए आवंटित करके अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जिससे मत्स्य अवसंरचना और आजीविकाओं को मजबूती मिली है।
11 अगस्त 2026 तक, 2020–21 से 2025–26 की अवधि के दौरान, मत्स्य पालन विभाग ने 21,394.88 करोड़ रुपए की मत्स्य पालन और जलीय कृषि परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें 9,510.89 करोड़ रुपए का केंद्रीय हिस्सा शामिल है। राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर दी गई ये मंजूरियां देशभर में अवसंरचना के विकास और मत्स्य क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने में सहायता कर रही हैं।
सरकारी बयान में आगे कहा गया कि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाकर, मूल्य श्रृंखला का आधुनिकीकरण करके, आजीविका के अवसर सृजित करके, आय में वृद्धि करके, निर्यात और सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) को बढ़ावा देकर, मछुआरों की सुरक्षा और कल्याण को मजबूत करके तथा मत्स्य प्रबंधन और विनियमन में सुधार करके पीएमएमएसवाई ने भारत के मत्स्य क्षेत्र को रूपांतरित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
पीएमएमएसवाई मछुआरों और मत्स्य पालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा उनकी सौदेबाजी की क्षमता बढ़ाने के लिए मछुआरा किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) की स्थापना हेतु वित्तीय सहायता भी प्रदान करती है। वित्तीय वर्ष 2021–22 से वित्तीय वर्ष 2025–26 तक, मत्स्य पालन विभाग ने देशभर में 2,195 एफएफपीओ की स्थापना के लिए 544.86 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिसमें इन्क्यूबेशन, प्रबंधन लागत और इक्विटी अनुदान के लिए सहायता शामिल है।
पीएमएमएसवाई के तहत, मत्स्य पालन विभाग ने जलवायु सुदृढ़ता को मजबूत करने और तटीय मछुआरा गांवों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 100 तटीय मछुआरा गांवों की पहचान जलवायु-सुदृढ़ तटीय मछुआरा गांवों (सीआरसीएफवी) के रूप में की है। यह पहल पीएमएमएसवाई के केंद्रीय क्षेत्र घटक के अंतर्गत लागू की जा रही है, जिसमें प्रति गांव 200 लाख रुपए की इकाई लागत है, जिसका पूर्ण वित्तपोषण सरकार द्वारा किया जाता है। इसके अंतर्गत तटीय मछुआरा समुदायों के लिए सुदृढ़ अवसंरचना, आजीविका और फसलोत्तर सुविधाओं हेतु सहायता प्रदान की जाती है।
--आईएएनएस
एबीएस
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