Khabardar with Sweta Singh: MCD के 5 अफसरों पर गिरी गाज, लेकिन क्या होगी कड़ी कार्रवाई? | Delhi
दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत गिरने से 7 लोगों की मौत के बाद MCD ने साउथ जोन के 5 अधिकारियों को सस्पेंड किया है। इनमें डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार समेत इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी शामिल हैं। हादसे के बाद MCD की बिल्डिंग निगरानी और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जब इमारत को सिर्फ दो फ्लोर की अनुमति थी तो पांच मंजिल कैसे बन गई? जर्जर और कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारत में PG कैसे चलता रहा? क्या सिर्फ अधिकारियों को सस्पेंड करना पर्याप्त है या जांच के बाद दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ FIR और कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए? इस पैकेज में निलंबन की कार्रवाई के साथ-साथ पुराने मामलों का इतिहास भी देखा गया है। सवाल यही है कि क्या सस्पेंशन के बाद मामला कुछ महीनों या वर्षों में खत्म हो जाएगा, या इस बार जिम्मेदारी तय करके दोषी पाए जाने वालों पर ऐसी कार्रवाई होगी जिसका फैसला अदालत करे। सत्य निकेतन हादसे में आखिर जवाबदेही सिर्फ बिल्डर और PG संचालक की है या सिस्टम की भी? #khabardar #swetasingh #delhibuildingcollapse #atwebvideos #aajtak #aajtakdigital #tvchunks satya niketan, satya niketan building collapse, satya niketan pg collapse, satya niketan latest news, satya niketan tragedy, delhi satya niketan, delhi building collapse, delhi building collapse latest, delhi pg collapse, delhi hostel collapse, mcd, mcd action, mcd demolition, mcd demolition drive, mcd bulldozer, mcd latest action, mcd corruption, Copyright Disclaimer under section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, education and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing. आजतक के साथ देखिये देश-विदेश की सभी महत्वपूर्ण और बड़ी खबरें | Watch the latest Hindi news Live on the World's Most Subscribed News Channel on YouTube. #LatestNews #Aajtak #HindiNews Aaj Tak News Channel: आज तक भारत का सर्वश्रेष्ठ हिंदी न्यूज चैनल है । आज तक न्यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। आज तक न्यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए बने रहें । #hindinews #newsinhindi #hindisamachar #breakingnews #aajtak #samachar #news अधिक समाचारों के लिए यहां क्लिक करें: https://www.youtube.com/@aajtak?sub_confirmation=1 About Channel: Aaj Tak is India's Best Hindi News Channel. Aaj Tak News Channel Covers The Latest News, Breaking News, Politics, Entertainment News, Business News and Sports News. Stay tuned for all the News in Hindi. Join Aaj Tak Whatsapp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029Va7Rxc32ER6hBAuIL222 Watch Our Prime Shows on Aaj Tak: Vardaat — Real-life crime stories that shook the nation https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa_WLJqwFuJlwfhAepqcOd3I&si=tJXqsrKVHOvxy4BJ Black & White with Anjana Om Kashyap - Big debates, sharp opinions, and political analysis https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa_aLomcIgk-c_dRhuYOBphp&si=1wAaQfSUIfZ0OrIy Halla Bol — The nation’s most powerful debate on today’s top issues https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa-ZT2YKfqzI-ayeZV0n8qAh&si=nnRN8_9u02p8QlG_ DasTak 2025: https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa9q68r5rws67UxSUdhcHupG&si=QMiiUiKyXUP76DUk ताज़ा खबरों और LIVE अपडेट्स के लिए जुड़े रहें Aaj Tak के साथ - https://youtube.com/live/Nq2wYlWFucg?feature=share https://youtube.com/live/gH6ftEJDLGo?feature=share Download Aaj Tak APP, India’s No.1 Hindi News App: https://play.google.com/store/apps/details?id=in.AajTak.headlines&hl=hi Subscribe to Aaj Tak YouTube Channel: https://www.youtube.com/c/aajtak Visit Aaj Tak website: https://www.aajtak.in/ Follow us on Facebook: https://www.facebook.com/aajtak Follow us on Twitter: https://twitter.com/aajtak Follow us on Instagram: https://www.instagram.com/aajtak/ Subscribe our other Popular YouTube Channels: India Today: https://www.youtube.com/c/indiatoday SoSorry: https://www.youtube.com/c/sosorrypolitoons Good News Today: https://www.youtube.com/c/GoodNewsTodayOfficial AajTak AI: https://www.youtube.com/channel/UClZU5ouD9LkfgrelmL2auTg
Uttrakhand News: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, डिजिटल निगरानी और बल्क वेस्ट जनरेटर की जवाबदेही पर जोर
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत बुधवार को प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), देहरादून की ओर से सचिवालय मीडिया सेंटर में ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई. इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026, लीगेसी वेस्ट/डंपसाइट रेमेडिएशन, कचरा पृथक्करण, वायु प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय निकायों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई.
सामूहिक भागीदारी से हासिल किया
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ.पराग मधुकर धकाते ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ कचरे की मात्रा में वृद्धि हो रही है. ऐसे में वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित दृष्टिकोण को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के साथ जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है. प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ वायु के लक्ष्य को केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि सामूहिक भागीदारी से हासिल किया जा सकता है.
