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राष्ट्रपति ट्रंप ने मिड टर्म चुनाव में चला रेवड़ियां बांटने का दांव, हर वोटर को लाखों रुपये देने का किया वादा

US Presidential Midterm Elections: युद्ध के साथ ही अमेरिका में मध्यावधि (मिड टर्म) चुनाव की तैयारियां चल रही हैं. राष्ट्रपति ट्रंप भी अपनी पार्टी रिपब्लिकन के लिए प्रचार में जुटे हुए हैं. चुनाव जीतने के लिए ट्रंप ने फ्री रेवड़यिां बांटने का कल्चर अपनाया है. भारत में ये ट्रेंड अक्सर हर राजनीतिक पार्टी अपनाती दिखाई पड़ती है. ट्रंप ने हर नागरिक के लिए लाखों रुपये बांटने का एलान कर दिया है.

मध्यावधि चुनावों की दौड़ तेज होने के साथ ही अमेरिका के डलास में राष्ट्रपति ट्रंप ने रिपब्लिकन सम्मेलन को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि यदि रिपब्लिकन नवंबर में जीत हासिल करते हैं तो वह संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रत्येक वयस्क नागरिक को 5000 अमेरिकी डॉलर का लाभांश जारी करेंगे. उन्होंने ये टिप्पणियां 2026 के रिपब्लिकन सम्मेलन के दौरान मुख्य भाषण देते हुए कीं. अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन के तहत अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. ट्रंप ने 5000 अमेरिकी डॉलर के भुगतान की घोषणा करते हुए दावा किया कि अमेरिका "बहुत पैसा कमा रहा है.

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Pithori Amavasya Vrat Katha: पिठोरी अमावस्या पर पढ़ें 8 भाइयों की मृत्यु वाली यह व्रत कथा, कैसे मां को मिले अपने पुत्र?

Pithori Amavasya Vrat Katha: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि की तरह अमावस्या तिथि को भी बेहद खास माना जाता है. आज यानी 10 सितंबर 2026 को पिठोरी अमावस्या का व्रत रखा जाता है. इस दिन पितरों के स्मरण, स्नान, दान और पूजा-पाठ करने के लिए भी दिन को बेहद खास माना जाता है. पिठोरी अमावस्या को कई स्थानों पर पोला या पोलाला अमावस्या भी कहते हैं. मान्यता है कि इस दिन पर महिलाएं खासतौर पर अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-शांति के लिए व्रत रखती है. ऐसे में यदि आपने भी पिठोरी अमावस्या का व्रत रखा है तो उसका पूरा फल प्राप्त करने हेतू इसकी व्रत कथा का पाठ अवश्य करें. इस कथा में एक मां को बार-बार अपनी संतान की मृत्यु का दुख झेलना होता है. एक के बाद एक, हर वर्ष में उसके सातों पुत्रों की मौत हो जाती है. चलिए पढ़ते हैं यह प्रचलित व्रत कथा.

पिठोरी अमावस्या की पौराणिक व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने माता पार्वती से निवेदन किया कि-हे पार्वती जी! जिस सर्वोत्तम व्रत का पालन करने से निपुत्री को पुत्र तथा इस लोक में एवं परलोक में अत्यन्त श्रेष्ठ पुण्यफल प्राप्त हो, ऐसे व्रत का वर्णन करने की कृपा करें.

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इंद्राणी ने माता पार्वती से पूछा व्रत का महत्व

माता पार्वती ने उत्तर दिया- "पूर्वकाल में एक अत्यंत धनवान ब्राह्मण था, जिसका नाम श्रीधर था. उसके आठ पुत्र थे. उसकी धर्मपत्नी का नाम सुमित्रा था जो सदैव गृहधर्म के अनुरूप ही आचरण करती थी. उसके ज्येष्ठ पुत्र का नाम शंकर था एवं उसकी विदेहा नामक एक पत्नी थी. अज्ञात कारणों से शंकर की पत्नी के गर्भ से उत्पन्न संतान जन्म लेते ही मृत्यु को प्राप्त हो जाती थी. एक समय की बात है, श्रीधर के पिता के श्राद्ध के दिन विदेहा प्रसूता हुई एवं मृत शिशु को जन्म दिया. इस पर उसकी मां सुमित्रा ने विदेहा को बहुत डांटा. मां की डांट से चिंतित होकर विदेहा मृत शिशु को लेकर वन की ओर चल पड़ी. वह वन में मृत शिशु को लेकर निराश्रय होकर इधर-उधर भटक रही थी.

