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क्या मोहनलाल की 'दृश्यम 3' की रीमेक है अजय देवगन की 'Drishyam The Conclusion'? एक्टर ने खुद बताई सच्चाई

Drisyam 3 VS Drishyam The Conclusion: अजय देवगन (Ajay Devgn) की क्राइम थ्रिलर 'दृश्यम द कन्क्लूजन' का फैंस लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, तो फाइनली खत्म होने वाला है. हाल ही में फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया जिसनें फैंस की एक्साइटमेंट को और भी ज्यादा बड़ा दिया है. अब दृश्यम फ्रेंचाइजी की शुरुआत मलयालम सिनेमा से हुई थी और इसके पहले दोनों हिंदी पार्ट मोहनलाल की फिल्मों के रीमेक थे, ऐसे में फैंस जानना चाहते हैं कि क्या ' 'दृश्यम द कन्क्लूजन' भी मोहनलाल की 'दृश्यम 3' की रीमेक है. तो चलिए जानते हैं.

अजय देवगन ने बताई सच्चाई

दरअसल,  'दृश्यम द कन्क्लूजन' को लेकर फैंस के बीच सवाल हैं कि क्या ये मोहनलाल की फिल्म की रीमेक होने वाली है. ऐसे में अजय देवगन ने खुद लोगों की कन्फ्यूजन दूर कर दी है. उन्होंने फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान अजय देवगन ने साफ किया कि दृश्यम का तीसरा पार्ट मलयालम फिल्म के सीन-टू-सीन से कॉपी नहीं होगा. अजय देवगन ने कहा- 'हमारी फिल्म मलयालम 'दृश्यम 3' से बिल्कुल अलग है. ऐसा नहीं है कि हमने बस कुछ बदलाव किए हैं.कहानी नई है.'

मोहनलाल से की ये रिक्वेस्ट

इतना ही नहीं अजय देवगन ने ये तक कहा कि वो चाहते हैं कि मोहनलाल और निर्देशक जीतू जोसेफ भी हिंदी फिल्म देखें और इस अलग कहानी पर अपनी राय दें. अजय बोलें- 'मैं चाहता हूं कि लाल सर (मोहनलाल) और उनकी टीम हमारी फिल्म देखें. क्योंकि अगर वे इसे मंजूरी देते हैं तो मुझे बहुत खुशी होगी. मैं उन्हें ये फिल्म दिखाने के लिए बहुत एक्साइटेड हूं.' बता दें, ट्रेलर से पहले ही हिंट मिल गया था कि हिंदी वर्जन की कहानी अलग है. अब अजय देवगन के इस बात को कंफर्म कर दिया है.

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कैसा है 'दृश्यम द कन्क्लूजन' का ट्रेलर?

 'दृश्यम 3’ में एक बार फिर अजय देवगन विजय सालगांवकर के किरदार में नजर आ रहे हैं. हालांकि, इस बार उसके सामने एक नया और बेहद मजबूत पुलिस अफसर जयदीप अहलावत (Jaideep Ahlawat) यानि एसपी क्राइम ब्रांच राजवीर सिंह तोमर खड़े हैं. फिल्म की कहानी ‘दृश्यम 2’ के बाद की कहानी को आगे बढ़ाती है. इस बार विजय के लिए मुश्किलें पहले से कहीं ज्यादा बढ़ती दिखाई दे रही हैं. वहीं प्रकाश राज की एंट्री इस बार हुई है जो काफी दिलचस्प है. ट्रेलर में पुराने राज फिर से सामने आते दिख रहे हैं और कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब अभी बाकी हैं.

क्या थी मोहनलाल की 'दृश्यम 3' की कहानी?

मोहनलाल की 'दृश्यम 3' में कहानी दृश्यम 2 की घटना के कुछ साल बाद की दिखाई गई है. जॉर्जकुट्टी और उसका परिवार वरुण की मौत के राज के साथ अपनी जिंदगी आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अतीत उनका पीछा नहीं छोड़ता. नए सबूत, पुराने गवाह और परिवार पर बढ़ता मानसिक दबाव कहानी को आगे बढ़ाते हैं. फिल्म में जॉर्जकुट्टी सिर्फ कानून से नहीं, बल्कि अपने परिवार को टूटने से बचाने की लड़ाई भी लड़ता है. आखिर में वो इस राज को हमेशा के लिए खत्म करने की कोशिश करता है, लेकिन कहानी ऐसा मोड़ लेती है जिससे  ये मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और उसके परिवार का डर अब भी बना हुआ है.

