वैभव सूर्यवंशी रचेंगे आज इतिहास, सचिन, विराट, रोहित... जो इंडियन क्रिकेट में नहीं कर पाए वो कर दिखाएंगे
Vaibhav Sooryavanshi : वैभव सूर्यवंशी के पास इतिहास रचने का सुनहरा मौका है. आज भारत के 15 वर्षीय बाएं हाथ के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी क्रिकेट के मैदान पर इतिहास रचने के लिए उतरेंगे. वैभव सूर्यवंशी आज इंडियन क्रिकेट में वो कर सकते हैं, जो सचिन तेंदुलकर से लेकर विराट कोहली और रोहित शर्मा तक कोई नहीं कर पाया है. आज 15 साल के वैभव के पास खास उपलब्धि हासिल करने का मौका होगा. तो आइए उसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
दरअसल, इस समय ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच दलीप ट्रॉफी 2026 का फाइनल मैच खेला जा रहा है. चेन्नई के एम ए चिदंबरम स्टेडियम मुकाबले में खेले जा रहे इस मैच में वैभव सूर्यवंशी का बल्ला उम्मीद के मुताबिक तो नहीं चला लेकिन उन्होंने पहले पारी में फैंस का जमकर मनोरंजन किया. उन्होंने कुल मिलाकर इस मैच की दोनों पारियों में 52 रन बनाए.
वैभव सूर्यवशी ने दोनों पारियों में बनाए 52 रन
वैभव ने ईस्ट जोन की ओर से पहली पारी में 37 बॉल का सामना किया और 5 चौके और 1 छक्के के साथ 44 रनों की पारी खेली. इस पारी के दौरान उनका स्ट्राइक रेट 118.91 का रहा था. इसके बाद वैभव सूर्यवंशी दूसरी पारी में नहीं चले और वो 16 बॉल में 1 चौके की मदद से सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हो गए.
4️⃣,6️⃣,4️⃣
— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) September 6, 2026
Vaibhav Sooryavanshi on the charge with some delightful shots ????
The 50-run stand also comes up between Vaibhav and Abhimanyu Easwaran ????
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वैभव सूर्यवंशी का बल्ला भले ही इस मैच में उम्मीद के मुताबिक नहीं चला हो लेकिन अब उनके पास इतिहास रचने का मौका है. वो कौन सा इतिहास बनाएंगे और उनके नाम कौन सी खास उपलब्धि हासिल होगी. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
वैभव सूर्यवंसी आज रचेंगे इतिहास
वैभव सूर्यवंशी के पास आज इतिहास रचने का मौका होगा. ईस्ट जोन के दलीप ट्रॉफी 2026 का खिताब जीतते ही वैभव सूर्यवंशी सिर्फ 15 साल की उम्र में दलीप ट्रॉफी चैंपियन बनने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन जाएंगे. वो दलीप ट्रॉफी के चैंपियन बनने वाले 15 साल के पहले खिलाड़ी बन जाएंगे. इसके साथ ही वैभव ईस्ट जोन के लिए दलीप ट्रॉफी का खिताब जीने वाले भी 15 वर्षीय पहले प्लेयर बन जाएंगे. इससे पहले भारत का कोई भी खिलाड़ी इतनी कम उम्र में चैंपियन टीम में मौजूद नहीं रहा है. वैभव आज वो कर पाएंगे, जो सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली और रोहित शर्मा समेत भारत का कोई भी दिग्गज खिलाड़ी नहीं कर पाया है.
A SUPERSTAR IN MAKING - 15 year old Vaibhav Sooryavanshi ???? pic.twitter.com/KCKtoRWlZv
— Johns. (@CricCrazyJohns) August 31, 2026
कैसा रहा अब तक मैच का हाल
आज ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल मैच का पांचवां और अंतिम दिन है. आज हमें दलीप ट्रॉफी 2026 का विजेता मिल जाएगा. इस मैच में पहली पारी में ईस्ट जोन ने 163 ओवर में 10 विकेट खोकर 708 रन बनाए थे. इसमें ईशान किशन की 270 रनों की पारी शामिल थी.
इसके बाद साउथ जोन की टीम पहली पारी में 107.3 ओवर में 10 विकेट खोकर 336 रनों पर ढेर हो गई है. ईस्ट जोन के पहली पारी के आधार पर साउथ जोन पर 372 रनों की बढ़त बनाई. इसके बाद ईस्ट जोन दूसरी पारी में अब तक पांचवें दिन 57 ओवर में 5 विकेट पर 226 रन बना चुकी है. टीम की कुल बढ़त 569 हो चुकी है.
