Bundelkhand में ₹19.1 करोड़ से Israel के सहयोग वाला जल प्रोजेक्ट तेज
लखनऊ, नौ सितंबर बुंदेलखंड में जल संकट और जल संसाधनों की सीमितता के बीच उत्तर प्रदेश सरकार जल संरक्षण, सिंचाई दक्षता और आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने के लिए भारत-इजराइल बुंदेलखंड जल परियोजना को आगे बढ़ा रही है। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। अधिकारियों ने बताया कि झांसी के विकासखंड बड़ागांव स्थित गंगावली गांव में करीब 19.1 करोड़ रुपये की लागत से जारी मिनी पायलट प्रोजेक्ट में कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे हो चुके हैं, जिनमें जलाशय का अर्थवर्क और जियोमेम्ब्रेन लाइनिंग, सोलर पंप की स्थापना, नहर से जलाशय तक इंटेक पाइप और इंटेक वेल, पीयूएफ पैनल आधारित भवनों समेत कई प्रमुख काम पूरे किये जा चुके हैं।
नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं भूगर्भ जल विभाग के निदेशक डॉक्टर राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य बुंदेलखंड की स्थानीय जल उपलब्धता और कृषि परिस्थितियों के अनुसार ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिसमें उपलब्ध पानी का अधिकतम और वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया जा सके। उन्होंने बताया कि इस परियोजना में जल संरक्षण, जल भंडारण, सौर ऊर्जा, लघु सिंचाई, आधुनिक कृषि तकनीक और किसान प्रशिक्षण को एक साथ जोड़ा गया है। प्रजापति ने बताया कि इसके तहत जलाशय, नहर से पानी लाने की व्यवस्था, पाइपलाइन, सोलर पंप, ड्रिप-स्प्रिंकलर, प्राकृतिक एसटीपी, कृषि मशीनरी और आधुनिक खेती की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं और इसका मकसद किसानों को सीमित पानी में बेहतर सिंचाई और खेती का व्यावहारिक मॉडल उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि गंगावली में तैयार हो रहे मिनी पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों को आगे बड़े क्षेत्र में लागू करने की भी तैयारी है। भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियांता व वैयक्तिक सहायक निदेशक अनुपम ने कहा कि परियोजना के वर्तमान निर्माण एवं क्रियान्वयन चरण को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
Bhadohi Court के आदेश पर जाली हलफनामा दाखिल करने वाले 31 आरोपियों पर FIR दर्ज
भदोही (उप्र), नौ सितंबर भदोही जिले में एक महिला से कई बार सामूहिक दुष्कर्म की कथित घटना के आरोपियों को बचाने के लिये अदालत में जाली शपथ पत्र दाखिल करने के आरोप में 31 नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा न्यायालय के आदेश पर दर्ज किया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल ने बुधवार को बताया कि जिले के ऊंज थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने इसी साल छह जून को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आनंद मिश्रा की अदालत में एक याचिका दायर की थी।
इस याचिका की सुनवाई के बाद महिला से सामूहिक दुष्कर्म और अदालत में झूठे शपथ पत्र देकर गुमराह करने के आरोप में राज पति बिंद नामक व्यक्ति सहित 31 नामजद लोगों और कुछ अज्ञात के विरुद्ध अदालत ने मंगलवार को ऊंज थाना पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। उन्होंने बताया कि यह मुकदमा भारतीय दंड विधान की धाराओं 181, 186, 191, 192, 193, 195, 196 (सभी झूठे बयान/सबूत से संबंधित धाराएं), 120—बी (आपराधिक साजिश), 419, 420 (धोखाधड़ी) और 466, 467, 468, 471 (सभी जालसाजी और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित धाराएं) के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार वर्ष 2020 में ऊंज थाना क्षेत्र के एक गांव में 45 वर्षीय और पेशे से श्रमिक महिला से उसके घर के अंदर कथित तौर पर कई बार दुष्कर्म किया गया था।
महिला ने आरोप लगाया था कि मनोज, अरविंद और पांच अन्य लोग उसके घर में घुसे, हथियारों के बल पर उसे धमकाया और फिर उससे दुष्कर्म किया। आरोप के मुताबिक बाद में कई अन्य लोग भी दुष्कर्म की इस घटना में कथित तौर शामिल हो गए। उन्होंने बताया कि पीड़ित महिला की शिकायत के आधार पर ऊंज थाने में सामूहिक दुष्कर्म और आपराधिक धमकी देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी।
अग्रवाल ने बताया कि जांच के दौरान शुरू में आरोपियों की ओर से दिए गए हलफनामों के साथ आरोपपत्र दाखिल किया गया था, मगर पीड़ित महिला का बयान दर्ज नहीं किया गया और न ही उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया था। उन्होंने बताया कि इसके बाद पीड़िता की याचिका पर अदालत ने नए सिरे से जांच का आदेश दिया। अग्रवाल ने कहा कि दूसरी जांच के दौरान भी पुलिस ने कथित तौर पर झूठे और मनगढ़ंत हलफनामों पर भरोसा किया जिसमें बिना किसी वकील के हस्ताक्षर के दाखिल किए गए दस्तावेज भी शामिल थे और इसके बाद पुलिस ने 30 अक्टूबर 2021 को अदालत के समक्ष अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं के कारण महिला और उसके बच्चों को सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ा। पुलिस ने बताया कि महिला ने अंतिम रिपोर्ट का फिर से विरोध किया जिसके बाद अदालत ने भारतीय दंड विधान की धारा 200 के तहत उसका बयान दर्ज किया। अग्रवाल ने बताया कि इसके बाद अदालत ने महिला से सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों में प्रथम दृष्टया सत्यता पायी और अभियोजन पक्ष को कार्यवाही आगे बढ़ाने की अनुमति दी।
बाद में छह जून 2026 को महिला ने फिर से अदालत का रुख किया और आरोप लगाया कि अधिकारियों ने आरोपी की मदद की थी और अदालत को गुमराह करने और उसके बयान को दबाने के लिए झूठे हलफनामों का इस्तेमाल किया था। इस शिकायत के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस को राजपति बिंद और 30 अन्य नामजद लोगों के साथ-साथ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मामले की अब विस्तृत जांच की जा रही है।
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