 'दृश्यम द कन्क्लूजन' की स्टारकास्ट

‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ में अजय देवगन, तब्बू, श्रिया सरन, रजत कपूर और जयदीप अहलावत के अलावा प्रकाश राज, कमलेश सावंत, इशिता दत्ता और मृणाल जाधव जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे. फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है. फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले पर अभिषेक पाठक के साथ आमिल कीयन खान और परवेज शेख ने काम किया है.
मेकर्स का दावा है कि ये फिल्म ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी का सबसे बड़ा और आखिरी चैप्टर होने वाला है. ये फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.

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HPV वैक्सीन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, बिना वैज्ञानिक आधार के दावों पर जताई नाराजगी

Supreme Court News: किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए दी जाने वाली HPV वैक्सीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने वैक्सीनेशन को लेकर बिना पर्याप्त वैज्ञानिक शोध के दावे किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि इस तरह के दावों का असर लाखों बेटियों के स्वास्थ्य से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम पर पड़ सकता है.

याचिका में HPV वैक्सीनेशन के तरीके और वैक्सीन के बाद सामने आने वाली संभावित प्रतिकूल घटनाओं को लेकर चिंता जताई गई थी. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि उनका पक्ष किसी भी तरह से वैक्सीन विरोधी नहीं है. उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य चिंता वैक्सीनेशन कार्यक्रम को लागू करने के तरीके और वैक्सीन लेने के बाद किसी प्रतिकूल प्रभाव की स्थिति में निगरानी की व्यवस्था को लेकर है.

वकील ने अदालत के सामने कहा कि अगर वैक्सीनेशन के बाद किसी तरह की प्रतिकूल घटना सामने आती है तो उसकी उचित निगरानी होनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित व्यक्ति के लिए मुआवजे की व्यवस्था की जरूरत भी बताई. वकील ने कहा कि वह HPV वैक्सीन को लेकर किसी तरह की आपत्ति नहीं उठा रहे हैं और उनकी मांग केवल प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी तथा मुआवजे तक सीमित है.

कोर्ट ने मुआवजे को लेकर क्या कहा? 

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि अगर किसी मामले में गलत तरीके से वैक्सीनेशन किया गया है तो ऐसे मामले में सामान्य मुआवजा नियम लागू होंगे. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक मामले में वैक्सीन के प्रतिकूल प्रभाव को लेकर अलग तरह का विशेष प्रावधान नहीं बनाया जा सकता.

इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता के रुख पर सवाल उठाते हुए याचिका वापस लेने का विकल्प पूछा. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वह याचिका वापस लेने के लिए तैयार हैं और उनका उद्देश्य HPV वैक्सीनेशन कार्यक्रम को रोकना नहीं है.

बिना वैज्ञानिक आधार के दावों पर कोर्ट सख्त 

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि वैक्सीन के कारण किसी नुकसान का दावा करने के लिए वैज्ञानिक आधार होना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे दावों के जरिए किसी अन्य सरकारी योजना या स्वास्थ्य कार्यक्रम को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए.

CJI ने भी मामले की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि यह लाखों बेटियों के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है. अदालत ने चिंता जताई कि इस तरह की याचिका से वैक्सीनेशन कार्यक्रम में अनावश्यक देरी हो सकती है. याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ऐसी कोई मंशा नहीं है.

वहीं, जस्टिस मोहना ने भी बिना किसी शोध या वैज्ञानिक आधार के जनहित याचिका दाखिल किए जाने पर सवाल उठाया. अदालत ने साफ किया कि केवल PIL दाखिल करने के आधार पर बिना ठोस रिसर्च के कोई भी दावा अदालत के सामने नहीं रखा जा सकता.

याचिका वापस लेने की अनुमति 

सुनवाई के अंत में याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से किसी तरह की प्रतिकूल टिप्पणी नहीं करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि वह याचिका वापस ले रहे हैं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और मामले को खारिज कर दिया.

अदालत की पूरी सुनवाई में मुख्य जोर वैज्ञानिक प्रमाण, वैक्सीनेशन के बाद निगरानी और मुआवजे की व्यवस्था पर रहा. कोर्ट ने संकेत दिया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों को प्रभावित करने वाले दावों के लिए ठोस वैज्ञानिक आधार जरूरी है.

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