ट्रंप के लिए अमेरिका से खतरे की घंटी आ रही है। ईरान युद्ध ने मुश्किलें बढ़ाई। लोकप्रियता पर सवाल उठे और अब मिड टर्म चुनाव में कांग्रेस हाथ से निकलने का खतरा। अमेरिकी आउटलेट एक्सस के अनुमान ने ट्रंप की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर मौजूदा रुझान नतीजों में बदले तो डेमोक्रेट्स से प्रतिनिधि सभा में 230 सीटों तक पहुंच सकते हैं। जबकि रिपब्लिकन 205 सीटों पर सिमट सकते हैं। यानी ट्रंप राष्ट्रपति रहेंगे लेकिन संसद में उनके खिलाफ बहुमत खड़ा हो सकता है। अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन यानी सीनेट (Senate) की कुर्सी पर कब्ज़े के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। 100 सीटों वाले इस सदन में रिपब्लिकन्स 53 सीटों के साथ आगे हैं, जबकि डेमोक्रेट्स 47 पर टिके हुए हैं। अब सारा खेल उन 9 कांटे की टक्कर वाले राज्यों पर टिका है, जहाँ डेमोक्रेट्स को सत्ता पलटने के लिए 4 सीटें छीननी हैं, और रिपब्लिकन्स को अपनी साख और बहुमत दोनों बचाए रखने हैं। 100 सदस्यों वाली सीनेट में इस समय रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सीटें और डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 47 सीटें (इंडिपेंडेंट मिलाकर) हैं। बहुमत हासिल करने के लिए किसी भी पार्टी को 51 सीटों की आवश्यकता है। कुल 35 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं (13 डेमोक्रेट और 22 रिपब्लिकन सीटें)। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इनमें से केवल 9 सीटों पर बेहद कड़ा मुकाबला है: मेन, ओहियो, मिशिगन, अलास्का, टेक्सास, जॉर्जिया, आयोवा, नॉर्थ कैरोलिना और न्यू हैम्पशायर।
कांग्रेस का गणित बदला तो क्या होगा?
अभी प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन के पास 218 सीटें हैं और डेमोक्रेट्स के पास 214। अंतर सिर्फ चार सीटों का है। मिड टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर चुनाव होना है। अगर डेमोक्रेट्स ने बढ़त हासिल की तो कांग्रेस का नियंत्रण बदल सकता है और इसका सीधा असर ट्रंप की सरकार पर पड़ेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति के पास व्यापक कार्यकारी शक्तियां हैं। लेकिन कानून और बजट को मंजूरी दिलाने के लिए कांग्रेस का समर्थन जरूरी है। यानी डेमोक्रेट्स बहुमत में आए तो ट्रंप के एजेंडे पर रोक लग सकती है। बड़े विधेयकों से लेकर बजट तक हर मुद्दे पर टकराव बढ़ेगा।
ईरान युद्ध बना चुनौती
व्हाइट हाउस में ट्रंप और कैपिटल हिल पर विपक्ष यही स्थित उनके लिए सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती होगी। इस चुनौती को और बड़ा कर रहा है ईरान युद्ध। ट्रंप को उम्मीद थी कि संघर्ष जल्दी खत्म होगा लेकिन युद्ध लंबा खींच गया। इसके चलते उनकी सरकार पर दबाव बढ़ा है और लोकप्रियता पर भी असर पड़ने की बात सामने आ रही है। मिड टर्म चुनाव में अगर यही नाराजगी वोट में बदलती है तो रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान हो सकता है। हालांकि ट्रंप की पार्टी ने चुनावी नक्शे को अपने पक्ष में करने की कोशिश की है। परसीमन के जरिए रिपब्लिकन को करीब नौ सीटों का संभावित फायदा मिलने का अनुमान है। लेकिन अगर डेमोक्रेट्स की बढ़त 230 सीटों तक पहुंचती है तो यह फायदा भी तस्वीर बदलने के लिए नाकाफी साबित हो सकता है। ईरान युद्ध का दबाव और घरेलू राजनीति की नाराजगी दोनों का फैसला अब अमेरिकी वोटर कर सकता है।
डेमोक्रेट्स के लिए चुनौती
डेमोक्रेट्स को सीनेट पर दोबारा कब्ज़ा करने के लिए रिपब्लिकन पार्टी से 4 सीटें छीननी होंगी। इसके साथ ही उन्हें अपनी सबसे कमज़ोर समझी जाने वाली दो मौजूदा सीटें (मिशिगन और जॉर्जिया) भी बचानी होंगी।
रिपब्लिकन्स की स्थिति और टाई-ब्रेकर
रिपब्लिकन पार्टी 3 सीटें गंवाकर भी 50 सीटों के साथ नियंत्रण में रह सकती है। सीनेट में 50-50 का टाई होने पर उपराष्ट्रपति (जेडी वेंस) के पास निर्णायक वोट डालने का अधिकार होता है, जिससे रिपब्लिकन्स का दबदबा बना रहेगा।
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