मठ में पहुंची विदेहा, योगिनियों से मिली मदद की उम्मीद

कुछ समय पश्चात् उसे एक मठ दिखाई दिया. वहां एक विशाल नदी भी थी. वह जाकर उसी मठ में बैठ गई. मठ में उपस्थित सभी लोग आश्चर्यपूर्वक उसे बारम्बार देखने लगे एवं विचार करने लगे कि - 'सभी सुलक्षणों से युक्त यह स्त्री कौन है एवं कहां से आयी है?' मठ के स्वामियों ने शीघ्र ही आपस में विचार-विमर्श करके विदेहा से कहा कि- 'यहां भयंकर एवं विकराल यक्ष निवास करते हैं. तू यहां से अन्यत्र चली जा अन्यथा वे सभी तेरा भक्षण कर लेंगे.'

यह सुनकर विदेहा बोली कि- 'हे प्रभो! मैं दुखों से पीड़ित हो वन-वन भटक रही हूं, मेरा अन्यत्र कोई आश्रय नहीं है. वे यक्ष भी भला मेरा क्यों ही भक्षण करेंगे? मेरा कल्याण कैसे हो, कृपया मार्गदर्शन करें.'

चौंसठ योगिनियों के बारे में मठ की स्त्री ने बताया

विदेहा की व्यथा सुनकर मठ की मुख्य स्त्री सदय हृदय से बोली - 'इस स्थान पर चौंसठ योगिनी एवं दिव्य योगी आदिक निवास करते हैं. वे सभी पूजा-अर्चना करने हेतु यहां उपस्थित होते हैं. यदि उनसे प्रार्थना करोगी तो वे तुम्हारे कार्य को अवश्य पूर्ण कर देंगे. वे तेरे बालकों को भी जीवित कर देंगे. इस समय तुम बेलपत्रों में छुप जाओ. जब वे पूछें, कोई अतिथि है? उस समय "है" कहकर उनके समक्ष प्रकट हो जाना.' मठनारी के वचन सुनकर विदेहा को दृढ़ विश्वास हो गया तथा वह उनके निर्देशानुसार बेलपत्रों में छुपकर बैठ गयी. कुछ समय पश्चात् ही वे सभी झोटिंग अर्थात् बड़े-बड़े केशों वाले यक्ष मठ के मध्य में उपस्थित हुये. उन्हें मनुष्य की गंध की अनुभूति हुई तो वे बोले - 'घर में मनुष्य की गंध कहां से आ रही है?' वह इस प्रकार चर्चा कर ही रहे थे कि सुन्दर मन्दहास वाली चौंसठ योगिनी मध्यरात्रि में वहां उपस्थित हो गई. वे अनेकों महारत्न एवं नाना प्रकार के फलों से वहां विराजमान मठदेवी की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने लगीं. उस दिन भाद्रपद कृष्ण अमावस्या थी.

भाद्रपद अमावस्या की रात मठ में पहुंचीं चौंसठ योगिनियां

पूजन सम्पन्न करके वह बोली कि - 'कोई अतिथि है क्या?' यह सुनते ही "मैं हूं" कहकर विदेहा उनके सम्मुख प्रकट हो गयी. विदेहा ने योगनियों से अपनी व्यथा वर्णित करते हुये निवेदन किया कि - 'हे माताओं! मैं पापिन बन गई, मेरे शिशु की मृत्यु हो गयी, मैं उस शिशु सहित आपके समक्ष उपस्थित हूं, इसी प्रकार मेरे सात बालक हुये एवं मृत्यु को प्राप्त हो गये, इसी कारण मैं अत्यंत दुखी हूं. आज मेरे सौभाग्य से आपका दर्शन हुआ है. आपकी कृपा से मेरे बालक जीवित हो जायें तथा भविष्य में जन्म लेने वाले शिशुओं की मृत्यु न हो, ऐसी कृपा करें.'

विदेहा की प्रार्थना से प्रसन्न हुईं चौंसठ योगिनियां

विदेहा के करुण वचन सुनकर योगनियों को अत्यन्त दया आयी, उन्होंने वहां जो नैवेद्य रखा हुआ था वह विदेहा को प्रदान कर दिया. चौंसठ योगिनी उससे प्रसन्न होकर बोलीं कि - 'हे श्रीधर की पुत्रवधू! शंकर की प्राणप्यारी! हमारा यह वरदान है कि इस लोक में तू पुत्र-पौत्रादि का सुख भोगकर स्वर्गलोक में पूज्य होगी. तेरे आठों पुत्र जीवित होकर तेरे समीप अभी उपस्थित होंगे, तुम जिस मार्ग से आई हो उसी से लौट जाओ.' इस प्रकार वर प्रदान कर योगनी अन्तर्धान हो गई.

