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TVK ने MK Stalin के दावों पर उठाए सवाल, MISA हिरासत का मांगा आधिकारिक सबूत

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) ने बृहस्पतिवार को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) प्रमुख एम. के. स्टालिन के वीडियो संबोधन पर पलटवार करते हुए उनसे अपने साथ हुए अत्याचारों के दावों के समर्थन में सबूत देने की मांग की। स्टालिन ने बृहस्पतिवार को करीब 10 मिनट का एक वीडियो संबोधन जारी किया, जिसमें उन्होंने कड़े कानून ‘मीसा’ के तहत अपनी हिरासत और जेल में बिताए समय का विस्तार से जिक्र किया। टीवीके ने इसे शासन से जुड़े प्रमुख मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए किया गया ‘‘सुनियोजित प्रयास’’ करार दिया और कहा कि स्टालिन ने अपने दावों के समर्थन में कोई प्रमाण पेश नहीं किया।

पार्टी की आईटी शाखा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ‘‘जेल में यातना झेलने वाले संघर्षशील नेता’’ की उनकी छवि ‘‘टूट गई है।’’ आपातकाल (1975-77) के दौरान आंतरिक सुरक्षा कानून (मीसा) के तहत स्टालिन की हिरासत को लेकर बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच टीवीके ने उनसे उनकी हिरासत के सबूत पेश करने की मांग की। पार्टी ने उनके वीडियो संबोधन को ‘‘गिरती राजनीतिक छवि’’ को बचाने की कोशिश बताया और कहा कि इसके समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं दिया गया। यह विवाद हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा में हुए एक घटनाक्रम के बाद शुरू हुआ।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मीसा का जिक्र करते हुए अपने भाषण के दौरान हाथ से जबड़े की ओर इशारा किया था, जिसकी उनके सहयोगियों और राजनीतिक विरोधियों दोनों ने कड़ी आलोचना की थी। बाद में विजय ने स्पष्ट किया था कि यह इशारा अनजाने में हुआ था। हालांकि, द्रमुक सदस्यों ने इस इशारे पर कड़ी आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि विजय ने 1976 में मीसा के तहत हिरासत के दौरान पुलिस की कथित यातना से स्टालिन की जबड़े की हड्डी टूटने का मजाक उड़ाया।

इसके जवाब में स्टालिन ने बृहस्पतिवार को करीब 10 मिनट का एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने जेल में अपने संघर्ष का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने टीवीके सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की आलोचना की और सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। टीवीके की आईटी शाखा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया चैनल पर प्रतिक्रिया देते हुए स्टालिन के वीडियो संबोधन की तकनीकी प्रस्तुति और उसमें किए गए ऐतिहासिक दावों, दोनों पर सवाल उठाए और कहा कि इसमें प्राथमिक दस्तावेजी साक्ष्यों का अभाव है।

उसने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ खाते पर कहा, ‘‘हालांकि यह वीडियो काफी लंबा है, लेकिन इसमें किए जा रहे, आपातकाल के दौरान राजनीतिक हिरासत से जुड़े ऐतिहासिक दावों की पुष्टि के लिए कोई आधिकारिक ‘हिरासत प्रति’ न तो पेश की गई है और न ही दिखाई गई है।’’ टीवीके की आईटी शाखा ने आरोप लगाया कि वीडियो जारी करने का समय मौजूदा नीतिगत बहसों और सवालों से जनता का ध्यान भटकाने के उद्देश्य से चुना गया।

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Cervical Cancer से बचाव के लिए HPV Vaccination जरूरी, Supreme Court ने अभियान के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए किशोरियों के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण अभियान पर चिंता जताई गई थी। कोर्ट ने कहा कि गलत तरीके से टीकाकरण होने के मामलों में मुआवज़े से जुड़े सामान्य नियम ही लागू होंगे। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच 'यूनिवर्सल हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन' की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में सरकार समर्थित कार्यक्रम को लागू करने के तरीके को चुनौती दी गई थी। जब कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, तो याचिकाकर्ता के वकील ने इसे वापस ले लिया और मामला वापस लिए जाने के कारण खारिज कर दिया गया।

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सुनवाई के दौरान बेंच ने पूछा, क्या आप अपनी याचिका वापस लेना चाहते हैं? क्या आप चाहते हैं कि हम किसी बात पर टिप्पणी करें? इसके बाद बेंच ने कहा, हमसे कड़ी टिप्पणी करने के लिए न कहें। अगर याचिकाकर्ता डॉक्टर हैं, तो यह बहुत ही गंभीर मामला है। यह हमारी लाखों बेटियों की सेहत का सवाल है। और आप इसे पटरी से उतारना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि यह याचिका गलत मकसद से दायर की गई थी और इसमें नेक नीयत की कमी थी। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वे सिर्फ़ वैक्सीन के बुरे असर और मुआवज़े का मुद्दा उठा रहे हैं, न कि HPV वैक्सीन का विरोध कर रहे हैं। वकील ने कहा मैं वैक्सीन के ख़िलाफ़ बिल्कुल नहीं हूँ। मेरा पहला तर्क इसके लागू करने के तरीके को लेकर है। दूसरा, इसके बुरे असर (एडवर्स इवेंट) से निपटने का कोई सिस्टम नहीं है। जब भी कोई बुरा असर हो, तो उसकी निगरानी होनी चाहिए। साथ ही, मुआवज़े की कोई योजना भी होनी चाहिए।

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याचिका में आरोप लगाया गया था कि टीकाकरण कार्यक्रम को लागू करने से जानकारी के आधार पर सहमति, शरीर पर अपना अधिकार, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसी संवैधानिक गारंटियों का उल्लंघन हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी को राजस्थान के अजमेर से 14 साल की लड़कियों के लिए देशव्यापी HPV टीकाकरण अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के तहत सिंगल-डोज़ वाली गार्डसिल 4 वैक्सीन (एक क्वाड्रिवेलेंट HPV वैक्सीन) का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह HPV के टाइप 16 और 18 (जो सर्वाइकल कैंसर का कारण बनते हैं) के साथ-साथ टाइप 6 और 11 से भी सुरक्षा देती है। आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गलत टीकाकरण के मामलों में मुआवज़े के नियम लागू होंगे और याचिकाकर्ता को HPV टीकाकरण अभियान को लागू करने के खिलाफ दायर याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

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  Sports

एक ही T20I मैच में 3 बार हैट्रिक से चूका, फिर भी 8 विकेट लेकर रचा इतिहास, 22 साल के गेंदबाज का अटूट वर्ल्ड रिकॉर्ड

unbreakable cricket record: भूटान के सोनम येशे के नाम टी20 इंटरनेशनल मैच में सबसे ज्यादा विकेट चटकाने का रिकॉर्ड है. 22 साल के इस स्पिन गेंदबाज ने पिछले साल म्यांमार के खिलाफ यह कीर्तिमान नाम किया. अकेले ही इस युवा स्टार ने 8 बल्लेबाजों को आउट करके इतिहास रच दिया था. Fri, 11 Sep 2026 15:32:03 +0530

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