गोरखपुर (उप्र), नौ सितम्बर सैनिक स्कूल गोरखपुर भारत का ऐसा पहला सह-शिक्षा विद्यालय बन गया है, जहां सभी विद्यार्थियों ने सीमित जल क्षेत्र में ‘स्कूबा डाइविंग’ का ‘फाउंडेशन कोर्स’ सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। स्कूल प्रशासन ने बुधवार को यह जानकारी दी। स्कूल द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक 460 छात्रों ने सितंबर 2026 में स्कूबा डाइविंग’ (सेल्फ कंटेंड अंडरवाटर ब्रीदिंग अपरेटस) प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया और सफलतापूर्वक पाठ्यक्रम पूरा किया।
बयान के अनुसार इन छात्रों में 11 से 17 वर्ष की उम्र के बीच की 110 लड़कियां और 350 लड़के शामिल थे। बयान के अनुसार यह प्रशिक्षण ‘स्कूबा डाइविंग फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ के तत्वावधान में प्रसिद्ध स्कूबा गोताखोर अर्चना सरदाना द्वारा आयोजित किया गया था। स्कूल के प्राचार्य कर्नल डी एस चौहान ने कहा कि यह उपलब्धि अनुभवात्मक शिक्षा और साहसिक शिक्षा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
उन्होंने कहा कि 30 छात्रों की एक चयनित टीम, जिसमें 10 लड़कियां और 20 लड़के शामिल हैं, वर्तमान में लक्षद्वीप के आगामी समुद्री अभियान की तैयारी के लिए उन्नत तैराकी और स्कूबा-डाइविंग प्रशिक्षण ले रही है। चौहान के अनुसार, लक्षद्वीप अभियान छात्रों को समुद्री वातावरण के लिए मूल्यवान अनुभव प्राप्त करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ‘स्कूबा-डाइविंग’ प्रमाणपत्र अर्जित करने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल छात्रों के बीच नेतृत्व, लचीलापन और टीम भावना को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें पानी के नीचे की खोज और महासागर संरक्षण से परिचित कराने के लिए तैयार की गई है।
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महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को 'वंदे मातरम' को लेकर चल रहे विवाद पर कांग्रेस पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता वोट-बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्रगीत का अपमान कर रहे हैं। बावनकुले ने कहा, "'वंदे मातरम' गाने से इनकार करके और उसका अपमान करके सोनिया गांधी, राहुल गांधी और उनकी पूरी पार्टी देश का अपमान कर रही है। 2029 में उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। जब वे जनता के सामने जाएंगे, तो लोग पूछेंगे कि वे ऐसी पार्टी को वोट क्यों दें जिसने 'वंदे मातरम' का अपमान किया।" उन्होंने कांग्रेस पर वोट-बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी 2014 के मुकाबले और भी बुरी स्थिति में पहुंच जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि अमलापुरम के मचावरम, मुम्मीदिवरम और रामचंद्रपुरम इलाकों में ज़मीनें 1908 (ब्रिटिश काल) से ही 22-A(1) के तहत रोक के दायरे में थीं और इन मुद्दों को सुलझाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने 56.37 एकड़ ज़मीन के मामले में कदम उठाए हैं, जिससे 1,410 लोगों को फ़ायदा हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उन रेवेन्यू रिकॉर्ड्स को ठीक कर रही है जिनमें पिछली सरकार के समय कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई थी और ज़मीन से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों को सुलझा रही है।
महाराष्ट्र के मंत्री ने कहा, वे वोट-बैंक की राजनीति कर रहे हैं और कांग्रेस पार्टी 2014 के मुकाबले और भी बुरी हालत में पहुँच जाएगी। अगर कोई भारत में रहना चाहता है, तो उसे 'वंदे मातरम' कहना ही होगा।" उनके ये बयान 'वंदे मातरम' गाने को लेकर शुरू हुए नए राजनीतिक विवाद के बीच आए हैं, जिसमें कांग्रेस और जम्मू-कश्मीर में उसकी सहयोगी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस मुद्दे पर अलग-अलग रुख अपनाया है। बीजेपी ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि गठबंधन के सहयोगी एक-दूसरे पर शर्तें नहीं थोप सकते। वन भूमि के अधिकारों का इंतज़ार कर रहे आदिवासी किसानों के मुद्दे पर बावनकुले ने कहा कि राज्य सरकार ने ज़मीन के मालिकाना हक़ के वितरण में हो रही देरी को एक गंभीर चुनौती माना है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को इसका तुरंत समाधान खोजने का निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा, ऐसे 1.5 से 2 लाख आदिवासी किसान हैं जिन्हें अभी तक ज़मीन के मालिकाना हक नहीं मिले हैं। इन सभी किसानों के हितों की रक्षा के लिए, हम प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन (17 सितंबर) से लेकर महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर) तक एक अभियान शुरू कर रहे हैं।" बावनकुले ने बताया कि सरकार ने उन सभी पात्र आदिवासी किसानों को तीन महीने के भीतर ज़मीन के अधिकार देने का फ़ैसला किया है, जिन्हें अभी तक ये अधिकार नहीं मिले हैं। महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में वन अधिकार रखने वाले किसानों के लिए भी कई उपायों की घोषणा की है, जिनमें उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए उठाए गए कदम भी शामिल हैं।
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