योगिनियों ने दिया वरदान, जीवित हो गए विदेहा के आठों पुत्र

उसी समय आठों पुत्र जीवित होकर विदेहा के समीप आ गये. वह योगनियों का ध्यान करती हुयी अपने नगर एवं घर आ गयी. श्रीधर, सुमित्रा, शंकर एवं उसके भ्राता विदेहा को आठ पुत्रों सहित आते देख अत्यन्त प्रसन्न हुये तथा मंगल उत्सव सहित उसका स्वागत-सत्कार किया. पुत्रवधू एवं पुत्रों को पुनः प्राप्त कर उनके कुटुम्ब में सभी आनन्दित हुये. तदुपरान्त विदेहा ने पिठोरी अमावस के दिन ब्राह्मणों द्वारा मंत्रपाठ, ढोलक, नगाड़े, मृदंग आदि की ध्वनि, गायन, वादन एवं नृत्य आदि अनेक प्रकार के मंगलाचार सहित श्रद्धापूर्वक एक साथ चौंसठों योगिनियों का पूजन किया.

आठ पुत्रों के साथ घर लौटी विदेहा

इन योगनियों के स्मरण मात्र से स्त्री को पुत्र, पौत्र एवं धन-सम्पदा की प्राप्ति होती है तथा वह इन्द्राणी के समान सुखी हो जाती है. हे इन्द्राणि! उनके नामों का श्रवण करो जो इस प्रकार हैं -दिव्ययोगी, महायोगी, सिद्धयोगी, गणेश्वरी, प्रेताक्षी, डाकिनी, काली, कालरात्रि, निशाचरी, झकारी, रौद्रवेताली, भुत्तली, भूतडंवरी, ऊर्ध्वकेशी, विरूपाक्षी, शुष्कांगी, नरभोजिनी, भट्टारी, वीरभद्रा, धूम्राक्षी, कलहप्रिया, राक्षसी, घोरक्ताक्षी, विश्वरूपा, भयंकरी,  चण्डिका, वीरकौमारी, वाराही, मुण्डधारिणी, सासुरी, रोद्रग्रहणी, चक्री, कंकाली, भुवनेश्वरी, खट्वांगी, दीर्घलम्बोष्टी, मालिनी, मन्त्रयोगिनी, कालाग्निहणी, चित्रिणी, कंकाली, भुवनेश्वरी, कटकी, कीटिनी, रौद्री, यमदूती, गरालिनी, कोराक्षी, कार्मुकी, काकदृष्टि, अधोमुखी, मुण्डाग्रधारिणी, व्याघ्री, किंकिनी, प्रेतभाषिणी, कालरूपा, कामाक्षी, उष्ट्रिणी, योगपीठिका, महालक्ष्मी, एकवीरा, कालरात्रि, पीठिका एवं गान्धारी, ये चौसठ योगिनियां हैं. इन्हीं नामों से श्रद्धा एवं भक्तिभाव से इनका पूजन करना चाहिये. इनसे प्रार्थना करते हुये कहें कि- 'मैं आप चौंसठ देवियों की शरण में हूं, मैंने पुत्र एवं लक्ष्मी की वृद्धि की कामना से भक्तिपूर्वक आपका पूजन किया है.

इस व्रत को करने वाली स्त्रियां चौंसठ योगिनियों की कृपा से पुत्र एवं पौत्रों से युक्त हो जायेंगी. इस प्रकार भविष्यपुराण में वर्णित पिठोरी व्रत सम्पूर्ण होता है.

चौंसठ योगिनियों की पूजा का क्या है महत्व?

सनातन धर्म में और तांत्रिक परंपरा में इन चौंसठ योगिनियों की पूजा का अत्यधिक महत्व होता है. खासतौर पर पिठोरी अमावस्या जैसे विशेष पर्वों के दिन इसकी महत्वता अधिक बढ़ जाती है. इस दिन चौंसठ योगिनियों का श्रद्धापूर्वक पूजन करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है. विशेष रूप से महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से इनका पूजन करती हैं.

धार्मिक मान्यता है कि चौंसठ योगिनियां देवी शक्ति के विभिन्न स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं. इनका पूजन करने से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. पिठोरी अमावस्या की व्रत कथा में भी विदेहा ने चौंसठ योगिनियों की आराधना कर अपनी संतान के लिए वरदान प्राप्त किया था.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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