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Supreme Court ने छात्र को नोटिस भेजने पर Greater Noida मजिस्ट्रेट को लगाई फटकार

नयी दिल्ली, नौ सितंबर उच्चतम न्यायालय ने जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) की अगुवाई में हुए प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर एक छात्र को नोटिस जारी करने पर ग्रेटर नोएडा की कार्यकारी मजिस्ट्रेट को बुधवार को कड़ी फटकार लगाई। न्यायालय ने पूछा कि उसके पहले के आदेश के बावजूद मजिस्ट्रेट ने ऐसा नोटिस जारी करने की ‘‘हिम्मत’’ कैसे की। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि वह इस मामले में ग्रेटर नोएडा की कार्यकारी मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगेगा।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने पूछा कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकती हैं, जबकि शीर्ष अदालत पहले ही निर्देश दे चुकी है कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत भट्टाचार्य ने सीजेआई की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के छात्रों पर ‘‘प्रयोग’’ किया जा रहा है और यह नोटिस भी उच्चतम न्यायालय के एक सितंबर के आदेश के विपरीत था। हालांकि, नोटिस बाद में वापस ले लिया गया।

उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया अधिकारी अदालत की अवमानना के दोषी हैं और बाद में नोटिस वापस ले लेने से उन्हें अवमानना की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता। इस पर सीजेआई ने कहा, ‘‘आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। हमारे युवाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का कोई सवाल ही नहीं है।

हमने स्पष्ट आदेश पारित किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें हैरानी है कि मजिस्ट्रेट नोटिस कैसे जारी कर सकती हैं, जबकि हमने पहले ही किसी भी छात्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है। यह बिल्कुल स्पष्ट आदेश था।’’ प्रधान न्यायाधीश ने वरिष्ठ वकील से मामले के तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा। उन्होंने कहा, ‘‘हम स्पष्टीकरण मांगेंगे।

वह बताएं कि ऐसा क्यों किया गया।’’ पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया था कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के एक छात्र को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉजपा की अगुवाई में हुए प्रदर्शन में कथित तौर पर शामिल होने के मामले में ग्रेटर नोएडा की कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी किया था। नोटिस में शांति बनाए रखने के लिए छात्र से पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया था।

हालांकि, बाद में यह आदेश वापस ले लिया गया। हालांकि, छात्र अक्षत त्रिपाठी ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि उसने प्रदर्शन में शांतिपूर्वक हिस्सा लिया था तथा उस समय वह विश्वविद्यालय की कक्षाओं में शामिल नहीं हो रहा था। यह नोटिस चार सितंबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 130 के तहत जारी किया गया था।

उच्चतम न्यायालय ने एक सितंबर को उन सभी प्राथमिकियों को रद्द कर दिया था, जो देश भर में 20 से 25 जुलाई के बीच कॉजपा के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज की गई थीं। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया था कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक के कारण अपनी जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा दिया जाए। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही बंद करने के केंद्र के अनुरोध पर पीठ ने कहा था, “युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, हम पूरा न्याय करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं।” दिल्ली में 20 जुलाई को कॉजपा की अगुवाई में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुई थीं।

संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठियां चलाई थीं और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।

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Yogi Adityanath का बड़ा ऐलान: Anganwadi और Basic स्कूल बनेंगे विकसित भारत की रीढ़

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9 सितंबर को कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र और बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल आत्मनिर्भर और विकसित भारत बनाने के मुख्य केंद्र होंगे। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि देश के भविष्य की नींव गांवों और स्थानीय समुदायों से ही शुरू होती है। वाराणसी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत के मौके पर बोलते हुए, योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में देश के भविष्य को मज़बूत करने की कोशिशें शुरू की थीं। यह कोशिशें उस मॉडल पर आधारित थीं जिसे मोदी ने 2001 में गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू किया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2001 में जो विज़न देखा था, उसे आज पूरे देश में लागू किया जा रहा है।
 

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उत्तर प्रदेश के बारे में बात करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले कई आंगनवाड़ी केंद्र खराब हालत में थे। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े नौ सालों में 70,000 से ज़्यादा आंगनवाड़ी केंद्रों का नवीनीकरण किया गया है। राज्य और केंद्रीय वित्त आयोगों के तहत बजट आवंटन में इन केंद्रों को प्राथमिकता दी गई है, और अब 'बाल वाटिका' चल रही हैं ताकि बच्चे खेल-खेल में अक्षर और अंक सीख सकें।

योगी आदित्यनाथ ने याद दिलाया कि पहले कई केंद्रों में पीने का पानी, शौचालय और गर्म पका हुआ भोजन नहीं मिलता था, और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अक्सर अपना मानदेय मिलने में देरी होती थी। उन्होंने यह भी बताया कि 2017 में, जब यह पता चला कि उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों को शराब माफिया सामान सप्लाई कर रहे थे, तो सप्लाई की गुणवत्ता की जांच के आदेश दिए गए थे। उन्होंने इस साल के 'राष्ट्रीय पोषण माह' की थीम, "मेरी आंगनवाड़ी, मेरी ज़िम्मेदारी!" का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसे न केवल सरकार की ज़िम्मेदारी, बल्कि हर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम पंचायत और नागरिक का कर्तव्य भी माना जाना चाहिए।
 

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मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी देश की ताकत उसके युवाओं में होती है और युवाओं का भविष्य उनके बचपन से ही बनता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ माँ और स्वस्थ बच्चा ही एक स्वस्थ छात्र और युवा की नींव होते हैं; शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ युवा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेंगे और देश के भविष्य को दिशा देने में योगदान देंगे। वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और बेबी रानी मौर्य भी शामिल हुईं।
 
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विकेटों के पतझड़ के बीच गे और ब्रूक ने गाड़ा खूंटा, एजबेस्टन टेस्ट में इंग्लैंड को 23 रन की बढ़त

Emilio Gay-Harry Brook hits half centuries: एजबास्टन में इंग्लैंड-पाकिस्तान के बीच तीसरे टेस्ट का पहला दिन पूरी तरह गेंदबाजों के नाम रहा. दिन भर में कुल 14 विकेट गिरे. इंग्लैंड ने शानदार गेंदबाजी करते हुए पाकिस्तान की पहली पारी महज 133 रनों पर समेट दी. जोश टंग ने 4 विकेट झटके. जवाब में इंग्लैंड ने दिन का खेल खत्म होने तक 4 विकेट पर 156 रन बना लिए हैं. एमिलियो गे (60) और हैरी ब्रूक (नाबाद 52) की शानदार बल्लेबाजी की बदौलत इंग्लैंड ने 23 रनों की बढ़त लेकर मैच में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है. Wed, 9 Sep 2026 23:38:05 +0530

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