सीबीआई कोर्ट का बड़ा फैसला, कुशल डायमंड्स लिमिटेड और 2 निदेशकों को 5 साल की सजा
Kushal Diamonds Limited Fraud Case: आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के करीब 26 साल पुराने मामले में अहमदाबाद की सीबीआई अदालत ने कुशल डायमंड्स लिमिटेड और कंपनी के दो निदेशकों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है. अदालत ने निजी कंपनी M/s Kushal Diamonds Ltd. पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. वहीं कंपनी के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर बकुल जवेरी और निदेशक मजहर एस. कपाड़िया को 5-5 साल की कठोर कारावास (RI) की सजा के साथ 30-30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.
NSIC से 2.34 करोड़ रुपये की राशि ली गई थी
सीबीआई ने इस मामले में 15 मार्च 2000 को केस दर्ज किया था. मामले में नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (NSIC), अहमदाबाद के तत्कालीन अधिकारियों और कुशल डायमंड्स लिमिटेड के निदेशकों के बीच आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया था.
जांच में सामने आया कि NSIC ने Bill Discounting Facility और Raw Material Assistance Scheme के तहत कुशल डायमंड्स लिमिटेड को कुल 2,34,85,081 रुपये की राशि उपलब्ध कराई थी.
सीबीआई के मुताबिक, इस राशि में से करीब 1,34,88,717 रुपये पुराने बकाया के समायोजन, चेक/डिमांड ड्राफ्ट से प्राप्त भुगतान, विदेशी खरीदार से मिले भुगतान और अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट के समायोजन के रूप में एडजस्ट किए गए.
इसके बाद 31 मार्च 1996 को कुशल डायमंड्स लिमिटेड पर 99,96,364 रुपये की अंतिम बकाया राशि रह गई. सीबीआई ने इसे NSIC को हुआ गलत वित्तीय नुकसान (wrongful loss) बताया था.
2002 में दाखिल हुई थी चार्जशीट
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 8 जनवरी 2002 को आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. इनमें कुशल डायमंड्स लिमिटेड, कंपनी के तीन निदेशक, बकुल जवेरी, मजहर एस. कपाड़िया और सुभाष छन्नाना के अलावा NSIC के चार तत्कालीन अधिकारी शामिल थे. इन अधिकारियों में वीरेंद्र कुमार साव्हनी, रोहित ढींगरा, राम अवतार अग्रवाल और राजेश अरोड़ा के नाम शामिल थे.
चार सरकारी अधिकारियों को अदालत ने किया बरी
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने कुशल डायमंड्स लिमिटेड, बकुल जवेरी और मजहर एस. कपाड़िया को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई. हालांकि, NSIC के तत्कालीन अधिकारियों वीरेंद्र कुमार साव्हनी, रोहित ढींगरा, राम अवतार अग्रवाल और राजेश अरोड़ा को अदालत ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया.
वहीं, आरोपी निदेशक सुभाष छन्नाना की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ कार्यवाही को समाप्त (abated) कर दिया.
सजा का पूरा विवरण
M/s Kushal Diamonds Ltd. — 30 लाख रुपये जुर्माना
बकुल जवेरी, चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर — 5 वर्ष RI + 30 लाख रुपये जुर्माना
मजहर एस. कपाड़िया, निदेशक — 5 वर्ष RI + 30 लाख रुपये जुर्माना
वीरेंद्र कुमार साव्हनी — आरोपों से बरी
रोहित ढींगरा — आरोपों से बरी
राम अवतार अग्रवाल — आरोपों से बरी
राजेश अरोड़ा — आरोपों से बरी
सुभाष छन्नाना — मृत्यु के बाद उनके खिलाफ मामला समाप्त (abated)
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Flexi-Fuel गाड़ियों से Ethanol सम्मिश्रण E-20 से आगे ले जाएगी सरकार, Tarun Kapoor ने दी जानकारी
नयी दिल्ली, नौ सितंबर प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने बुधवार को कहा कि सरकार फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों के जरिये मौजूदा ई-20 स्तर से ज्यादा पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की अनुमति देने पर काम कर रही है। द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026 के चौथे संस्करण को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कपूर ने कहा कि ई-20 कार्यक्रम अबतक ‘बहुत सफल’ रहा है और कई वाहन कंपनियों ने जल्द ही फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां पेश करने की योजना की घोषणा की है। उन्होंने कहा, ‘‘अब हमारा ध्यान फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों पर है और ऐसी सम्मिश्रण की मंजूरी देना है जो ई-20 से ज्यादा हो।’’ उन्होंने कहा कि ऐसी गाड़ियों की पेशकश के साथ-साथ ईंधन बिक्री केंद्रों पर शुद्ध एथनॉल की उपलब्धता भी बढ़ानी होगी।
कपूर ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच जैव-ईंधन पर जोर देना और भी जरूरी हो गया है। इस संकट ने आपूर्ति में रुकावट डाली है और कच्चे तेल की कीमतों को लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा दिया है, साथ ही और बढ़ोतरी की आशंका भी बनी हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘यह जरूरी है कि हम देश में जो कुछ भी उपलब्ध है, उसका इस्तेमाल करने की कोशिश करें।’’ उन्होंने कहा कि देश में एथनॉल उत्पादन की क्षमता पेट्रोल में इसे मिलाने की जरूरतों से ज्यादा हो गई है, और इस अतिरिक्त क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के लिए उद्योग को एथनॉल के अन्य इस्तेमाल के तरीकों पर भी विचार करना होगा।
ई-20 को लेकर हालिया आलोचना का जवाब देते हुए कपूर ने कहा कि इसमें से ज्यादातर गलत जानकारी या ‘खास मकसद से की गई आलोचना’ के कारण थी। उन्होंने कहा कि अध्ययनों से पता चला है कि ई-20 अच्छा काम करता है और ईंधन क्षमता में थोड़ी-बहुत कमी की भरपाई ज्यादा ‘ऑक्टेन’ सामग्री से हो जाती है। डीजल खंड के बारे में कपूर ने कहा कि सरकार जैव-ईंधन एडिटिव्स पर विचार कर रही है।
उन्होंने कहा कि अगर आइसोब्यूटेनॉल के साथ किए जा रहे प्रयोग सफल होते हैं, तो यह जैव-ईंधन के लिए एक ‘बड़ा’ नया रास्ता खोल सकते हैं, क्योंकि रिफाइनरी उत्पादन में डीजल का बड़ा हिस्सा होता है। उन्होंने सरकार की नई गोवर्धन योजना का भी जिक्र किया, जो संपींडित बायोगैस (सीबीजी) को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों से मिलने वाले मदद को एक साथ लाती है। इस क्षेत्र में अब तक सीमित प्रगति हुई है।
कपूर ने एथनॉल बनाने वाली कंपनियों से सीबीजी उत्पादन और पोटाश जैसे दूसरे मूल्यवर्धित उप-उत्पादों के क्षेत्र में भी काम करने का आग्रह किया। कपूर ने कहा कि सरकार जैव-ईंधन क्षेत्र के लिए ‘पूरी तरह से प्रतिबद्ध’ है और यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी कि जैसे-जैसे बाजार का विस्तार हो, मौजूदा निवेश में कोई अनिश्चितता न आए।
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