ऐसे में अगर ईस्ट जोन पहले सेशन में भी पारी घोषित करती है तो कम से कम साउथ जोन को 600 रनों का लक्ष्य मिलेगा. जो पाचंवें दिन की पिच पर बनना काफी मुश्किल होगा. ऐसे में ईस्ट जोन आसानी से ये मुकाबला जीत सकती है. वहीं अगर ये मैच ड्रॉ भी रहा तो पहली पारी में सबसे ज्यादा टोटल बनाने के आधार पर भी ईस्ट जोन को विजेता घोषित कर दिया जाएगा. ऐसे में वैभव सूर्यवंशी दोनों कंड़ीशन में 15 साल की उम्र में दलीप ट्रॉफी टीम का हिस्सा बन जाएंगे.
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सर्वांगासन-हलासन के बाद क्यों जरूरी है मत्स्यासन, जानिए काउंटर पोज का महत्व
नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। योग में हर आसन का अपना महत्व होता है, लेकिन इसका लाभ तभी मिलता है जब आसन को सही क्रम और संतुलन के साथ किया जाए। सर्वांगासन और हलासन योग के महत्वपूर्ण आसनों में गिना जाता है, लेकिन इन दोनों आसनों को करने के बाद शरीर में दबाव पड़ता है। इसी को ठीक करने के लिए मत्सासन को करना आवश्यक काउंटर-पोज यानी विपरीत आसन माना गया है।
हम आपको बताएंगे कि सर्वांगासन और हलासन के तुरंत बाद मत्स्यासन काउंटर-पोज (विपरीत आसन) करना आवश्यक क्यों होता है।
आयुष मंत्रालय और मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के दिशानिर्देशों के अनुसार, सर्वांगासन और हलासन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए बाद में मत्सासन करना बेहद जरूरी और अनिवार्य माना गया है। जब कोई भी साधक सर्वांगासन और हलासन का अभ्यास करता है, तो शारीरिक बदलाव आते हैं, जिन्हें सामान्य स्थिति में लाने के लिए मत्स्यायन एक पूरक आसन के रूप में काम करता है।
सर्वांगासन और हलासन दोनों ही इनवर्जन (उल्टे होने वाले) आसन हैं, जिनमें छाती आगे की तरफ झुकती है और ठुड्डी पूरी तरह से छाती से चिपक जाती है। मत्स्यायन में जब सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन पर टिकाकर रीढ़ और गर्दन को पीछे मोड़ा जाता है, तो यह जालंधर बंध के दबाव को तुरंत संतुलित कर देता है।
योग विशेषज्ञों के अनुसार, हलासन और सर्वांगासन के दौरान रीढ़ की हड्डी और गर्दन की पीछे की मांसपेशियों पर गहरा और तीव्र खिंचाव आता है। इससे गर्दन और पीठ के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियां अत्यधिक तनी हुई स्थिति में आ जाती हैं। मत्स्यासन रीढ़ को विपरीत दिशा में (पीछे की ओर) मोड़कर एक बेहतरीन काउंटर-स्ट्रेच देता है। इससे गर्दन, कंधों और रीढ़ की हड्डी की अकड़न व तनाव दूर होता है और मांसपेशियों का संतुलन वापस सामान्य हो जाता है।
इन दोनों आसनों में गर्दन और गले पर गहरा दबाव पड़ता है, जिससे शरीर में जकड़न आ सकती है। इसी जकड़न को खोलने और शरीर में संतुलन बनाए रखने के लिए मत्स्यासन को आवश्यक काउंटर-पोज यानी विपरीत आसन माना गया है।
योग विज्ञान का नियम है कि यदि शरीर को एक दिशा में गहराई से मोड़ा गया है, तो उसे सुरक्षित रखने के लिए विपरीत दिशा में मोड़ना (काउंटर -पोज) जरूरी है। सर्वांगासन और हलासन फॉरवर्ड बेंडिंग (गर्दन के लिए) हैं, तो मत्स्यासन उनका सटीक बैकवर्ड बेंडिंग इलाज है जो रीढ़ व गर्दन को चोटिल होने से बचाता है।
हालांकि, इन तीनों आसनों को करने से पहले किसी विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें और गंभीर बीमारी, हालिया सर्जरी, प्रेग्नेंट महिलाएं वाले व्यक्ति आसनों को करने से बचें।
--आईएएनएस
एनएस/पीएम
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