Bihar Flood: 14 जिलों में नदियां उफान पर, 40 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
पटना, नौ सितंबर बिहार में पिछले चार-पांच दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा के कारण 14 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार राज्य में 40.21 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि लगातार बारिश के कारण नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं।
नेपाल में हुई भारी वर्षा के चलते भी कई नदियां विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया और अरवल जिलों के 84 प्रखंडों की 514 ग्राम पंचायतों के लगभग 40.21 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। विभाग के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, भागलपुर के सुल्तानगंज में बुधवार सुबह नौ बजे गंगा का जलस्तर 36.78 मीटर दर्ज किया गया, जो 17 अगस्त 2021 के 36.75 मीटर के पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) से अधिक है।
हालांकि, जलस्तर फिलहाल स्थिर बना हुआ है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा समेत कई नदियां विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। डुमरिया घाट में गंडक, बलतरा और कुरसेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, दीघा, गांधी घाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में गंगा, श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती तथा दरौली और गंगपुर सिसवन में घाघरा नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में 723 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा 15 राहत शिविरों में 13,446 विस्थापित लोगों के ठहरने, भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। बुलेटिन के अनुसार अब तक 1.94 लाख पॉलीथिन शीट और लगभग 29,400 सूखा राशन पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।
निकासी और आवागमन के लिए 1,979 नौकाएं लगाई गई हैं तथा 5,178 क्विंटल पशु चारा भी वितरित किया गया है। प्रमुख बैराजों से जल निकासी की स्थिति पर विभाग ने बताया कि बुधवार सुबह 10 बजे गंडक बैराज से 86,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था और प्रवृत्ति स्थिर थी। इस वर्ष इसका अधिकतम प्रवाह 14 जुलाई को 2.24 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया था।
कोसी बैराज से 1,48,200 क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया, जबकि इंद्रपुरी बैराज (सोन नदी) से 80,785 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था और वहां जल प्रवाह बढ़ने की प्रवृत्ति बनी हुई है। इस वर्ष इंद्रपुरी बैराज से सर्वाधिक 5,63,654 क्यूसेक पानी दो सितंबर को छोड़ा गया था। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की 27 तथा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 10 टीमों को तैनात किया गया है।
निर्माण श्रमिकों के सशक्तिकरण पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे डॉ. मनसुख मांडविया
नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से 11 और 12 सितंबर को मुंबई में भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों (बीओसीडब्ल्यू) पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने जा रही है, जिसकी अध्यक्षता श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया करेंगे। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी एक बयान के अनुसार, इस सम्मेलन का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार संबंधी व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाना है।
बयान में कहा गया है कि सम्मेलन में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के श्रम मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी, भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्डों के अध्यक्ष और सचिवों के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
भारत में निर्माण क्षेत्र रोजगार का एक बड़ा स्रोत है और करोड़ों श्रमिकों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) के लागू होने के बाद यह सम्मेलन बीओसीडब्ल्यू ढांचे की समीक्षा करने और श्रमिक कल्याण बोर्डों की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।
सम्मेलन के दौरान श्रमिकों का पंजीकरण, कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच, वैधानिक जिम्मेदारियां, कल्याण कोष के उपयोग और निगरानी व्यवस्था जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा तकनीक-आधारित सेवाओं और विभिन्न योजनाओं के बेहतर समन्वय के जरिए श्रमिकों तक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
दो दिवसीय इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्यों के बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्डों द्वारा अपनाई गई सफल पहलों और नवाचारों को साझा करना होगा।
सरकार का मानना है कि इससे विभिन्न राज्यों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और बेहतर मॉडलों को अपनाने का अवसर मिलेगा, जिससे निर्माण श्रमिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा।
सम्मेलन में नवंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के दौरान शुरू की गई तीन प्रमुख पहलों की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी, जिनमें स्टेट बीओसीडब्ल्यू डिजिटल लेबर चौक, लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र तथा ऑनलाइन बीओसीडब्ल्यू उपकर संग्रह पोर्टल शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य रोजगार सुविधा को मजबूत करना, श्रमिकों को सम्मानजनक एवं सुलभ सेवाएं उपलब्ध कराना तथा उपकर संग्रह और निगरानी प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना है।
इसके अलावा, सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय श्रम गतिशीलता मार्ग, कौशल विकास, रोजगार अवसर, श्रम सांख्यिकी और लेबर स्टैक जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी।
मंत्रालय के अनुसार, इस आयोजन का लक्ष्य केंद्र, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्डों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, क्रियान्वयन संबंधी कमियों की पहचान करना और निर्माण श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, कल्याण योजनाओं तथा रोजगार अवसरों की अधिक प्रभावी और सुलभ व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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