वेस्ट जनरेटर्स की जिम्मेदारियां बढ़ाई
उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी नए नियमों में कचरे को चार धाराओं-गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा-में अलग करने पर जोर दिया गया है. साथ ही बल्क वेस्ट जनरेटर्स की जिम्मेदारियां बढ़ाई गई हैं और एक्सटेंडेड बल्क वेस्ट जनरेटर्स रिस्पांसिबिलिटी (EBWGR) की व्यवस्था की गई है. नियमों में कचरे के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान की ऑनलाइन निगरानी तथा डिजिटल पंजीकरण और रिपोर्टिंग का प्रावधान है. इसका उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के साथ कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग कर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है. लैंडफिल को अंतिम विकल्प के रूप में रखते हुए पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग को प्राथमिकता दी गई है.
कचरा पृथक्करण शुरू किया जा चुका
डॉ.धकाते ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड में 108 शहरी स्थानीय निकायों के अंतर्गत 1,314 वार्डों में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था है. राज्य में लगभग 1,515 वाहन उपलब्ध हैं और अतिरिक्त वाहनों की खरीद प्रक्रिया जारी है. चार-धारा पृथक्करण के लिए नए वाहनों में चार कंपार्टमेंट की व्यवस्था की जा रही है. राज्य में 1,225 वार्डों में स्रोत पर कचरा पृथक्करण शुरू किया जा चुका है. प्रतिदिन लगभग 1,930.85 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से 1,804.59 मीट्रिक टन (93.46 प्रतिशत) का प्रतिदिन प्रसंस्करण किया जा रहा है. राज्य में 61 लीगेसी वेस्ट/डंपसाइट चिन्हित हैं. इनमें लगभग 23.34 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से 12.70 लाख मीट्रिक टन (54.41 प्रतिशत) का उपचार किया जा चुका है. दिसंबर 2026 तक पुराने कचरे के उपचार और डंपसाइट रेमेडिएशन में तेजी लाने का लक्ष्य है. राज्य में 85 MRF, 663 NADEP/कम्पोस्ट पिट और 87 प्लास्टिक कॉम्पैक्टर संचालित हैं तथा 1,058 बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान की गई है. कचरा संग्रहण और परिवहन की निगरानी के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) लागू किया जा रहा है. प्रथम चरण में सभी नगर निगमों को इसके दायरे में लाया जा रहा है.
संबंधी निर्देशों का उल्लेख किया
प्रवीण कुमार, अपर निदेशक, शहरी विकास ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन संबंधी निर्देशों का भी उल्लेख किया गया. न्यायालय ने अनुपालन, BWGs की जवाबदेही, डिजिटल पंजीकरण, निगरानी और अनधिकृत डंपिंग पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया है. भारत ‘जीरो डंपसाइट’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है. डंपसाइट रेमेडिएशन के माध्यम से पुराने कचरे का वैज्ञानिक उपचार कर उसे सड़क निर्माण सामग्री, भरान सामग्री, रिसाइकल योग्य वस्तुओं और RDF जैसे उपयोगी संसाधनों में परिवर्तित किया जा रहा है. इससे वायु और भूजल प्रदूषण तथा डंपसाइट में आग की घटनाओं को कम करने में मदद मिलती है.
जनरेटर्स के कचरे का उचित प्रबंधन
उन्होंने कहा कि मेयर, पार्षदों और अन्य जनप्रतिनिधियों से नागरिकों को स्रोत पर चार स्तरीय कचरा पृथक्करण, प्लास्टिक के जिम्मेदार उपयोग और स्वच्छता नियमों के पालन के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया गया. RWA, होटल, रेस्तरां और अन्य बल्क वेस्ट जनरेटर्स के कचरे के उचित प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई. चारधाम और अन्य पर्यटन क्षेत्रों में बढ़ती तीर्थयात्रा एवं पर्यटन गतिविधियों को देखते हुए वहां कचरा संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन और वैज्ञानिक प्रसंस्करण की समुचित व्यवस्था के लिए विशेष योजना तैयार करने पर जोर दिया गया. स्वच्छ वायु और प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए सरकार, स्थानीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, संस्थानों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और नागरिकों की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है.
विशेष प्रावधान लागू किए गए हैं
कुमार ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों एवं द्वीपों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए विशेष प्रावधान लागू किए गए हैं. इनमें पर्यटकों से उपयोगकर्ता शुल्क वसूलना एवं उपलब्ध अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं के आधार पर स्थानीय निकायों द्वारा पर्यटकों के आगमन को नियंत्रित करना शामिल है. इन क्षेत्रों में गैर-बायोडिग्रेडेबल अपशिष्ट के लिए विशेष संग्रहण केंद्र स्थापित किए जाएंगे. स्थानीय लोगों को अपशिष्ट स्थानीय निकायों को सौंपने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और उन्हें कूड़ा फैलाने से रोका जाएगा. होटल और रेस्तरां एसपीसीबी या पीसीसी द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार गीले अपशिष्ट का विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण करेंगे. नियमों में प्रभावी रूप से लागू करने के लिए केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय समितियों की स्थापना का भी प्रावधान है. राज्य स्तर पर या केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर, राज्य के मुख्य सचिव या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के प्रमुख की अध्यक्षता वाली एक समिति केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन की सिफारिश करेगी.
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