एशियन गेम्स के 10 दिन पहले नागोया में बाढ़:400 खिलाड़ी-स्टाफ उंची जगह पर भेजे गए; मेयर बोले- मुकाबले तय समय पर होंगे
एशियन गेम्स की शुरुआत से 10 दिन पहले जापान के नागोया में बाढ़ की वजह से कुछ समय के लिए 400 खिलाड़ियों और स्टाफ को कुछ समय के लिए ऊंची जगह पर ले जाया गया। बाढ़ में नागोया शहर की सड़कें और घर पानी में डूब गए। हालांकि मेयर इचिरो हिरोसावा का कहना है कि एशियन गेम्स के लिए कोई चिंता की बात नहीं है। टूर्नामेंट का आयोजन तय समय पर होगा। 3500 लोगों ने इमरजेंसी शेल्टर में शरण ली बस और मेट्रो सेवाएं कुछ समय के लिए प्रभावित रहीं। करीब 3,500 लोगों ने इमरजेंसी शेल्टर में शरण ली। नागोया और इची में एशियन गेम्स 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने हैं। रिपोर्ट- वेन्यू में कुछ जगह छतों से पानी टपक रहा जापानी मीडिया में शहर की सड़कों और मेट्रो स्टेशनों में भरे पानी की तस्वीरें दिखाई गईं। न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, वेन्यू की कुछ जगहों पर छतों से पानी टपकने की घटनाएं भी हुईं। हालांकि मेयर हिरोसावा ने कहा कि एशियन गेम्स के दर्जनों वेन्यू को गंभीर नुकसान नहीं हुआ है। भारत गेम्स में 768 सदस्यीय दल भेज रहा भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम 19 सितंबर को रवाना होगी डिफेंडिंग चैंपियन भारत एशियन गेम्स के लिए टीम घोषित कर चुका है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम में युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी भी शामिल हैं। भारतीय टीम 19 सितंबर को सानो के लिए रवाना होगी। इसगे अगले दिन टीम प्रैक्टिस सेशन में हिस्सा लेगी। महिला क्रिकेट टीम पहले पहुंचेगी हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय महिला टीम दुबई में एशिया कप खेलने के बाद 13 सितंबर को भारत लौटेगी और 14 सितंबर को नागोया के लिए रवाना होगी। महिला टीम एशियन गेम्स में सीधे क्वार्टर फाइनल से अभियान शुरू करेगी। उसका पहला मुकाबला 18 सितंबर को होगा और टीम का टूर्नामेंट 22 सितंबर तक चलेगा। ------------------------- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… एशियाड में BCCI को खुद करनी होगी होटल की व्यवस्था:IOA ने कहा- अगर ऐसा हुआ तो रहने-खाने और ट्रांसपोर्ट की जिम्मेदारी बोर्ड की जापान में होने वाले एशियन गेम्स के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के लिए भारतीय ओलिंपिक संघ (IOA) अलग से होटल की व्यवस्था नहीं करेगा। अगर BCCI आयोजकों की ओर से तय होटलों के बजाय अपनी पसंद का होटल चुनता है, तो खिलाड़ियों के ठहरने, खाने, स्थानीय परिवहन और मैच वेन्यू तक पहुंचाने की जिम्मेदारी बोर्ड की होगी। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिकी कोच की 17 सेकेंड की स्पीच वायरल:सही से हारना नहीं सीखा तो जीत का मजा नहीं ले पाएंगे, एडवर्ड्स का मंत्र
खेल के मैदान में हार और जीत एक सिक्के के दो पहलू हैं, लेकिन असली सीख इस बात में छिपी होती है कि हार के बाद हम खुद को कैसे संभालते हैं। अमेरिका की एक लिटिल लीग बेसबॉल टीम के कोच कोरी एडवर्ड्स का 17 सेकंड का भाषण इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है। 2026 लिटिल लीग वर्ल्ड सीरीज के फाइनल में हार की कगार पर खड़ी अपनी टीम के 12 साल के खिलाड़ियों को उन्होंने ऐसी सीख दी, जो खेल से कहीं आगे जिंदगी में भी काम आती है। एडवर्ड्स ने बच्चों से कहा कि नतीजा चाहे जो हो, उन्हें सिर ऊंचा रखना है, एक-दूसरे पर गुस्सा नहीं करना है और अपनी बॉडी लैंग्वेज सकारात्मक रखनी है। नेवादा के हेंडरसन की पासेओ वर्डे टीम के कोच एडवर्ड्स की टीम फाइनल में कुराकाओ के खिलाफ खेल रही थी। मैच हाथ से निकलता देख टीम के खिलाड़ी बुरी तरह निराश होने लगे थे। कुछ बच्चे आंसू रोकने की कोशिश कर रहे थे, कुछ मायूस होकर बैठे थे और कुछ एक-दूसरे को दोष दे रहे थे। उनकी बॉडी लैंग्वेज से साफ दिख रहा था कि उन्होंने मानसिक रूप से हार स्वीकार कर ली है। यह देखकर एडवर्ड्स ने टीम को अपने पास बुलाया और उन्हें समझाया कि मुश्किल समय में मानसिक रूप से मजबूत रहना सबसे जरूरी है। ब्रॉडकास्टर के कैमरों में कैद उनकी यह छोटी-सी स्पीच सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। कोच की बात का असर भी तुरंत दिखाई दिया। मायूस बैठे बच्चे फिर मुस्कुराने लगे और मैदान में खेल रहे अपने साथियों का उत्साह बढ़ाने लगे। मैच खत्म होने के बाद खिलाड़ियों की आंखों में आंसू जरूर थे, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला। इसके बाद पूरी टीम ने साथ बैठकर पिज्जा खाया और बास्केटबॉल खेला। दिन में स्टारबक्स के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर के रूप में काम करने वाले एडवर्ड्स ने बाद में बताया कि सही तरीके से हारना नहीं सीखेंगे तो हार की कड़वाहट पिछली जीतों और अच्छी यादों पर भी भारी पड़ सकती है। उनका कहना था कि परेशानी आने पर टूटने के बजाय उसका डटकर सामना करना चाहिए और बेस्ट देना चाहिए। उन्होंने बच्चों को यह भाषण मैच में किसी चमत्कारी वापसी के लिए नहीं दिया था, बल्कि एक सबक देने के लिए दिया था। उनके मुताबिक, चुनौती के समय हम किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं, यही हमारे चरित्र को दिखाता है। 12 साल की उम्र में यह बच्चों के लिए मुश्किल पल था, लेकिन आगे जिंदगी में उन्हें इससे भी बड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा। ऐसे में असली जीत सिर्फ मुकाबला जीतने में नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में खुद को सकारात्मक रखने में है। क्योंकि जीत हमें खुशी देती है, लेकिन हार को गरिमा के साथ स्वीकार करना हमें बेहतर इंसान बनाता है।
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