काले और नीले सोलर पैनल में क्या होता है अंतर? खरीदने से पहले जानें दोनों के बारे में
अगर आप अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने की योजना बना रहे हैं तो बाजार में आपको अलग-अलग रंग और तकनीक वाले पैनल देखने को मिल सकते हैं. इनमें काले और नीले रंग के सोलर पैनल सबसे आम हैं. पहली नजर में दोनों में सिर्फ रंग का अंतर दिखाई देता है, लेकिन वास्तव में इनकी तकनीक, बिजली पैदा करने की क्षमता, जगह की जरूरत और कीमत में भी अंतर होता है. इसलिए सोलर पैनल खरीदने से पहले इनके बारे में जानना जरूरी है.
नीले सोलर पैनल कैसे होते हैं?
नीले रंग के सोलर पैनल आमतौर पर पॉलीक्रिस्टलाइन तकनीक पर आधारित होते हैं. इन्हें बनाने में सिलिकॉन के कई क्रिस्टल का इस्तेमाल किया जाता है. यही तकनीकी संरचना पैनल को नीला रंग देती है. पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल की बिजली उत्पादन क्षमता करीब 15 से 17 प्रतिशत बताई गई है. इन पैनलों को समान मात्रा में बिजली पैदा करने के लिए अपेक्षाकृत ज्यादा जगह की जरूरत पड़ सकती है. इनकी कीमत काले पैनलों की तुलना में कम होती है, इसलिए सीमित बजट वाले लोगों के लिए ये एक विकल्प हो सकते हैं.
काले सोलर पैनल क्यों होते हैं?
काले रंग के सोलर पैनल आमतौर पर मोनोक्रिस्टलाइन तकनीक से बनाए जाते हैं. इसमें एक ही सिलिकॉन क्रिस्टल का इस्तेमाल किया जाता है. इसी वजह से पैनल का रंग काला दिखाई देता है. मोनोक्रिस्टलाइन पैनलों की क्षमता करीब 18 से 22 प्रतिशत बताई गई है. लेख के अनुसार, कम धूप या बादल वाले मौसम में भी ये अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं. इसके अलावा, समान क्षमता के लिए इन्हें पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल की तुलना में कम जगह की जरूरत हो सकती है.
किस पैनल से ज्यादा बिजली मिलती है?
बिजली उत्पादन क्षमता की बात करें तो दिए गए आंकड़ों के मुताबिक काले यानी मोनोक्रिस्टलाइन पैनल आगे हैं. इनकी क्षमता लगभग 18-22 प्रतिशत है, जबकि नीले यानी पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल की क्षमता करीब 15-17 प्रतिशत बताई गई है. इसका मतलब यह है कि अगर घर की छत पर जगह कम है और अधिक क्षमता वाला सिस्टम लगाना है, तो मोनोक्रिस्टलाइन पैनल एक बेहतर विकल्प हो सकता है. हालांकि अंतिम चुनाव करते समय केवल दक्षता ही नहीं, बल्कि कीमत और उपलब्ध जगह को भी ध्यान में रखना चाहिए.
कौन-सा सोलर पैनल महंगा है?
कीमत की बात करें तो काले यानी मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल महंगे होते हैं. वहीं नीले यानी पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल तुलनात्मक रूप से सस्ते होते हैं. इसलिए कम बजट में सोलर सिस्टम लगाने वाले ग्राहक पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल को विकल्प के तौर पर देख सकते हैं.
खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
सोलर पैनल खरीदते समय सिर्फ उसका रंग देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. सबसे पहले यह देखें कि आपकी छत पर कितनी जगह उपलब्ध है, आपको कितनी बिजली की जरूरत है और आपका बजट कितना है. इसके साथ पैनल की तकनीक, क्षमता और लंबे समय तक प्रदर्शन जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी है.
यानी कम बजट और ज्यादा जगह उपलब्ध होने पर नीला पैनल विकल्प हो सकता है, जबकि कम जगह में अधिक क्षमता की जरूरत होने पर काला पैनल ज्यादा उपयुक्त हो सकता है. सही विकल्प आपकी जरूरत और बजट पर निर्भर करेगा.
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